बजट की घोषणाएं बस्तर के लोगों के लिए छलावा, रेखचंद जैन

पूर्व संसदीय सचिव व विधायक रेखचंद जैन ने कहा है कि बजट की घोषणाएँ बस्तर के लोगों के लिए छलावा साबित हो रही हैं. बस्तर के संदर्भ में की जाने वाली घोषणाएं सालों बाद भी धरातल में नहीं उतर पाती हैं. राज्य की भाजपा सरकार को चाहिए कि वह घोषणापत्र के सभी प्रावधानों को तत्काल प्रभाव से लागू करे. रेखचंद जैन ने कहा है कि वर्ष 2026-27 का राज्य बजट भी अलाभकारी, असंतुष्टीदायक साबित हुआ है. इसमें बस्तर के गांव, गरीब, किसान, महिलाओं, युवाओं, कर्मचारियों समेत समाज के किसी भी वर्ग के लिए कोई खास पहल नहीं की गई है. सरकार बनाने के पहले भाजपा ने जो वायदा किया था उसे पूरा करने की बजाय केवल जबानी रकम खर्च करने की कवायद की गई है.

ज्ञान व गति की दुर्गति के बाद संकल्प का नया जुमला वित्त मंत्री ने परोसा है, जिसे जनता जान गई है. कर्मचारियों के लिए स्पष्ट घोषणा का अभाव बस्तर जैसे क्षेत्र में सेवा देने वाले कर्मचारियों को खल रही हैं. एक ओर जहां बस्तर में हजारों स्कूल बंद किए गए हैं वहीं अबूझमाड़ व जगरगुण्डा में एजुकेशन सिटी स्थापित करने का झुनझुना थमाया गया है. बस्तर के लिए की गई भाजपा की घोषणापत्र की बातें जुमला साबित हो रही हैं. बात चाहे कोंडागांव के मक्का प्रोसेस प्लांट की हो या बीते सालों में गीदम में मेडिकल कॉलेज स्थापना की. जिस सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के द्वारा लोगों के मुफ्त इलाज का ढिंढोरा पीटा जा रहा था उसकी सच्चाई अब सबके सामने आ चुकी है. जैन ने कहा है कि राज्य के बजट में मनरेगा मजदूरों के लिए कोई प्रावधान न होना उनके साथ अन्याय है. यह बस्तर संभाग के लाखों परिवारों के साथ भाजपा की धोखाधड़ी भी है. पूर्व विधायक के अनुसार कृषक उन्नति योजना में जो बातें चुनाव से पहले भाजपा घोषणा पत्र में कही गई थीं उनका पालन भी नहीं किया गया है. एक लाख रिक्त शासकीय पदों पर भर्ती का दावा स्थानीय बेरोजगारों के साथ किए गए छल के रूप में देखा जा रहा है.




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