Uttarakhand News थलकेदार मंदिर एक पवित्र तीर्थ स्थल है जो भगवान शिव को समर्पित है।

रिपोर्टर नारायण सिंह पिथौरागढ़ उत्तराखंड
थलकेदार मंदिर पिथौरागढ़- थलकेदार मंदिर एक पवित्र तीर्थ स्थल है जो भगवान शिव को समर्पित है। सोर की लोक गाथाओं के अनुसार भगवान केदारेश्वर को शिव का प्रमुख गण माना जाता है। प्राचीन काल में एक बार हल्दू के दैत्य ने ठुली गाड़ में एक विशाल चट्टान को गिराकर गाड़ के जल मार्ग को अवरुद्ध कर दिया। इससे चटकेश्वर, देवल समेत और नकुलेश्वर के देवता जलमग्न हो गए। तब सभी ने भगवान केदारेश्वर से प्रार्थना की। केदारेश्वर ने अपने गण लाटा देवता को राक्षस से लड़ने भेजा।
केदारेश्वर के आदेश पर लाटा ने हल्दू के दैत्य से भीषण युद्ध किया। जिसमें उसकी जीभ कट गई। तब से वह लाटा कहलाया। लाटा देव ने राक्षस का अंत किया और चट्टान को चकनाचूर करके जलमार्ग को खोल दिया। तब से स्थानीय जनता ने केदारेश्वर को यहां के प्रधान देवता का ओहदा प्रदान किया।
इसकी पिथौरागढ़ शहर से दूरी 16 किलोमीटर है । समुद्र तल से 2000 मीटर की ऊंचाई पर इस स्थल से सोर घाटी का तथा हिमाच्छादित पंचाचूली, त्रिशूल आदि चोटियों का मनोहर दृश्य दिखाई देता है। पिथौरागढ़ से ऐंचोली, नकुलेश्वर मंदिर, आठगांव शीलिंग होते हुए यहां ट्रेकिंग करते हुए जाया जा सकता है। बड़ाबे रोड से 2 किलो मीटर पैदल चलकर भी यहां पहुंचा जा सकता है। घने जंगलों से घिरे इस स्थान में भारतीय सेना अक्सर युद्धाभ्यास करती है।
शिवरात्रि मैं यहां मेला लगता है जिसमें स्थानीय लोग बड़ चढ़कर भागीदारी करते हैं। शीत ऋतु में यहां अक्सर हिमपात होता है। लोक मान्यता है कि केदारेश्वर भगवान से की गई प्रार्थना कभी निष्फल नहीं होती। उसकी कृपा से स्थानीय जनता की प्राकृतिक प्रकोपों से रक्षा होती है तथा सुख शान्ति बनी रहती है।




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