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Chhattisgarh News शक्ति कपूर बहुत परेशान थे। क्योंकि उनके भविष्य का सवाल था।

शक्ति समझ नहीं पा रहे थे कि वो अपने जीवन के साथ क्या करना चाहते हैं? जबकी वो अपनी उम्र के एक बड़े ही अहम पड़ाव पर थे।

ब्यूरो चीफ राकेश कुमार साहू जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़

उसी पड़ाव पर कोई इंसान अपने भविष्य की राह चुनता है। मगर शक्ति कपूर को अपना भविष्य चुनने में संघर्ष का सामना करना पड़ रहा था। अपने घर पर वो वैसे ही आवारा के तौर पर बदनाम थे। यानि शक्ति जी को खुद को साबित करना था। और वो इसिलिए बहुत परेशान रहते थे उन दिनों।

एक दिन शक्ति कपूर को पता चला कि उनके दोस्त फ़िल्म इंस्टिट्यूट, यानि एफ़टीआईआई पूना(तब पुणे पूना ही था।) का फॉर्म भर रहे हैं। दोस्तों को देख शक्ति कपूर ने भी फ़िल्म इंस्टिट्यूट का फॉर्म भर दिया। शक्ति ने सोचा था कि अगर उनका दाखिला नहीं भी हुआ, तो कम से कम पूना घूमने का मौका तो मिलेगा ही।

मगर किस्मत ने ऐसा खेल खेला कि शक्ति कपूर के एक भी दोस्त का दाखिला एफ़टीआईआई में नहीं हुआ। शक्ति जी का हो गया। और तब शक्ति कपूर को अहसास हुआ कि उनकी किस्मत ने उनके लिए क्या प्लानिंग की है।

जब एफ़टीआईआई में शक्ति कपूर जी को दाखिला मिल गया तो मात्र सात सौ रुपए लेकर वो दिल्ली से मुंबई के लिए निकल पड़े। आप सोचेंगे कि मुंबई क्यों? शक्ति को तो पूना जाना था ना? वैल, शक्ति जी की प्लानिंग थी कि पहले मुंबई जाया जाएगा।

फिर वहां से पूना पहुंचा जाएगा। शक्ति कपूर पूरे उत्साह से ट्रेन में सवार हो गए। कुछ देर बाद ट्रेन चल भी पड़ी। इत्तेफ़ाक से ट्रेन में शक्ति कपूर की मुलाकात एक लड़के से हुई। और वो लड़का भी एफ़टीआईआई ही जा रहा था। उसे भी वहां दाखिला मिला था।

उस लड़के का नाम था अनिल वर्मा। जब शक्ति कपूर को पता चला कि अनिल और उनकी मंज़िल एक ही है, तो उन्होंने अनिल से खूब बातचीत की। अनिल भी शक्ति से मिलकर बहुत खुश थे। जब शक्ति जी दिल्ली से चले थे तो उनकी प्लानिंग थी कि मुंबई में किसी लॉज में जाकर वो ठहर जाएंगे।

मगर अनिल वर्मा ने शक्ति से कहा,”किसी लॉज में ठहरने की ज़रूरत नहीं है तुम्हें। मुंबई में मेरी बहन रहती हैं। हम उनके घर पर ही ठहरेंगे। मैं तुम्हें वहां लेकर चलूंगा।” ये शक्ति कपूर के लिए एक खुशखबरी थी। उनके पैसे बचने थे।

मुंबई पहुंचकर शक्ति कपूर जब अनिल वर्मा की बहन के घर पहुंचे, तो वहां का नज़ारा देखकर उनकी आंखें फ़टी रह गई। अनिल वर्मा की बहन के घर पर विनोद खन्ना और राकेश रोशन बैठे थे।

शक्ति कपूर ने जब अनिल वर्मा से पूछा कि ये इतने बड़े सितारे तुम्हारी बहन के घर क्या कर रहे हैं? तो अनिल वर्मा ने बताया कि उनकी बहन की शादी प्रमोद खन्ना से हुई है। और प्रमोद खन्ना विनोद खन्ना के भाई हैं। यानि ट्रेन में मिले अनिल वर्मा वास्तव में विनोद खन्ना जी के रिश्तेदार थे।

