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भगवान, जीव जन्म से ही मतिज्ञान, श्रुतज्ञान व अवधिज्ञान के धारी होते हैं : बह्माचारी

512 अर्ध्य समर्पित कर सिद्धो की आराधना कर किया पूजन

512 अर्ध्य समर्पित कर सिद्धो की आराधना कर किया पूजन

भगवान, जीव जन्म से ही मतिज्ञान, श्रुतज्ञान व अवधिज्ञान के धारी होते हैं : बह्माचारी

पलेरा (टीकमगढ़). सिद्ध चक्र मण्डल विधान में बुधवार को भक्तिमय वातावरण में 512 अर्ध्य समर्पित कर सिद्धों की आराधना और पूजा सम्पन्न हुई. कार्यक्रम की शुरूआत प्रातः नित्य नियम भगवान जिनेन्द्र देव के अभिषेक, पूजन और शांति धारा के साथ हुई. उसके बाद बाल ब्रह्मचारी संजीव भैया कटंगी के मुखारविन्द से विधान प्रारंभ हुआ. विधान के पुण्यार्जक किरन- राजेन्द्र कुमार जैन एवं शिवानी-अनेकान्त जैन के द्वारा मुख्य अर्ध्य चढाये गए. विधान में बाल ब्रह्मचारी संजीव भैया नें सभी भव्य जीवों को सिद्ध चक्र विधान का महत्व समझाया. उन्होंने बताया कि भगवान, जीव जन्म से ही मतिज्ञान, श्रुतज्ञान व अवधिज्ञान के धारी होते हैं. तप करने पर मन: पर्ययज्ञान और पश्चात् केवलज्ञान अर्थात् निर्वाण प्राप्त करते हैं. अपने भवों (जन्मों) को सुधारने के लिए भगवान की भक्ति एवं पूजा करना आवश्यक है. लोगों को हिंसा, झूठ, चोरी, कुशील और परिग्रह इन पांच पापों का त्याग करना चाहिए. निरीह मूक पशुओं की रक्षा करना हम सभी का परम कर्तव्य है, यदि हम गायों की सेवा और रक्षा करेंगे तो निश्चय ही नरक गति में नहीं जायेंगे. जो लोग मंदिरों और दानपेटीयों की चोरी करते हैं, यदि वे चोरी की गयी सामग्री को वापस नहीं रखेंगे तो जन्मों तक नरको के दुख भोगेंगे।इस आयोजन में नगर के अतिरिक्त जतारा,टीकमगढ़, सिमरा खुर्द, देवराहा, भेलसी, छतरपुर आदि स्थलों से बड़ी संख्या में जैन श्रृद्धालु एवं सर्वधर्म के भक्त गण उपस्थित रहे. कार्यक्रम के मीडिया प्रभारी राजीव जैन, अनिल मिश्रा नें बताया कि सिद्ध चक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ के प्रातः नित्य कार्यक्रम में अभिषेक, शांति धारा, पूजन विधान एवं मंगलमय श्रमण दिव्य देशना एवं संध्याकाल में गाजे बाजे के साथ महा आरती होती है. इसके पश्चात शास्त्र प्रवचन और नित्य नवीन विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं

Tikamgarh Madhya Pradesh News @ Bureau Chief Muhammad Khwaja

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