Chhattisgarh News छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री का मीडिया मैनेजमेंट नहीं कर पा रही है।
फिल्मों की प्रचार प्रसार हेतु पत्रकार का मुख्य भूमिका रहता है।

ब्यूरोचीफ राकेश कुमार साहू जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री करोड़ और वह रुपए लगाकर फिल्म बनाता है और फिल्म को प्रदर्शित करता है और एक छोटा सा प्रेस कॉन्फ्रेंस करता है मगर उसे प्रेस कांफ्रेंस के दौरान पत्रकारों की मेहनत आना अर्थात मीडिया मैनेजमेंट नहीं कर पाता।
पत्रकार एक विज्ञापन की डिमांड करता है तो प्रोड्यूसर डायरेक्टर ध्यान नहीं देता बोलता है कि मेरा फिल्म का खबर प्रसारित कर दिए उसके बाद में जब विज्ञापन की बारी आती है तो विज्ञापन के लिए खर्च नहीं करता पत्रकारों को आने-जाने की भी खर्च नहीं देता प्रदूषण डायरेक्टर यह सोचता है कि मेरी फिल्म का प्रचार प्रसार मुफ्त में हो जाए मगर वहीं पर पत्रकारों को सम्मान भी नहीं मिलता यहां तक के की पात्रता जब भी फिल्म देखने जाते हैं तो पत्रकारों को टिकट लेना पड़ता है जबकि पत्रकारों के लिए बिना टिकट का देखने का आदेश रहता है।
प्रोड्यूसर डायरेक्टर कहता है कि मेरी फिल्मों का प्रमोशन होना चाहिए वैसा होना चाहिए ऐसा होना चाहिए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रिंट मीडिया में बढ़ चढ़कर मेरा रिपोर्ट को डालो मेरी फिल्म का रिपोर्ट को डालो अच्छी पब्लिसिटी करो मगर वहीं पर मीडिया मैनेजमेंट पर ध्यान नहीं देता जिसकी वजह से कभी कभार फिल्म सुपर फ्लॉप हो जाता है पत्रकार अपने घर से जब निकलता है तो उसको विश्वास रहता है कि सामने जब उसकी खबर में लगाने के लिए तैयार हो रहा हूं और लगाने के लिए निर्माता के पास या प्रेस कॉन्फ्रेंस में जाता है तो वहां पर उसकी आने जाने एवं अन्य खर्चो की नहीं तो जरूर रहती है जब पैसे की बारी आती है तो प्रोड्यूसर डायरेक्टर अपने आप हाथ खड़ा कर देते हैं बोलते हैं कि मीडिया मैनेजमेंट के लिए हमारे पास में पैसा नहीं है ऐसा कहा जाता है।
आज के दौर में महंगाई की स्थिति में कोई भी पत्रकार पेट के लिए जीता है और पेट के लिए मरता है मीडिया मैनेजमेंट नहीं कर पा रही है छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री जबकि हिंदी फिल्म जगत में जब कोई सा भी फिल्म आता है तो उसके जितने भी पत्रकार रहते हैं सभी को उसे फिल्म के प्रोड्यूसर डायरेक्टर के द्वारा समाचार की संचालन हेतु कवरेज के लिए मीडिया मैनेजमेंट रहता है जहां पत्रकारों की खर्च वहन करता है मगर वही पर छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री के द्वारा किसी भी प्रकार की खर्च नहीं किया जाता एक कहावत है कि एक विज्ञापन का खर्चा ₹3000 से लेकर 100000 डेढ़ लाख रुपए का विज्ञापन लगता है उसविज्ञापन को भी नहीं दे पाता।
एक छोटा सा विज्ञापन जो की 5000 का रहता है वह 501 हीरोइन की ब्यूटी पार्लर की खर्च होती है उसे एक ब्यूटी पार्लर के खर्च की राशि को विज्ञापन के बतौर में नहीं दे पाता प्रोड्यूसर डायरेक्टर जिससे पत्रकार विशेष कवरेज रिपोर्ट नहीं दे पाता जो भी खबर लगता है सुनी सुनाई बातों पर ही लगता है।



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