Jharkhand News ‘ट्री मैन’ रवि निषाद ने महिलाओं में जगाई उद्यमिता की अलख, निरसा में 115 दीदियों को आत्मनिर्भरता का दिया मंत्र
खेती से लाखों की कमाई का रास्ता बताया, IIT-ISM और TATA MPL की कार्यशाला में महिलाओं को मिला स्वरोजगार का प्रशिक्षण

ब्यूरो चीफ मिथिलेश पांडे धनबाद झारखण्ड
धनबाद, 13 जून 2026। आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने की दिशा में निरसा के पांडा पंचायत में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। IIT-ISM धनबाद और TATA MPL के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित उद्यमिता जागरूकता कार्यशाला में 115 ग्रामीण महिलाओं ने भाग लेकर स्वरोजगार और कृषि आधारित उद्यम के गुर सीखे। कार्यशाला में जय धरती माँ फाउंडेशन के संस्थापक एवं ‘द ट्री मैन ऑफ झारखंड’ के नाम से प्रसिद्ध रवि कुमार निषाद को मुख्य प्रशिक्षक के रूप में आमंत्रित किया गया। उन्होंने महिलाओं को कृषि, बागवानी और वृक्षारोपण आधारित व्यवसाय के विभिन्न मॉडल समझाते हुए कम लागत में बेहतर आय अर्जित करने के तरीके बताए। रवि कुमार निषाद ने कहा कि आज के समय में महिलाओं का आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने महिलाओं को सरकारी नौकरी के इंतजार में समय गंवाने के बजाय स्वरोजगार अपनाने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि एक एकड़ भूमि में गेंदा की खेती कर छह माह में लगभग 60 हजार रुपये तक की आय अर्जित की जा सकती है। वहीं आम, अमरूद और पपीता जैसे फलों की खेती से दस माह में तीन लाख रुपये तक की कमाई संभव है। इसके अलावा बंजर भूमि पर मलेशियन साल, मालाबार नीम और अगरवुड जैसे बहुमूल्य वृक्ष लगाकर भविष्य में आर्थिक समृद्धि हासिल की जा सकती है।

उन्होंने कहा, “हमारी दीदियां अब केवल मजदूर नहीं बल्कि मालिक बनेंगी। खेती को घाटे का सौदा नहीं बल्कि लाभकारी व्यवसाय के रूप में अपनाना होगा। यही आत्मनिर्भर भारत की वास्तविक तस्वीर है।” कार्यशाला में मौजूद महिलाओं ने प्रशिक्षण को प्रेरणादायक बताया। कई प्रतिभागियों ने कहा कि अब वे पारंपरिक खेती के साथ-साथ फूलों और फलदार पौधों की व्यावसायिक खेती शुरू करने पर विचार करेंगी। IIT-ISM धनबाद के प्रतिनिधियों ने कहा कि रवि कुमार निषाद का जमीनी अनुभव और सफल मॉडल ग्रामीण महिलाओं को नई दिशा देने का काम कर रहे हैं। वहीं TATA MPL की CSR टीम ने चयनित महिलाओं को नर्सरी विकास, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार से जोड़ने में सहयोग का आश्वासन दिया। करीब 15 वर्षों से पर्यावरण संरक्षण और हरित उद्यमिता के क्षेत्र में कार्यरत रवि कुमार निषाद आज ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और वृक्षारोपण आधारित रोजगार को बढ़ावा देकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम चला रहे हैं। उनकी यह पहल ‘लोकल से ग्लोबल’ और ‘मजदूर से मालिक’ बनने की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनती जा रही है।




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