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Uttarakhand News पितृदोष से पीड़ित कोई परिवार समाधान क़े लिए किसी गुरु क़े पास जाते हैं या फिर गुरु को अपने यहाँ बुलाते हैं

रिपोर्टर नारायण सिंह पिथौरागढ़ उत्तराखंड

कई बार देखा जाता हैं की पितृदोष से पीड़ित कोई परिवार समाधान क़े लिए किसी गुरु क़े पास जाते हैं या फिर गुरु को अपने यहाँ बुलाते हैं, यहाँ तक की गुरु से अपने यहाँ आने का आग्रह करते हैं तो घर क़े किसी सदस्य क़े व्यवहार मे अचानक से उग्र परिवर्तन आ जाता हैं, किसी क़े पास जाना और किसी गुरु का घर मे आना उन्हें बिलकुल अच्छा नहीं लगता, इसका सिर्फ और सिर्फ एक हीं कारण हैं, वो ये की पितृआत्मा परिवार से नाराज हैं, और परिवार को कस्ट देना चाहती हैं! वो नहीं चाहती हैं की परिवार को इतनी जल्दी रास्ता मिले, बल्कि वो चाहती हैं की परिवार को जाने अनजाने हुई गलती का अहसास हो और अपने मुँह से स्वीकार करे! गुरु क़े पास जाने या बुलाने पर नाराज होने का मुख्य कारण ये हैं की वो पितृआत्मा जानती हैं की गुरु क़े आने पर तारण तो होगा हीं, इसलिए घर का माहौल अशांत कर देती हैं क्यू की वो जल्दी रास्ता नहीं देना चाहती, पितरात्मा क़े इतने उग्र होने का कारण ये भी हैं की उनके साथ गलत व्यवहार हुआ हो,

गलत व्यवहार से अर्थ ये हैं!
कुछ परिवार कई पीढ़ियों से रोजगार क़े लिए शहरों मे रहते हैं जिन्हे इन विषयो की जानकारी नहीं होती किसी भी पितृदोष का सुनते हीं वो डर जाते हैं जहा भी किसी जानकर क़े विषय मे सुना वहा समस्या क़े समाधान क़े लिए जाते हैं, अगर इन विषयो का जानकार गलत क्रियाओ को करने वाला हुआ तो वो पितरो को मुक्ति क़े स्थान पर उनका बंधन कर देता हैं या दबा देता हैं, इसका मुख्य कारण जानकारी का अभाव हैं इस क्षेत्र मे जानकारी रखने वाला हर व्यक्ति ये नहीं जानता की पितृ तारे जाते ना की दबाये, उनके लिए वो सिर्फ एक पीड़ा देने वाली आत्मा से अधिक कुछ और नहीं, जबकि पितृ हमसे अपना तारण मांगते हैं, ध्यान ना देने पर थोड़ा बहुत चैटक लगाते हैं, वहीँ नासमझी मे कुछ गलत कर दिया तो उग्र रूप लेते हैं! इसलिए पहाड़ से सम्बन्ध रखने वाले कोई भी व्यक्ति केवल अपने कुलदेवो की शरण मे जाये ना की किसी तांत्रिक या बाबा की चक्कर मे पड़े!

किसी भी आत्मा को तारने का अधिकार कुलदेवो का होता हैं!
अगर कोई भी व्यक्ति पितरो को तारने के नाम पर या देव पूजने के नाम पर आपको शमशान जैसी जगह ले जाता हैं तो समझ जाये गलत क्रिया की जा रही हैं, पितृ का न्याय कुलदेवो के सामने होता हैं उन्हीं के आदेश पर सहमत होकर वो मृत्युमण्डल छोड़कर अपने ईस्ट धाम जाते हैं,

नोट :- ऐसी परिस्तिथि मे जब किसी व्यक्ति द्वारा पितृ का क्रोध दीख रहा हो तब विनम्रता से उनसे पूछे, जाने-अनजाने हमसे जो गलती हुई हैं उसकी सजा हम भुगत चुके हैं, और भुगत भी रहें हैं, हमारी गलतियों को माफ़ करो हम आपके अज्ञानी बच्चे हैं, हमें सही रास्ता दिखाओ और स्वयं भी मुक्ति की ओर आगे बड़ो! ये सभी बाते विनम्रतापूर्वक होनी चाहिये धमकाकर या ऊची आवाज़ मे बिलकुल भी नहीं! वो जरूर दया मै आएंगे, बस जरुरत है खुद से बोलने क़ी!

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