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शहडोल में महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और राज्यपाल की उपस्थिति में आयोजित हुआ जनजातीय गौरव दिवस

जनजातीय वर्ग के कल्याण के लिए मध्यप्रदेश में पेसा नियम हो रहा लागू

✍🏼रिपोर्टर अनिल चतुर्वेदी चरहेट मध्यप्रदेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है। भगवान बिरसा मुंडा धरती के आबा, धरती के भगवान कहे जाते थे। अंग्रेज उनके नाम से कांपते थे। ऐसे अमर क्रांतिकारी भगवान बिरसा मुंडा जी की जयंती पर उनके चरणों में प्रणाम करता हूं।

हम गौरवान्वित हैं कि जनजातीय समाज से हमारी तपस्वी बहन द्रौपदी मुर्मू जी भारत की राष्ट्रपति हैं। मध्यप्रदेश की धरती पर हम उनका हृदय से स्वागत और अभिनंदन करते हैं। सामाजिक समरसता के साथ हम पेसा कानून के नियम लागू कर रहे हैं। जल, जंगल व जमीन पर सबका अधिकार है। यह पेसा कानून जल, जंगल व जमीन का अधिकार जनजातीय भाइयों-बहनों को देने वाला है। महुआ का फूल, महुए की गुल्ली, अचार की चिरौंजी, हर्रा, बहेड़ा, आंवला ये वनोपज होती है। ये पेसा के नियम तय करते हैं कि ग्राम सभा अब वनोपज का संग्रहण करेगी और इसका मूल्य भी तय कर सकेगी। अब हर साल गांव की जमीन का उसका नक्शा, वन क्षेत्र का नक्शा, खसरा की नकल, B1 की नकल पटवारी या फॉरेस्ट बीट गार्ड को गांव में लाकर ग्रामसभा को दिखाना पड़ेगा, ताकि जमीनों में कोई हेरफेर ना हो।

गांव में मनरेगा और अन्य कामों के लिए धन आता है, इससे कौन सा काम किया जायेगा, इसे भी ग्राम सभा तय करेगी। छल-कपट कर बेटी से शादी कर जमीन हड़पने का काम मध्यप्रदेश की धरती पर हम नहीं होंगे देंगे। यदि यह पता चलता है कि किसी ने छल से जमीन नाम करवा ली है तो ग्रामसभा उस जमीन को वापिस करवाएगी। जो नियम विरुद्ध काम करेगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी। निर्धारित दरों से अधिक ब्याज दर पर कोई ऋण देगा, तो उसे भी किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ा जायेगा। गांवों में एक शांति और विवाद निवारण की समिति बनेगी। छोटे-मोटे विवादों का निवारण गांव में ही हो जाएगा, पुलिस की रिपोर्ट नहीं होगी। आप शांति और प्रेम से रहेंगे, छोटे-मोटे विवादों का फैसला बुजुर्ग ही कर देंगे।

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