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Madhya Pradesh News प्राचीन शिव मंदिर की रहस्मय कथा भागवत व शिव पुराण से कलयुगी जानवर इंसान में तब्दीलि परीवर्तन प्रारंभ।

रिपोर्टर दोलतराम पाटीदार रतलाम मध्य प्रदेश

भारत देश भूमि के मध्य बसने वाले हर्दय मध्यप्रदेश में सनातन धर्म और आस्था के प्रतीक जिला रतलाम के आसपास भक्ति भाव की भावना को जीवित रखने वाले धर्म प्रेमी लोगो के बीच यहाँ कई धार्मिक आयोजन प्रयोजन कार्यक्रम तय हुये हैं। जिसमे राष्ट्रीय संत प्रदीप जी मिश्रा, मालवा के गो भक्त श्री कमल किशोर जी नागर, श्री किरीट जी एवं अन्य कई महापुरुशों की कृपा दृष्टि मे श्रीमद् भागवत कथाए शामिल की हैं। कथा आयोजनो के चलते जिला तहसील रतलाम के छोटे से गाँव ग्राम डेलनपुर में भागवान शिव जी का छोटा सी धरोहर के रूप मे प्राचीन स्थान हुआ करता था ।जहाँ बिना मन्दिर खाली स्थान बड़ के पेड़ के नीचे पत्थर की मूरत शिवलिंग की पूजा अर्चना एक पुजारी कुटिया वाले बाबा के नेतृत्व मे दो युग पहले संचालित हो कर वर्तमान मे इस शिव मंदिर में आने वाले लोगों का प्रत्येक सोमवार को तांता लगा रहता है।

एक लोटा जल-सब समस्याओं का हल – इसे भेड़ वाली चाल समझा जाये या जीवन में मंदिर जाने के मानसिक शांति के फ़ायदे। भगवान भावनाओं के भूखे हैं तो इंसान जीवन में होने वाले फायदे के। इंसान के जीवन मेंअपनीअपनी आवश्यकताओं की मानसिकता प्रथक ओर भिन्न रही है। डेलनपुर के इस गाँव मे अधिकतम बीते वर्षो से पहले यहाँ के कुछ इंसान व जानवरों में कोई अंतर नहीं था। यहाँ इंसान अपने लालच व फायदे के लिए इंसान को गाजर मूली की तरह मार-काट डालने मे कोई सँकोच नही करता था। आज भी एक जाती का बहु संख्यक पाटिदार समाज के कुछ रूढ़िवादी प्रथा के अंश धारक व्यक्तियों ने एक निर्दोष व बेकसूर परिवार को समाज से निष्काषित कर, समाज से बंद कर रखा है- बिना किसी कोई दोष सिद्ध हुये अपनी दबंगाईयत से निर्दोष को प्रताड़ित किया जा रहा है मानसिक भावनाएँ का हनन व शोषण किया जा रहा है। समय के बदलावों के साथ भगवान में बढ़ती हुई आस्था ने यहां के स्थाई और आसपास के निकटर्तीय अन्य लोगों मे कई सुधार साबित हुए हैं जिस के अंतर्गत आज गांव के रिटायर्ड पुलिस नार्कोटिक्स विभागीय अधिकारी श्री वजेराम जी धानक राव गुजराती परिवार द्वारा पंडित ललित राज आचार्य जी के मुखारविंद से श्री भागवत कथा का आयोजन धर्म प्रेमी जनता के मद्य्य किया गया जो दिल में धर्म धड़कन की बैटरी को पुनः चार्ज करने में सफल रहा है। सनातन धर्म सहज सरलता का प्रतीक कहते हुए आने वाले भविष्य को सुगम ओर सुनिश्चित कर नव यूवक व युवतियों से कथा वाचक ने अपील की है कि अपनी पुर्वजो के रितिरिवाज की परंपरा को कायम रखने में सहयोग प्रदान करें। लव मैरिज के विरुद्ध आवाज बुलंद करते हुए शिक्षा व सनातन धर्म पर ध्यान आकर्षित कर गीता ज्ञान गंगा को सात दिन की चलीत कथा मे विधिवत हवन पूजन के साथ कृष्ण जन्मोत्सव, माखन चोर मटकी फोड़ प्रसंग, रूखमणी विवाह, आदि प्रासंगिक विवरण अनुसार कन्याएँ को राधा कृष्ण का रूप दे कर मांगलिक कार्यक्रम मे कथा के सात दिन में चार चाँद लगा दिए। कथा के पुर्णाहुति स्वरूप अन्तिम दिन गांव के चयनित धर्म प्रेमी समस्त जनता को भोजन व महा प्रसादी वितरित की गई। सैकड़ों की संख्या में महिलाएं व पुरुषों ने भाग लेकर अपना जीवन धन्य बनाने मे क़दम उठाए।

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