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Chhattisgarh News निगम मंडल के अध्यक्षों की नियुक्ति नहीं कर पा रही है विष्णु की मुख्यमंत्री कार्यकाल में।

सुशासन के राज्य में डीजल एवं रासायनिक उर्वरक की समस्या बरकरार है।

ब्यूरोचीफ राकेश कुमार साहू जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनकर तैयार हो चुकी है मगर ऐसा स्थित है कुछ विभागों में निगम मंडल की अध्यक्षों की नियुक्ति कर दी गई है बाकी को छोड़ दिया गया है अब यह तो मुख्यमंत्री ही जाने प्राय प्राय यह देखा जा रहा है कि अभी भी महत्वपूर्ण पद में भूपेश सरकार की जो मंडल अध्यक्ष निगम अध्यक्ष अभी तक के कार्य कर रहे हैं उनको हटाया नहीं गया है जैसे की मां को राज्य महिला आयोग में मानवाधिकार आयोग सूचना आयोग जैसे कार्यालय में निगम मंडल की अध्यक्षों की नियुक्ति पूर्व सरकार के द्वारा की गई थी जो कि आज भी बरकरार है अपने पद पर वर्तमान भारतीय जनता पार्टी की सरकार विष्णु मुख्यमंत्री के द्वारा निगम मंडल के अध्यक्षों की नियुक्ति बाकी है ढाई साल गुजर चुके हैं अभी तक के निगम मंडल के अध्यक्षों की प्रतिपूर्ति नहीं कर पा रहा है इसी तरह से जिन विभागों में निगम की नियुक्ति की गई है छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम में मोना सेन को नियुक्त किया गया है वहीं खनिज विकास निगम में सौरभ सिंह पूर्व विधायक को नियुक्त किया गया है बाकि में नियुक्त करना बाकी है वह कब तक के होगा यह विधाता ही जाने।

सुशासन के राज्य में डीजल एवं रासायनिक उर्वरक की समस्या बरकरार है डीजल के लिए पेट्रोल टंकी में ट्रैक्टरों को लाइन लगाना पड़ रहा है कई डीजल टैंकों में डीजल ही उपलब्ध नहीं है पेट्रोल पंप वाले ट्रैक्टर वालों को 5 लीटर से ज्यादा डीजल नहीं दे रहे हैं क्योंकि वर्तमान में बरसात का फसल बोना है जिसके लिए किसानों को पर्याप्त मात्रा में डीजल उपलब्ध नहीं कर पा रही है वहीं दूसरी तरफ रासायनिक उर्वरक की समस्या बरकरार है विष्णु मुख्यमंत्री कहता है कि मेरे राज्य में रासायनिक उर्वरक की समस्या नहीं है प्रतिपूर्ति कर रहा हूं मगर यह देखा जा रहा है हमारे रिपोर्टर के गांव में सोसाइटी संचालित है जहां पर रासायनिक खाद ही नहीं है पता करने पर कहता है कि नहीं आ रहा है ऊपर से इसलिए रासायनिक खाद की समस्या बरकरार है वही रासायनिक खाद एवं अन्य सामग्री की समस्या बरकरार है किसान जब जाता है सोसाइटी में रासायनिक उर्वरक लेने के लिए तो उसको कहता है समिति के द्वारा खाद नहीं आया है इस तरह की वक्तव्य आते रहते हैं किसान परेशान है महंगी डीजल महंगी शिक्षा महंगी स्वास्थ्य सरकार बुनियादी सुविधाओं को उपलब्ध कराने में असमर्थ हो रही है अच्छे दिन आएंगे कहते हैं मगर यही अच्छे दिन है जहां पर सुशासन का राज है वहां पर दुशासन का राज है दुशासन यानी की त्रिशंकु मुख्यमंत्री तीनों मुख्यमंत्री की राह अलग-अलग है सोच विचार भी अलग-अलग है कार्य भी अलग-अलग है जिसकी वजह से सामंजस नहीं बन पाने के कारण समस्या बरकरार है।

इस तरह से सुशासन की राज्य में निगम मंडल की अध्यक्षों की नियुक्ति की प्रतिपूर्ति नहीं की है डीजल की भी प्रतिपूर्ति नहीं कर पा रही है रासायनिक उर्वरक की भी आपूर्ति नहीं कर पा रही है समस्या बरकरार है ऐसा लगता है कि सुशासन की राज्य करने वाले विष्णु मुख्यमंत्री का कार्यकाल ढाई वर्ष जैसा गुजर चुका है वैसा ही गुजर जाएगा मगर समस्या बरकरार रहेगा पूर्व में जब धान खरीदी हुआ था तो राज्य सरकार यह बोल रहा था धन घोटाला वाले में चूहा खा गया धन को बोल रहा था तो क्या वर्तमान में रासायनिक उर्वरक को भी चूहा खाने लगा है क्या इसलिए ऐसा प्रतीत हो रहा है रासायनिक उर्वरक घोटाला का एक और मामला चलने वाला है ऐसा महसूस किया जा रहा है वर्तमान सुशासन की राज्य में।

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