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अस्पताल पहुंचने से पहले जीवन रक्षक होता है सी पी आर चिकित्सकों ने किया लाइव डेमोंस्ट्रेशन

रिपोर्टर देवेन्द्र कुमार जैन भोपाल मध्य प्रदेश

आकस्मिक परिस्थितियों में तत्काल जीवन रक्षक सहायता देने के लिए सी पी आर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। सी पी आर जागरूकता के लिए 13 से 17 अक्टूबर तक कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन सप्ताह मनाया जा रहा है। जिसमें स्वास्थ्य संस्थानों में सीपीआर शपथ, चिकित्सकों, नर्सिंग ऑफिसर्स, पैरामेडिकल स्टाफ एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को सीपीआर का प्रशिक्षण, पोस्टर प्रतियोगिता, प्रश्नोत्तरी गतिविधियों की जा रही हैं । कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन के लिए स्वास्थ्य संस्थाओं में उन्मुखीकरण प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। आयुष्मान आरोग्य मन्दिरों में भी ऐसी परिस्थितियों में मरीज की स्थिति के आंकलन उसे सी पी आर तकनीक के बारे में जानकारी दी जा रही है। साथ ही सीपीआर के महत्व, आपातकालीन प्रतिक्रिया चरणों और सीपीआर को सही तरीके से करने के तरीके को समझाया जा रहा है। अचानक से दिल की धड़कन रुक जाने पर कुछ ही मिनट में ब्रेन डैमेज हो सकता है। ऐसी स्थिति में शुरुआती हर मिनट व्यक्ति के जीवित बचने की संभावना को 10% तक कम करता जाता है । अनुमान के मुताबिक लगभग 70% हृदय गति रुकने की घटनाएँ अस्पतालों के बाहर होती हैं, जहाँ अक्सर तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध नहीं होती हैं। सीपीआर देकर व्यक्ति की जीवित बचने की संभावनाओं को दो से तीन गुना तक बढ़ाया जा सकता है। डांस करते-करते, चलते हुए , बैठे हुए या अन्य किसी स्थिति में व्यक्ति के अचानक से बेहोश हो जाने के प्रकरण समय-समय पर सामने आते हैं। ऐसी स्थिति में व्यक्ति की धड़कनों की जांच कर सीपीआर देना जरूरी हो जाता है। व्यक्ति की पल्स चालू रहने पर सीपीआर देने की आवश्यकता नहीं होती है। सी पी आर के लिए मरीज को सांस सुथरी और सपाट जगह पर लेटा कर सीपीआर तकनीक का इस्तेमाल किया जाना चाहिए । साथ ही साथ 108 एंबुलेंस अथवा किसी अन्य चिकित्सकीय सहायता को मदद के लिए तुरंत कॉल किया जाना आवश्यक है। जयप्रकाश जिला चिकित्सालय में आयोजित उन्मुखीकरण प्रशिक्षण में डॉ सत्यजीत सिंह ने मैनिक्विन के माध्यम से सी पी आर प्रक्रिया का लाइव डेमोंस्ट्रेशन किया। उन्होंने बताया कि सीपीआर के दौरान छाती के बीचों बीच 1 मिनट में कम से कम 100 से 120 बार दबाव दिया जाता है । इस दौरान घुटनों पर बैठकर कोहनी सीधी रखकर दबाव दिया जाता है। ये दबाव कम से कम 5 सेंटीमीटर तक होना चाहिए । 30 बार तेजी से दबाव देने के बाद 2 बार मुंह से सांस भी दी जानी चाहिए । यह प्रक्रिया तब तक की जानी जरूरी है जब तक मरीज की स्वाभाविक सांसें ना लौट आए या चिकित्सकीय सहायता न मिल जाए। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ मनीष शर्मा ने बताया कि सीपीआर कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) एक जीवनरक्षक तकनीक है जो हृदय गति रुकने पर मस्तिष्क और महत्वपूर्ण अंगों में रक्त प्रवाह बनाए रखने में मदद करती है।सही तकनीक से दिया हुआ सी पी आर मरीज के अस्पताल पहुंचने से पहले जीवन रक्षक होता है।

 

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