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Chhattisgarh News शिक्षक ने निभाया पर्यावरण धर्म:2000पेड़ लगाने वाले डॉ सारथी को मिला विश्व पर्यावरण गौरव सम्मान 2026

ब्यूरोचीफ राकेश कुमार साहू जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़

सक्ती/डभरा, 5 जून 2026: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सक्ती जिले के किरारी (ड) गांव निवासी डॉ. टीकाराम सारथी “हसमुख”(व्याख्याता) को “विश्व पर्यावरण गौरव सम्मान 2026” से अलंकृत किया गया है। पार्श्व अंतर्राष्ट्रीय वि. वि. धर्मार्थ न्यास द्वारा दिया गया यह सम्मान उनके पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए अनुकरणीय कार्यों के लिए प्रदान किया गया।

“केले वाले गांव” से “हसमुख जंगल” तक का सफर: कभी केला उत्पादन के लिए प्रसिद्ध रहे किरारी (ड) गांव की हरियाली समय के साथ लुप्त हो गई थी। गांव के नाम का अपभ्रंश भी “केलारी” से “किरारी” इसी बदलाव का प्रतीक है। इस खोई हुई पहचान को वापस लाने का संकल्प लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन के जिलाध्यक्ष सक्ती डॉ. सारथी ने अपनी पत्नी श्रीमती सीता सारथी के साथ मिलकर 2000 फलदार एवं छायादार पौधों का रोपण कर “हसमुख जंगल” की नींव रखी। डॉ. सारथी के वृक्षारोपण, जल संरक्षण, स्वच्छता अभियान, जैव विविधता संवर्धन और पर्यावरण जागरूकता के प्रयासों को भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बताया गया है। आयोजकों ने कहा कि “पर्यावरण बचाएँ, भविष्य सजाएँ” के मूलमंत्र पर चलकर डॉ. सारथी ने समाज को हरित एवं स्वच्छ बनाने का कार्य किया है।

कलचुरी तालाब से प्रेरणा: डॉ. सारथी ने बताया कि कलचुरी राजा जाजल्लदेव द्वारा निर्मित 1000 साल पुराना हीराबांधा तालाब आज भी गांव को जल प्रदान कर रहा है। इसी से प्रेरणा लेकर उन्होंने संकल्प लिया कि उनका लगाया गया 2000 पेड़ों का जंगल भी आने वाली 1000 पीढ़ियों को स्वच्छ ऑक्सीजन देता रहेगा।सम्मान मिलने के बाद डॉ. सारथी ने कहा, “यह सम्मान मेरा नहीं, किरारी (ड) की उस मिट्टी का है जिसने मुझे एक प्रकृति के रुप में अनमोल जीवन दिया।अब अगला लक्ष्य 20000 पेड़ का है। विश्व पर्यावरण दिवस पर डॉ. सारथी को सम्मान मिलने पर प्रदेश के पर्यावरणविदों, शिक्षाविदों के साथ ही प्रकृति प्रेमियों ने बधाई दी है। इस अवसर पर शिक्षक फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष राजेश चटर्जी, प्रमुख महामंत्री सतीश ब्यौहरे सहित जिले के सभी पदाधिकारियों एवं शिक्षक साथियों ने डॉ. सारथी को बधाई दी। फेडरेशन ने कहा कि डॉ. सारथी ने सिद्ध किया है कि एक शिक्षक समाज को कलम से ही नहीं, कुदाल से भी बदल सकता है।

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