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संतुलित उर्वरकों के प्रयोग पर कृषकों को दिया गया प्रशिक्षण

संतुलित उर्वरकों के प्रयोग पर कृषकों को दिया गया प्रशिक्षण

गोंडा/मनकापुर ।आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्र मनकापुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक शस्य विज्ञान डॉ. राम लखन सिंह ने ग्राम भोपतपुर, विकासखंड छपिया जनपद गोंडा में कृषकों को संतुलित उर्वरकों के प्रयोग एवं मृदा स्वास्थ्य संरक्षण विषय पर प्रशिक्षण दिया।

प्रशिक्षण के दौरान डॉ. राम लखन सिंह ने कहा कि अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से मिट्टी का स्वास्थ्य लगातार खराब हो रहा है। किसानों को मृदा नमूना परीक्षण की संस्तुति के अनुसार ही खाद एवं रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए, ताकि मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहे और उत्पादन में वृद्धि हो सके।

उन्होंने किसानों को फसल अवशेष न जलाने की सलाह देते हुए कहा कि इससे पर्यावरण प्रदूषित होता है तथा मिट्टी की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के लिए उन्होंने पूसा बायो डिकंपोजर के प्रयोग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 100 ग्राम की एक बोतल पूसा बायो डिकंपोजर एक एकड़ खेत के फसल अवशेष को सड़ाने के लिए पर्याप्त होती है।

उन्होंने बताया कि 200 लीटर क्षमता वाले प्लास्टिक ड्रम में 180 लीटर पानी, 200 ग्राम गुड़, 50 ग्राम बेसन तथा एक बोतल पूसा बायो डिकंपोजर मिलाकर एक सप्ताह तक घोल को नियमित हिलाने से जीवाणुयुक्त घोल तैयार हो जाता है। इस घोल का छिड़काव फसल अवशेषों पर करने से 15 से 20 दिनों में अवशेष खाद में परिवर्तित हो जाते हैं।

इसके साथ ही उन्होंने हेलो केयर के प्रयोग, ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई एवं हरी खाद की खेती के महत्व पर भी जानकारी देते हुए कहा कि इन तकनीकों को अपनाकर किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं तथा मृदा की उर्वरा शक्ति में वृद्धि कर सकते हैं।

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