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Madhya Pradesh News : 10 एकड़ भूमि को पुनः शासकीय दर्ज करने के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी 15 सितम्बर को पक्ष समर्थन के लिए कलेक्टर न्यायालय में उपस्थित होने के निर्देश

ब्यूरो चीफ कमलाकांत जोशी पन्ना मध्य प्रदेश

कलेक्टर न्यायालय पन्ना द्वारा ग्राम पन्ना स्थित भूमि सर्वे नंबर 520/12 रकवा 10 एकड़ अर्थात 4.047 हे. भूमि को पुनः शासकीय म.प्र. शासन दर्ज करने की कार्यवाही की जा रही है। इस संबंध में कलेक्टर सुरेश कुमार द्वारा तहसीलदार पन्ना के माध्यम से ग्राम सुनहरा निवासी धरमू, ग्राम पुरषोत्तमपुर निवासी मुन्ना कुशवाहा एवं पन्ना नगर के वार्ड नंबर 2, टिकुरिया मोहल्ला निवासी श्रीकांत दीक्षित को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। साथ ही अपना पक्ष प्रस्तुत करने, उत्तर देने तथा अपनी प्रतिरक्षा के लिए निर्भर रहने संबंधी समस्त दस्तावेजों को प्रस्तुत करने के लिए आगामी 15 सितम्बर को सुबह 11 बजे से कलेक्टर न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने के लिए सूचित किया गया है। निर्धारित तिथि पर न्यायालय में उपस्थित नहीं होने के स्थिति में अनुपस्थित मानकर मामले की सुनवाई और निराकरण की कार्यवाही की जाएगी।उल्लेखनीय है कि अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पन्ना द्वारा तहसीलदार पन्ना के प्रतिवेदन 20 अगस्त 2025 के माध्यम से ग्राम पन्ना स्थित भूमि सर्वे नंबर 520 रकवा 228.71 एकड़ अर्थात् 92.5576 हे. मिसल बंदोबस्त वर्ष 1955-56 में म.प्र. शासन, वर्ग 9/5, जंगल मद में दर्ज होने की जानकारी प्रस्तुत की गई है। यह भूमि वर्ष 1962-63 तक निरंतर जंगल मद में दर्ज रही है, जबकि वर्ष 1969-70 से वर्ष 1988-99 तक खसरा नंबर 520/12 रकवा 10 एकड़ अर्थात् 4.047 हे. धरमू पिता भरोसे कुर्मी निवासी पन्ना के नाम पर खसरा के काॅलम नंबर 3 में दर्ज है, किन्तु खसरा के काॅलम नंबर 12 में सक्षम अधिकारी के आदेश की टीप अंकित नहीं है। वर्ष 1999-2000 से वर्ष 2003-04 तक का खसरा नगर निरीक्षक कोतवाली पन्ना में जप्त है तथा वर्ष 2004-05 से वर्ष 2008-09 तक का खसरा जीर्ण शीर्ण है। वर्ष 2009-10 से वर्ष 2018-19 तक उक्त भूमि धरमू के नाम पर यशावत दर्ज है। वर्ष 2019-20 में तहसीलदार न्यायालय पन्ना के आदेश दिनांक 19.07.2019 द्वारा मुन्ना कुशवाहा व 21.10.2021 द्वारा श्रीकांत दीक्षित के नाम से अब तक दर्ज है। इस प्रकरण में प्रस्तुत विस्तृत प्रतिवेदन एवं दस्तावेजों के अवलोकन से प्रथम दृष्टया यह पाया गया है कि खसरा वर्ष 1969-70 में सर्वे नंबर 520/12 रकवा 10 एकड़ अर्थात 4.047 हे. धरमू के नाम पर खसरा के काॅलम नंबर 3 में दर्ज है, लेकिन काॅलम नंबर 12 में सक्षम अधिकारी के न्यायालय का नाम, प्रकरण क्रमांक और आदेश दिनांक की टीम अंकित नहीं होने से प्रविष्टियां फर्जी परिलक्षित होती हैं। भूमि के शासन से बंटित होने की स्थिति में बंटिती द्वारा भूमि विक्रय करने के पहले म.प्र. भू राजस्व संहिता 1959 की धारा 165 (7-ख) के तहत प्राप्त भूमि विक्रय की अनुमति से संबंधित दस्तावेज भी आवश्यक है। इसके अलावा प्रश्नाधीन भूमि के तत्समय मिसल बंदोबस्त में जंगल मद में दर्ज होने के संबंध में वन विभाग के 5 जून 2025 के पत्रानुसार सुप्रीम कोर्ट नई दिल्ली के दिनांक 15 मई 2025 के निर्णय का उल्लेख कर अवगत कराया गया है कि राजस्व वन श्रेणी की भूमि का अन्यथा उपयोग नहीं किया जा सकता है, जिससे प्रश्नाधीन भूमि का कृषि हेतु बंटन किया जाना भी संभव नहीं है। इस संबंध में संबंधितजनों को फर्जी प्रविष्टि होने तथा उच्चतम न्यायालय के निर्णय के परिपे्रक्ष्य में एवं वन विभाग के अपर मुख्य सचिव के पत्र के परिपालन में प्रश्नाधीन भूमि को पुनः शासकीय दर्ज करने के लिए संबंधितजनों को नोटिस जारी कर सुनवाई का अवसर प्रदान किया गया है।

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