उस दिन शक्ति कपूर की भी विनोद खन्ना व राकेश रोशन जी से खूब बात हुई। कुछ वक्त बाद तो शक्ति कपूर उन दोनों से इतना घुलमिल गए थे कि लग ही नहीं रहा था कि शक्ति इन दोनों स्टार्स से आज पहली दफ़ा मिले हैं। और विनोद खन्ना जी तो शक्ति कपूर के जॉली नेचर के फैन ही हो गए थे।

विनोद जी ने अपने भाई प्रमोद खन्ना से शक्ति कपूर और अनिल वर्मा को अपनी कार से एफ़टीआईआई पूना तक छोड़कर आने को भी कहा। प्रमोद खन्ना शक्ति कपूर व अपने साले अनिल वर्मा को पूना तक छोड़कर भी आए। और राकेश रोशन भी इनके साथ गए थे।

जब इन लोगों की कार एफ़टीआईआई के कैंपस के भीतर घुसी तो शक्ति ने देखा कि एक लड़का फ़टी सी धोती पहने एक्सरसाइज़ कर रहा है। उस लड़के ने भी जब इन लोगों को देखा तो वो इनके करीब आया।

और उसने राकेश रोशन जी के पैर छुए। फिर उस लड़के ने अपना परिचय देते हुए कहा,”मेरा नाम मिथुन चक्रवर्ती है।” मिथुन दा की बॉडी ऐसी थी कि शक्ति कपूर उससे बहुत प्रभावित हुए थे।

जब शक्ति कपूर, राकेश रोशन, प्रमोद खन्ना व अनिल वर्मा मुंबई से पूना के रास्ते पर थे, तो ये लोग बियर पीते आ रहे थे। बाकियों ने तो अपनी बियर कब की खत्म कर दी थी। लेकिन शक्ति कपूर की बियर अभी भी बची हुई थी। और वो बियर शक्ति कपूर ने तब भी अपने हाथ में ही पकड़ी हुई थी, जब एफ़टीआईआई कैंपस में मिथुन दा और राकेश रोशन की बात हो रही थी।

शक्ति कपूर उस वक्त मिथुन दा को जानते तो थे नहीं, उन्होंने मिथुन दा के साथ फ्रैंक होने की कोशिश करते हुए उनसे कहा,”क्या आप बियर पीना चाहेंगे? ” मिथुन दा ने एक नज़र शक्ति कपूर को देखा, और फिर मना कर दिया। कहा,”मैं बियर नहीं पीता।”

राकेश रोशन और प्रमोद खन्ना शक्ति कपूर व अनिल वर्मा को कैंपस में छोड़कर वापस निकले तो शक्ति कपूर की तरफ़ मुड़कर मिथुन दा ने उनके बाल पकड़े और बोले,”तेरा सीनियर हूं मैं। और तू एक सीनियर को बियर पीने के लिए पूछ रहा है?”

शक्ति कपूर को अहसास हो गया कि उन्होंने गड़बड़ कर दी। उन्होंने मिथुन दा से माफ़ी मांगी। मगर मिथुन दा तो शक्ति कपूर की रैगिंग लेने का पक्का इरादा बना चुके थे। तो शक्ति को बालों से पकड़कर ही वो हॉस्टल में ले गए।

हॉस्टल पहुंचकर मिथुन चक्रवर्ती ने अपने दूसरे साथियों को भी बुला लिया। उनमें से एक थे एक्टर विज्येंद्र घाटगे। मिथुन दा बालों को पकड़कर खींचते हुए ही शक्ति कपूर को एक कमरे में ले गए। उस कमरे में एक स्पॉट लाइट रखी थी। मिथुन दा के साथ अब और भी कई लोग थे।

कमरे की रोशनी को मिथुन दा ने बंद करा दिया। और वो स्पॉट लाइट ऑन करके उसकी रोशनी शक्ति कपूर के चेहरे पर कर दी। शक्ति कपूर के बालों की तरफ़ इशारा करके मिथुन दा अपने साथियों से बोले,”इसके बाल तो बड़े अच्छे हैं यार। ये तो अभी से हीरो बन गया है। इसके बाल ही काट देते हैं।”

