उत्तरप्रदेशब्रेकिंग न्यूज़

Uttar Pradesh News काटे जा रहे हरे प्रतिबंधित वृक्ष जिम्मेदार अधिकारियों की डिल के कार्यकारी सरकार की व्यवस्था पर फिर से पानी

सदर तहसील क्षेत्र में चंद पैसों के लालच में वन माफिया काट रहे हरे भरे पेड़

रिपोर्टर सलमान रायबरेली उत्तर प्रदेश

रायबरेली  हरे भरे पेड़ों की अवैध कटाई ने पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचाया है। लगातार अवैध कटाई ने जहां मानवीय जीवन को प्रभावित किया है, वहीं असंतुलित मौसम चक्र को भी जन्म दिया। पेड़ो की अंधाधुंध कटाई जो पर्यावरण की दृष्टि से अत्यंत चिंताजनक है। कानून और नियमों के बावजूद पेड़ो की कटाई धुआंधार जारी है। हल्का पुलिस व रेंजर की मिलीभगत से हरे पेड़ों को काटा जाता है। लकड़ी ठेकेदार हल्का पुलिस से संपर्क कर कटान को बेवडक अंजाम देते हैं। उन्हें पेड़ कटान का परमिट हल्का पुलिस से ही मिल जाता है और ठेकेदार बेरोकटोक हरियाली पर आरा चला पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं। नायक नहीं खलनायक हूँ मैं फॉरेस्टर नायक बनकर तो दरोगा खलनायक बनकर सरकार की नीति और नीयत पर पलीता लगा रहे हैं। जबकि सरकार का दावा है कि हरियाली को नष्ट करने और करने बालों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी लेकिन अपनी है हक र्मिता के चलते फारेस्टर एवं क्षेत्रीय वन दरोगा अपने आप को डीएफओ का करीबी बताकर हरियालियों को नष्ट करने में तुला हुआ है। जहां एक और सरकारी पर्यावरण संरक्षण प्रदान करने के लिए हर जतन कर
रही है। ताकि पर्यावरण संतुलन बने रहे। सभी लेकर सरकार पानी की तरह रूपा बहाकर लगातार नामांकन एवं जागरूकता अभियान चला रही है ग्रीन यूपी क्लीन यूपी बनाने लिए सरकार सभी से आरक्षण की अपील कर रही है। वहीं दूसरी ओर पुलिस एवं वन विभाग के प्लांट के कारखाने वन माफिया बेखौफ हरियाली पर आरा चला रहे हैं। चर्चा है कि वन विभाग और पुलिस के कुछ कर्मचारी साठगाठ सेवन माफिया बेखौफ को प्रतिबंधित कर हरे पेड़ों पर आरा चला रहे हैं। जिसका जीता जगता उदाहरण भदोखार व मिल एरिया क्षेत्र में देखा जा सकता है। जहां हरे प्रतिबंधित पेड़ों की कटान धड़ल्ले से की जा रही है। वन विभाग जान कर भी अंजान बना हुआ है। लेकिन आलम यह है कि सदर तहशील क्षेत्र में पुलिस और वन विभाग की मिली भगत से क्षेत्र में स्वस्थ्य हरे प्रतिबंधित मोटे-मोटे पेड़ काटे जा रहे हैं। वन माफियाओं को ना तो वन विभाग को खतरा है और ना ही पुलिस का डर लोगों का कहना है कि हैडलैल से हो रही पेड़ों की कटान कहीं और नहीं बन रक्षकों की भावना की ओर संकेत करती है। कोविड- 19 संकटकाल में पड़े ऑक्सीजन के काल के बाद भी हो रही पेड़ की कटान चिंता का विषय बनी हुई है।

Indian Crime News

Related Articles

Back to top button