Madhya Pradesh News पीजीबीटी के प्राध्यापक पंकज नाथ का कारनामा
सन 2016 की भोज परीक्षा की B.Ed M.Ed कक्षाओं के संपर्क कार्यक्रम में फर्जी हस्ताक्षर कर लाखों रुपए का गबन

✍️ रिपोर्टर राम सुहावन पटेल रीवा मध्य प्रदेश
रिटायर्ड प्राध्यापक से लेकर प्रशिक्षणार्थियों के फर्जी हस्ताक्षर कर, हजम कर लिए लाखों रुपए भृत्य तक को नहीं छोड़ा भोज विश्वविद्यालय की B.Ed M.Ed परीक्षा में लाखों का घोटाला उजागर हुआ है। भोज प्रभारी रहे प्राध्यापक पंकज नाथ मिश्रा ने लाखों का घोटाला किया है।

शिक्षकों के बेहतर प्रशिक्षण के लिए प्रारंभ किए गए संभाग के इकलौते शिक्षा महाविद्यालय में भ्रष्टाचार के मामले जिस तरह से एक-एक करके उजागर होते जा रहे हैं,उससे लगता है कि यह महाविद्यालय शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए नहीं भ्रष्टाचार के प्रशिक्षण के लिए ही खोला गया था। भ्रष्टाचार के नित नए मामले और कारनामे दिन प्रतिदिन सामने आ रहे हैं। सिर्फ मामले ही नहीं भ्रष्टाचार के नए-नए तरीके भी उजागर हो रहे हैं। गौरतलब है कि शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों के ऐसे शिक्षकों के लिए जो नियमित B.Ed M.Ed प्रशिक्षण नहीं प्राप्त कर सकते थे ,उनके लिए भोज विश्वविद्यालय भोपाल शासकीय शिक्षा महाविद्यालय रीवा को अध्ययन केंद्र क्रमांक 501 बनाया था।

जहां शिक्षा महाविद्यालय में लगातार 25 वर्षों से प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ प्राध्यापक पंकज नाथ मिश्रा को सहायक समन्वयक एवं भोज परीक्षाओं का प्रभारी बनाया गया था । जहां B.Ed एवं M.Ed की परामर्श कक्षाओं के संचालन सहित, परीक्षा एवं अन्य व्यवस्थाओं के तहत प्रतिवर्ष लाखों रुपए की राशि भोज विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षा महाविद्यालय को दी जाती थी। संवाददाता प्रद्युम्न शुक्ला के द्वारा पूरे प्रमुखता के साथ कई बार प्रकाशित किया फिर भी प्रशासन नहीं जागा है जिसमें भोज परीक्षा प्रभारी ने जमकर भ्रष्टाचार किया।अधिवक्ता उमाकांत विश्वकर्मा द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत सन 2016 से 2020 तक की मांगी गई जानकारी से हुए खुलासे से आंखें फटी रह जाएंगी। भोज प्रभारी प्राध्यापक ने जहां खुद के लिए परामर्श कक्षाओं, सुपरविजन, सहायक परीक्षा समन्वयक के नाम पर लाखों रुपए प्रति वर्ष आहरित किए, वही सेवानिवृत्त प्राध्यापकों सहित महाविद्यालय के प्रशिक्षणार्थीयो एवं अन्य नामों से खुद ही सभी के फर्जी हस्ताक्षर कर लाखों रुपए गबन कर लिये।

वरिष्ठ व्याख्याता उमेश तिवारी के नाम पर बिल में काट छांटकर,तो सेवानिवृत्त प्राध्यापक के के पांडे को ₹16750, टी एस पांडे को ₹8840, के के पांडे को ₹12000 , टी एस पांडे को ₹12000 ,का फर्जी भुगतान किया गया । जहां सभी प्राध्यापकों के हस्ताक्षर खुद पंकज नाथ की हैंडराइटिंग से किए गए हैं । इसी तरह एम एल तिवारी को ऑब्जर्वर के नाम पर ₹5600 का भुगतान दिखाया गया है। जिसमें भी एम एल तिवारी के फर्जी हस्ताक्षर भोज प्रभारी प्राध्यापक पंकज नाथ मिश्रा की रायटिंग से बने हुए हैं। इतना ही नहीं एम एड प्रशिक्षणार्थियों विनोद साकेत, आशुतोष श्रीवास्तव, कृष्ण कुमार पांडे, के नाम से भी भुगतान कर फर्जीवाड़ा किया गया है। इसी तरह सन 2018 में आशुतोष श्रीवास्तव को ₹26400 ,तो कवि कुमार को भृत्य, पोखरी टोला बताकर फर्जी हस्ताक्षर से ₹9000 आहरित किए गए। धर्मराज पाल को कभी वरिष्ठ अध्यापक ,कभी व्याख्याता सीटीई रीवा, तो कभी पीटीएस चौक बता कर लाखों रुपए की राशि आहरित की गई। इसी तरह आशुतोष श्रीवास्तव को वरिष्ठ व्याख्याता सीटीई, कभी नेहरू नगर बताकर भुगतान किया गया ।इतना ही नहीं महाविद्यालय के भृत्य श्याम लाल वर्मा और रामलाल वर्मा के भी फर्जी हस्ताक्षर कर राशि आहरित की गई।

महाविद्यालय में संचालित प्रशिक्षण में एसआरजी को मानदेय भुगतान प्रशिक्षण मद से किया गया । तो सन 2017 में एम एड प्रशिक्षणार्थियों अशोक पटेल ,निलेश कुमार पांडे, रजनीश कुमार सिंह रजनीश तिवारी जय कुमार मिश्र ,दीपक मिश्र ,सौरभ कुमार पांडे आदि को प्रत्येक को 3500 के मान से कुल ₹24000 उनके फर्जी हस्ताक्षर से प्रशिक्षण प्रभारी पंकज नाथ मिश्रा द्वारा आहरित किए गए । परीक्षा प्रभारी पंकज नाथ मिश्रा और तत्कालीन लेखापाल अशोक तिवारी ने मिलकर यह रकम वेंडर के माध्यम से भुगतान कर फर्जीवाड़ा किया।कुल मिलाकर 2015-16 से लेकर आगे की भोज परीक्षाओं में भी भोज प्रभारी प्राध्यापक डॉक्टर पंकज नाथ मिश्रा और लेखापाल अशोक तिवारी ने मिलकर तत्कालीन प्राचार्य प्रफुल्ल शुक्ला की आंख में धूल झोंक कर फर्जी हस्ताक्षर करके प्रतिवर्ष लाखों रुपए का भ्रष्टाचार किए। अधिवक्ता उमाकांत विश्वकर्मा द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम से प्राप्त की गई जानकारी में पंकज नाथ के कारनामे उजागर होने के बाद भाजपा नेता शिवनंदन मिश्रा ने संबंधित विभागों को प्रमाण सहित भोज परीक्षा के इस घोटाले की जानकारी सौंप दी है। देखना है घोटालेबाज कब तक कानून के शिकंजे में आते हैं।


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