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Uttar Pradesh News वाराणसी देहव्यापार के दलदल में धंसता बनारस !

रिपोर्टर निखिलेश कुमार मिश्रा वाराणसी उत्तर प्रदेश

बनारस का सिगरा इलाका हर थानों के लिहाज से हर अनैतिक धंधों में अन्य इलाकों से थोड़ा ज्यादा है। इस थानाक्षेत्र के रोडवेज चौकी अंतर्गत आने वाले कैंट स्टेशन के ठीक सामने पड़ने वाले होटलों-लॉजों में पुलिस की मौन सहमति से देहव्यापार का धंधा फल-फूल रहा है। यहां के कई होटलों में बाहर से कांट्रैक्ट पर लड़कियां आती हैं। बहरहाल वह बंद कमरे की बात है। अब खुले लबे रोड और दिन के उजालों की बात जानिए। दिन रविवार शाम के चार बजे हम एक तेरहवीं से बजरिये ऑटो कैंट वापस आए और पैदल बढ़ चले परेड कोठी की तरफ। एक ठेले पर कुछ खाने के उद्देश्य से रुके तो बैग लटकाए, मुंह पर मास्क लगाए सामने से एक औरत कई बार चक्कर लगाई। मैं उसके हावभाव से अंदाजा लगाने लगा। नजर मिलते ही उसने भौंह उचकाकर इशारा किया। मैं समझ गया कि यह देहव्यापार में लिप्त महिला है। मेरी तरफ से कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर वह आगे बढ़ी और एक जगह ठहर गई। उसके कुछ मिनट बाद उसके आसपास कोई सलवार-कुर्ते में तो कोई जींस-टॉप में तकरीबन छह महिलाएं जुट गईं। सबके चेहरे पर मास्क और कंधे पर एक छोटा बैग। मास्क से आधा चेहरा ढंकना उनकी मूल पहचान होती है।

मेरे इंफॉर्मर ने बताया था कि यह दिन के उजाले से लेकर रात के अंधेरे तक कैंट स्टेशन पर उतरे रंगीन मिजाज, खासकर अकेले आए पुरुषों की टोह लेती हैं। फिर उन्हें अपने जाल में फंसाने के बाद तयशुदा होटल में ले जाती हैं। कुछ मिशन सक्सेज करके वापस आते हैं, कुछ इनके जाल में फंसकर रुपया-पैसा और महंगी वस्तुएं गंवा देते हैं। इस काम में होटल कर्मी भी ऐसी महिलाओं का साथ देते और हिस्सा लेते हैं। रंगीन सपने सजाया व्यक्ति जब लूटपिट जाता है तब उसे समझ आता है।मगर लोकलाज और बदनामी के डर से शिकायत भी नहीं करता। और पुलिस के पास जाए तो जाए कैसे क्या कहेगा कि हम “R&D बाजी” करने आए थे और हमको लूट लिया गया। इसी सोच के कारण शिकायत नहीं करते। और शिकायत करके भी क्या कर लेंगे। अमूमन पुलिस आरोपियों की ही पैरोकार बन जाती है। ऐसी महिलाएं ऑटो चालकों को भी सेट किए रहती हैं। रात में ऑटो में बिठाकर शिकार को कहीं सुनसान जगह पर ले जाती हैं और किराया भर छोड़कर जेब-पर्स खाली करा देती हैं।

और यह सब हो रहा उस नगरी में जिसकी पहचान धार्मिक और आध्यात्मिक नगरी के साथ देश के प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र की भी है, जहां देश-विदेश से रोज हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भीड़ आती है। सवाल यह है कि यदि स्टेशन के आसपास ही इस तरह के खेल खुलेआम चलते रहें तो शहर की छवि पर उसका क्या असर पड़ेगा…कभी कभार सिगरा पुलिस औपचारिकता निभाती है,दो चार को पकड़ लाती है। जबकि पुलिस चाह जाए तो यह क्या इनकी परछाईं नजर न आये।

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