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भाद्रपद मास 10 अगस्त से, जन्माष्टमी से लेकर गणेश उत्सव तक छाएंगे धार्मिक रंग

भाद्रपद मास 10 अगस्त से, जन्माष्टमी से लेकर गणेश उत्सव तक छाएंगे धार्मिक रंग

पटना। चातुर्मास के चार पवित्र महीनों में दूसरा महीना भाद्रपद इस वर्ष 10 अगस्त से आरंभ होकर 7 सितंबर, रविवार को भाद्रपद स्नान-दान पूर्णिमा के साथ संपन्न होगा। कृष्ण पक्ष में षष्ठी तिथि के क्षय के कारण यह महीना 29 दिनों का रहेगा।

इस पावन महीने में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (16 अगस्त), गणेश चतुर्थी (17 अगस्त), कुशी अमावस्या (23 अगस्त), हरितालिका तीज और चौरचन (26 अगस्त), कर्मा-धर्म, अनंत चतुर्दशी और अगस्त मुनि तर्पण जैसे प्रमुख धार्मिक पर्व मनाए जाएंगे।

शास्त्रों के अनुसार, भाद्रपद मास मन की शुद्धि और पवित्र भावनाओं से भरने का सर्वोत्तम समय है। कृष्ण पक्ष अष्टमी पर गृहस्थ और साधु-संत बड़े श्रद्धा भाव से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाएंगे। घरों और मंदिरों में भगवान कृष्ण की विशेष पूजा-अर्चना होगी।

17 अगस्त को हस्त और चित्रा नक्षत्र के संयोग में गणेश चतुर्थी का शुभारंभ होगा, जिसका 10 दिवसीय उत्सव अनंत चतुर्दशी तक चलेगा। इस दौरान भक्त घरों और पूजा पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित कर उनकी आराधना करेंगे।

23 अगस्त को मघा नक्षत्र और परिघ योग में कुशी अमावस्या पर पितृ तर्पण, पिंडदान और धार्मिक अनुष्ठान होंगे। इस दिन कुश उखाड़ने की परंपरा भी निभाई जाएगी।

26 अगस्त को हस्त नक्षत्र और सिद्धयोग में हरितालिका तीज के मौके पर सुहागिनें शिव-पार्वती की पूजा कर पति की दीर्घायु और सौभाग्य की कामना करेंगी। इसी दिन मिथिलांचल का लोक पर्व चौरचन भी धूमधाम से मनाया जाएगा, जिसमें चंद्रोदय के समय चंद्रमा की पूजा और अर्घ्य अर्पित करने की परंपरा है।

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