श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में विश्वशांति हरिहर महायज्ञ का आयोजन, 13 जून को महाभंडारा

बदलते सामाजिक परिवेश, प्रकृति के बढ़ते संकट और सनातन संस्कृति के संरक्षण के संकल्प के साथ शहर के पनारापारा स्थित रियासतकालीन प्राचीन श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में विश्वशांति हरिहर महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। 8 जून से 12 जून तक चलने वाले इस पंचदिवसीय महायज्ञ में विश्व कल्याण, पर्यावरण शुद्धि, सुख-समृद्धि और अखंड भारतवर्ष के अभ्युदय की कामना के साथ वैदिक अनुष्ठान संपन्न होंगे।
आयोजन से जुड़े आचार्य पंडित रोमित त्रिपाठी ने बताया कि वैदिक परंपरा में यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि प्रकृति, समाज और मानव जीवन के संतुलन का माध्यम माना गया है। शास्त्रों में वर्णित है कि यज्ञ से पर्यावरण शुद्ध होता है, समय पर वर्षा होती है और समस्त प्राणियों के जीवन के लिए आवश्यक अन्न की समृद्धि सुनिश्चित होती है। उन्होंने कहा कि आज जब जल, जंगल और पर्यावरण संरक्षण वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है, तब यज्ञ का संदेश और भी अधिक प्रासंगिक हो जाता है। महायज्ञ के माध्यम से लोगों को नदियों, तालाबों और जलस्रोतों की स्वच्छता, वृक्षारोपण तथा प्रकृति संरक्षण का संदेश भी दिया जाएगा। आयोजन समिति के अनुसार यज्ञ समाज के सभी वर्गों को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करता है। इसमें विभिन्न समुदायों की सहभागिता हमारी सनातन संस्कृति की समरसता और वसुधैवकुटुम्बकम् की भावना को साकार करती है। महायज्ञ के उपरांत 12 एवं 13 जून को कलियुग के महामंत्र हरिनाम का अखंड संकीर्तन होगा और 13 जून को ही पूर्णाहुति एवं विशाल महाभंडारे के साथ आयोजन का समापन किया जाएगा, जिसमें सभी श्रद्धालुओं के लिए प्रसादी की व्यवस्था रहेगी।
बता दें कि प्राचीन श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में आयोजित होने वाला अखंड संकीर्तन और महायज्ञ क्षेत्र की धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रत्येक वर्ष आयोजित इस आध्यात्मिक आयोजन में आसपास के लगभग 15 गांवों के ग्रामीण श्रद्धापूर्वक शामिल होते हैं। वैदिक यज्ञ, अखंड हरिनाम संकीर्तन और सामूहिक प्रसादी के माध्यम से यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता का भी सशक्त संदेश देता है।



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