कलम का धर्म: जब तक सच जिंदा है, लोकतंत्र जिंदा है प्रदेश महासचिव अवधेश सिंह यादव
सिरौली/ बरेली——द जर्नलिस्ट एसोसिएशन पत्रकार संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश डी यादव के निर्देशन पर व प्रदेश महासचिव अवधेश सिंह यादव के नेतृत्व में थाना सिरौली में पत्रकार साथी राहुल पाल जो कि संगठन में सदस्य के पद पर नियुक्त हैं उनके निवास पर आज मीटिंग का आयोजन एवं पत्रकारिता दिवस भी मनाया गया जिसमें प्रदेश मंडल जिला और तहसील ब्लाक कार्यकारिणी के सभी पदाधिकारी मौजूद रहे पत्रकारिता दिवस पर विशेष आयोजन किया गया
इस अवसर पर प्रदेश महासचिव अवधेश यादव ने अपने विचार व्यक्त किये और उन्होंने बताया 30 मई 1826, यही वह ऐतिहासिक तारीख थी जब कलकत्ता से ‘उदन्त मार्तण्ड’ का पहला अंक छपकर निकला और हिन्दी पत्रकारिता का सूर्योदय हुआ। पंडित जुगल किशोर शुक्ल की वह हिम्मत आज 200 साल बाद भी हर पत्रकार की रगों में दौड़ती है। पत्रकारिता दिवस केवल एक तारीख नहीं, एक चेतावनी है — कि लोकतंत्र की नींद उड़ाने वाली कलम कभी सोनी नहीं चाहिए।
आजादी की लड़ाई से लेकर डिजिटल लड़ाई तक
मंडल संरक्षक बीएस चंन्देल ने भी विचार व्यक्त किये ‘प्रताप’ के गणेश शंकर विद्यार्थी हों या ‘कर्मवीर’ के माखनलाल चतुर्वेदी — हिन्दी पत्रकारिता ने अंग्रेजी हुकूमत की चूलें हिला दीं। जेल गए, लाठियाँ खाईं, पर झुके नहीं। आज लड़ाई बदली है। अब बंदूक की जगह ‘फेक न्यूज’ है, लाठी की जगह ‘ट्रोल आर्मी’ है और सेंसर की जगह ‘एल्गोरिद्म’ है। पर पत्रकार का दुश्मन आज भी वही है — झूठ।
बरेली मंडल अध्यक्ष निवास यादव ने भी अपने विचार व्यक्त किये ——77 साल के सफर ने देखा है कि कैसे एक खबर पहाड़ का सीना चीरकर सड़क बनवा देती है, कैसे एक रिपोर्ट सूखे खेत में पानी ला देती है। 2013 की केदारनाथ आपदा हो या कोरोना का वो काला दौर — अखबार तब भी छप रहा था, जब सब कुछ बंद था। क्योंकि खबर रुकती है तो उम्मीद रुक जाती है।
टीआरपी नहीं, भरोसा कमाते हैं हम
बरेली जिला अध्यक्ष शहंशाह ने भी विचार व्यक्त किये ——आज के दौर में सूचना का सैलाब है। मोबाइल की स्क्रीन पर हर सेकंड ‘ब्रेकिंग’ चमकती है। पर सवाल है — कितनी खबरों में ‘सच’ चमकता है? जब अफवाह एक गाँव जला सकती है, तब पत्रकार की जिम्मेदारी डॉक्टर से कम नहीं होती। एक गलत इंजेक्शन जान ले लेता है, एक गलत हेडलाइन समाज ले लेती है।
इसीलिए पत्रकारिता का मंत्र रहा है — ‘जोश में होश’। तेजी हमारी मजबूरी है, सच्चाई हमारी मजबूती। हम खबर पहले देने की दौड़ में नहीं, खबर सही देने की जिद में हैं। क्योंकि पाठक हमसे टीआरपी नहीं, भरोसा माँगता है। और भरोसा रोज कमाना पड़ता है।
गाँव की चौपाल से संसद तक
प्रेमचंद ने कहा था, “साहित्य राजनीति के आगे चलने वाली मशाल है।” पत्रकारिता उस मशाल का तेल है। जब तक गाँव, गरीब और गणतंत्र अखबार के केंद्र में रहेंगे, तब तक लोकतंत्र का चौथा खंभा मजबूती से खड़ा रहेगा।
इस दिवस पर तीन संकल्प
सत्ता से सवाल- हम कुर्सी से नहीं, जनता से वफादारी निभाएँगे। सवाल पूछना हमारा हक नहीं, फर्ज है।
संतुलन से सरोकार- पक्ष-विपक्ष दोनों की सुनेंगे, पर फैसला पाठक के विवेक पर छोड़ेंगे। एजेंडा नहीं, एविडेंस देंगे।
गति के साथ मर्यादा-डिजिटल सबसे तेज माध्यम है, पर ‘पहले हम’ की होड़ में ‘सही हम’ को नहीं भूलेंगे।
पत्रकारिता दिवस पर उन सभी रिपोर्टर्स, डेस्क के साथियों, हॉकर्स और प्रेस कर्मियों को सलाम, जो आधी रात को मशीन चलाते हैं ताकि सुबह आपकी चाय के साथ सच पहुँचे। उन शहीद कलमकारों को नमन, जिन्होंने खबर की कीमत जान देकर चुकाई।
याद रखिए — तानाशाह पहले अखबार बंद कराते हैं, फिर जुबान। जब तक नुक्कड़ पर अखबार बिक रहा है, समझिए देश में लोकतंत्र जिंदा है।
“कलम में इतनी ताकत रखो कि सच बोलने से पहले सोचना न पड़े, और इतनी शराफत रखो कि सच बोलने के बाद शर्मिंदा न होना पड़े।”
इस अवसर पर हिंदी पत्रकारिता दिवस के आयोजन पर सिरौली थाना प्रभारी। एक पेन और एक डायरी हर पत्रकार साथी को भेंट की
इस मौके पर मौजूद रहे द जर्नलिस्ट एसोसिएशन पत्रकार संगठन के प्रदेश महासचिव अवधेश सिंह यादव, मंडल संरक्षक बीएस चंन्देल, मंडल अध्यक्ष निवास यादव, मंडल महासचिव राजेश यादव, मंडल सचिव अशोक आर्य, बरेली जिला संयोजक सुधीर कुमार शर्मा, जिला प्रभारी आशीष शर्मा, जिला अध्यक्ष शहंशाह, जिला उपाध्यक्ष सूरज सागर, सद्दाम खान, तहसील अध्यक्ष राजकमल चौहान, परशुराम वर्मा, राहुल पाल ,अर्जुन दिवाकर, विपिन श्रीवास्तव, रवि साहू ,अंशुल कुमार पुष्पक, चन्दन शर्मा,भूपेंद्र कुमार, कुणाल आर्य, अंनिकेत कुमार आदि लोग मौजूद रहे



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