Madhya Pradesh //छतरपुर बस स्टैंड बना अव्यवस्था का गढ़, प्रशासन की चुप्पी पर उठे बड़े सवाल//

ब्यूरो चीफ कमला कान्त जोशी अमानगंज – पन्ना
//छतरपुर का मुख्य बस स्टैंड आज अतिक्रमण, अवैध कब्जों और यातायात अव्यवस्था का स्थायी केंद्र बन चुका है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर प्रशासन इतनी लाचारी में क्यों दिखाई दे रहा है? नगर पालिका और प्रशासनिक अधिकारी हर बार कार्रवाई के दावे तो करते हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति पहले से भी बदतर नजर आती है।//
//बस स्टैंड पर खुलेआम टीन-शेड डालकर कब्जे किए जा रहे हैं।//
//प्रशासन कई बार इन्हें हटाने की औपचारिक कार्रवाई कर चुका है, लेकिन कुछ ही दिनों में वही अतिक्रमण दोबारा खड़े हो जाते हैं।//
//इससे साफ संकेत मिलता है कि या तो कार्रवाई सिर्फ दिखावे के लिए की जा रही है या फिर कब्जाधारियों को किसी न किसी स्तर पर संरक्षण प्राप्त है।//
//स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि बस ऑपरेटर अपनी मनमर्जी से कहीं भी बसें खड़ी कर देते हैं। बिना नंबर की गाड़ियां 24 घंटे तक बस स्टैंड पर खड़ी रहती हैं, लेकिन न नगर पालिका को दिखाई देता है और न ही यातायात विभाग को। आम लोगों के लिए टू-व्हीलर निकालना तक मुश्किल हो गया है। हर दिन जाम, धक्का-मुक्की और अव्यवस्था का सामना करना लोगों की मजबूरी बन चुका है।//
//सबसे गंभीर बात यह है कि शहर के सबसे व्यस्त और संवेदनशील क्षेत्र में यदि प्रशासन व्यवस्था लागू नहीं कर पा रहा, तो फिर बाकी शहर की हालत का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर प्रशासन कार्रवाई करने से डर क्यों रहा है? क्या बस स्टैंड पर अवैध कब्जों और मनमानी के पीछे किसी रसूखदार का हाथ है? यदि नहीं, तो फिर सख्त कार्रवाई अब तक क्यों नहीं हुई?
//जनता का आरोप है कि प्रशासन केवल कैमरों के सामने जेसीबी चलाकर सुर्खियां बटोरता है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई गंभीर कदम नहीं उठाया जाता। यही वजह है कि अतिक्रमण हटाने के दावे अब लोगों को खोखले और दिखावटी लगने लगे हैं।//
//अब जरूरत सिर्फ चेतावनी या औपचारिक कार्रवाई की नहीं, बल्कि लगातार और कठोर अभियान की है। वरना छतरपुर बस स्टैंड आने वाले समय में पूरी तरह अव्यवस्था और कब्जाधारियों के नियंत्रण में दिखाई देगा, और प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल और भी तेज होते जाएंगे।//




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