साथियों ये सभी बातें खुद शक्ति कपूर जी ने ही एक इंटरव्यू में बताई थी। शक्ति कपूर जी ने आगे बताया कि मिथुन दा ने उनके बाल इतनी बुरी तरह काटे कि उन्हें लगा जैसे वो कोई बंदर हैं। इंसान नहीं हैं।

उसके बाद मिथुन दा व अन्य लोग शक्ति कपूर को कैंपस के स्वीमिंग पूल के पास ले गए। किसी ने कहा कि इसे स्वीमिंग पूल में फेंक दो। अगर इसने पूल के चालीस चक्कर लगा लिए तो इसे छोड़ देंगे।

उन दिनों मौसम ठंडा था। और पूल का पानी भी बहुत चिल्ड हो चुका था। पूल को देखकर शक्ति कपूर का हौंसला जवाब दे गया। उनके आंसू बह निकले। वो ज़ोर-ज़ोर से रोने लगे। रोते हुए ही शक्ति कपूर मिथुन दा व उनके साथियों से विनती करते हुए बोले,”मुझे छोड़ दो। मुझे नहीं बनना एक्टर। मुझे घर जाना है।”

विज्येंद्र घाटगे तो शक्ति पर तरस खाने के मूड में कतई नहीं थे। मगर शक्ति को रोता देख मिथुन दा को उन पर तरस आ गया। उन्होंने शक्ति कपूर को छुड़वा दिया। शक्ति कपूर रोते हुए अपने कमरे में आए। उन्होंने देखा कि अनिल वर्मा कमरे में छिपे हुए हैं और बहुत घबराए हुए हैं। अनिल वर्मा को अपनी फ़िक्र हो रही थी।

शक्ति ने कमरे में आते ही फौरन दरवाज़ा बंद कर लिया। लेकिन कुछ ही देर बाद कोई उनका दरवाज़ा पीटने लगा। शक्ति को डर हुआ कि वो लोग फिर से उन्हें परेशान करने आ गए हैं। और अनिल वर्मा को लगा कि शक्ति के बाद अब वो लोग उन्हें ले जाने आए हैं।

जब दरवाज़ा काफ़ी देर तक बजता रहा तो शक्ति कपूर ने हिम्मत करके दरवाज़ा खोल ही दिया। उन्होंने देखा कि सामने मिथुन खड़े हैं। वो भी अपने हाथों में एक ताला लिए। मिथुन दा ने शक्ति जी व अनिल वर्मा से कहा,”मैं तुम्हारे दरवाज़े पर ताला लगा रहा हूं। सुबह खोल दूंगा। अगर तुम उन लोगों को मिल गए तो वो सारी रात तुम्हें परेशान करेंगे। ताला लगा देखेंगे तो समझेंगे कि तुम अपने कमरे में नहीं हो।”

मिथुन दा उस कमरे को बाहर से लॉक करके चले गए। शक्ति डर के मारे बहुत रात तक सो नहीं सके। और उन्होंने ये भी नोटिस किया कि कुछ लोग उनके दरवाज़े पर आए भी थे। यानि मिथुन दा के वो साथी, एफ़टीआईआई के शक्ति कपूर के सीनियर्स वाकई में फिर से उनकी रैगिंग लेने आए थे। सुबह छह बजे मिथुन चक्रवर्ती ने ताला खोला। और शक्ति कपूर से बोले,”अब से किसी सीनियर के साथ ऐसा बर्ताव मत करना।”

फिर शक्ति कपूर को किसी ने ज़्यादा परेशान नहीं किया। समय के साथ शक्ति कपूर व मिथुन चक्रवर्ती एफ़टीआईआई में ही बहुत अच्छे दोस्त बन गए। मिथुन चक्रवर्ती ने शक्ति कपूर का बहुत ध्यान रखा। और आगे चलकर मिथुन दा व शक्ति जी, दोनों ही फ़िल्म इंडस्ट्री के नामी एक्टर्स बने। दोनों ने ही कई फ़िल्मों में साथ काम भी किया

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