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“जेल में बंद महिलाओं के बच्चों की शिक्षा पर सख्त पटना हाई कोर्ट, सरकार से मांगा जवाब”

पटना हाई कोर्ट सख्त: जेलों में बंद महिलाओं के साथ रह रहे बच्चों की शिक्षा को लेकर राज्य सरकार से जवाब तलब

पटना। राज्य की जेलों में अपनी माताओं के साथ रह रहे 1 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर पटना हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश आशुतोष कुमार की खंडपीठ ने इस गंभीर मुद्दे पर दायर लोकहित याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार, कारा महानिरीक्षक (आईजी) और बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (बालसा) से स्पष्ट जानकारी मांगी है कि इन बच्चों को किस स्कूल में भेजा जा रहा है।

याचिकाकर्ता संतोष उपाध्याय की ओर से अधिवक्ता विकास कुमार पंकज ने अदालत को अवगत कराया कि वर्ष 2002 में राज्य सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर महिला बंदियों के साथ जेलों में रह रहे बच्चों को मूलभूत सुविधाएं देने की बात कही थी। लेकिन दो दशक बाद भी इस पर पूरी तरह अमल नहीं हो सका है।

कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार, जेल प्रशासन और बालसा से सभी बिंदुओं पर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि इन बच्चों की शिक्षा के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव द्वारा समुचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

याचिका में यह भी बताया गया कि राज्य की विभिन्न जेलों में कुल 228 नाबालिग (103 लड़के और 125 लड़कियां) अपनी माताओं के साथ बंद हैं। इनमें भागलपुर और नवादा महिला मंडल कारा में सबसे अधिक 16-16 बच्चे रह रहे हैं, जबकि अन्य जिलों में भी बड़ी संख्या में ऐसे बच्चे कारावास में जीवन बिता रहे हैं।

कोर्ट ने इन बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने के लिए ठोस योजना बनाने और त्वरित कार्रवाई करने का आदेश दिया है। इस मामले पर अगली सुनवाई 12 सितंबर को होगी।

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