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Chhattisgarh News अंतरजातीय विवाह करने पर 11 साल से सामाजिक बहिष्कार झेल रहा परिवार, युवक के जीते-जी कर दिया मृत्यु भोज

रिपोर्टर मनोज मानिकपुरी कोरबा छत्तीसगढ़

समाज में सामाजिक समरसता और अंतर्जातीय विवाह को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से तमाम प्रयास और प्रोत्साहन राशियां दी जा रही हैं, लेकिन आज भी जमीनी हस्तर पर रूढ़िवादी और सामाजिक कानून हावी हैं। ऐसा ही एक झकझोर देने वाला मामला पाली थाना क्षेत्र के ग्राम पोंडी से सामने आया है, जहाँ एक परिवार पिछले 11 सालों से सामाजिक बहिष्कार का दंश झेल रहा है। हद तो तब हो गई जब समाज के कथित ठेकेदारों ने युवक के जीवित रहते हुए ही उसका ‘मृत्यु भोज’ करा दिया। मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम पोंडी निवासी अशोक कुमार प्रजापति का पड़ोस के गाँव की एक युवती से प्रेम संबंध था। दोनों ने जीवन भर साथ निभाने का फैसला किया और 4 जुलाई 2015 को प्रेम विवाह (अंतर्जातीय विवाह) कर लिया। यह बात समाज के कुछ कथित ठेकेदारों को नागवार गुजरी। उन्होंने शादी का विरोध करते हुए गाँव में एक सामाजिक बैठक बुलाई, जिसमें जिले और पड़ोसी जिलों के सामाजिक पदाधिकारी शामिल हुए। ​जीते-जी मृत्यु भोज और माता-पिता से मिलने पर रोक ​बैठक में नवविवाहित जोड़े का पूर्ण सामाजिक बहिष्कार करने का फरमान सुना दिया गया। उनके किसी भी सामाजिक कार्यक्रम में आने-जाने और शामिल होने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई। प्रताड़ना की सारी हदें तब पार हो गईं, जब अशोक के जीवित होने के बावजूद समाज में उसका मृत्यु भोज आयोजित करा दिया गया, जिसमें समाज के लोगों ने हिस्सा भी लिया।

​इतना ही नहीं, समाज के प्रमुखों ने पीड़ित के पूरे परिवार का भी बहिष्कार कर दिया था। बाद में पीड़ित के परिवार से मोटी रकम (जुर्माना) वसूल कर अन्य सदस्यों को तो समाज में वापस शामिल कर लिया गया, लेकिन अशोक, उसकी पत्नी और बच्चों पर अपने ही माता-पिता से मिलने पर सख्त रोक लगा दी गई। इस कड़े सामाजिक प्रतिबंध के कारण पीड़ित दंपत्ति अपने दो बच्चों के साथ पिछले कई सालों से चैतमा में रहने को मजबूर हैं। ​पुलिस और प्रशासन से न्याय की गुहार ​लगातार 11 वर्षों तक सामाजिक प्रताड़ना झेलने के बाद, पीड़ित अशोक कुमार प्रजापति ने 29 मई 2026 को पाली थाना और अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) कार्यालय में आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित ने अपनी शिकायत में उन समाज प्रमुखों का भी उल्लेख किया है जिन्होंने यह बैठक बुलाई थी और उन पर मानसिक व सामाजिक दबाव बनाया था। ​अधिकारियों का वक्तव्य: “शिकायत मिलने पर मामले की जांच-पड़ताल की जा रही है। इस सामाजिक बैठक और बहिष्कार में शामिल संबंधित लोगों को तलब कर उनका बयान दर्ज किया जा रहा है। जांच के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

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