उत्तराखण्डधर्म

Uttarakhand News चंडिका घाट देवी भगवती को समर्पित यह देवालय राम गंगा नदी के तट पर पिथौरागढ़ से पैंतीस किलोमीटर दूर, सुवालेख से अठारह किलोमीटर दूर तथा झूणी ग्राम से पांच किलोमीटर पैदल दूरी पर अस्कोट गंगोलीहाट पैदल मार्ग पर स्थित है।

रिपोर्टर नारायण सिंह पिथौरागढ़ उत्तराखंड

चंडिका घाट देवी भगवती को समर्पित यह देवालय राम गंगा नदी के तट पर पिथौरागढ़ से पैंतीस किलोमीटर दूर, सुवालेख से अठारह किलोमीटर दूर तथा झूणी ग्राम से पांच किलोमीटर पैदल दूरी पर अस्कोट गंगोलीहाट पैदल मार्ग पर स्थित है। अगर किसी को न्यायालय से न्याय प्राप्त नहीं होता तो वह व्यक्ति यहां आकर देवी से न्याय की गुहार लगाता है और देवी अपने भक्तजनों को न्याय प्रदान करती है। यहां एक शिव का भी मंदिर है। यहां उत्तरायणी मकर संक्रांति को मेले का आयोजन होता है। यहां बलि पूजा का भी विधान है। देवी पुराण में उल्लेख है कि महाभारत के रचयिता महर्षि वेदव्यास जी ने यहां हवन व तप किया था।रामगंगा नदी की कल कल छल छल की मधुर ध्वनि के मध्य श्रद्धालुजन देवी का पूजन करके स्वयं को धन्य समझते हैं। सुंदर प्रकृति के मध्य यह मनोहारी स्थल भक्तों को सदैव आकर्षित करता है। माना जाता है कि देवी अपने सच्चे भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती करती है।

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