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Uttar Pradesh News सरकारी स्कूल की नई किताबें कबाड़ की दुकान पर, गरीब बच्चों का भविष्य दांव पर “क्यों”?

रिपोर्टर संजय कुमार सिंह खीरी उत्तर प्रदेश

जहां एक तरफ सरकार गरीब बच्चों के लिए निशुल्क शिक्षक संस्थान जैसे प्राथमिक विद्यालय खोल रही है मौजूदा समयभारत में इन प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 14.89 लाख और उत्तर प्रदेश का वार्षिक बजट 6.90 लाख करोड़ होने पर भी वह बच्चों के लिए,शिक्षा उनका जन्म सिद्ध अधिकार जैसे प्रावधान होने के बावजूद बच्चे अनपढ़ व शिक्षा से वंचित क्यों। ऐसे में ही एक मामला खीरी जिले के पलिया कला से निकल कर आया जिसमें कबाड़ी की दुकान पर प्राथमिक विद्यालय की पुस्तके जिन पर सर्वेशिक्षा अभियान, की पुस्तकों के पूरे बंडल जिनकी पैकिंग भी नहीं खोली गई थी आखिर वह पुस्तक के कबाड़ी की दुकान पर कैसे पहुँची। सरकार के द्वारा नई-नई योजनाओं व डिजिटलीकरण शिक्षा जैसी व्यवस्थाएं होने के बावजूद गरीब परिवार के बच्चों को बेहतर शिक्षा नही मिल रही।
आए दिन खबरें में प्रकाशित होता है कि आए दिन प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों से विभिन्न विभिन्न श्रम जैसे कार्य उनसे करवाए जाते है कहीं इसी तरह की लापरवाही की वजह से ही तो बच्चे विद्यालय जाने से इनकार करते हैं।
हमने तो सुना था भारत के भविष्य का निर्माण उनकी स्कूलों मे होता है। परंतु अगर शिक्षा विभाग भी इस तरह की लापरवाही करेगा तो देश को बच्चों के भविष्य को अंधकार में लेजाने जैसा ही होगा। सरकार के द्वारा किए जा रहे अथक प्रयास व माता पिता के द्वारा किये जा रहे सभी प्रकार के त्याग पर पानी फेर देने जैसा होगा। इस पूरे प्रकरण की सच्चाई को सामने लाने के लिए पत्रकार द्वारा जब यह खबर साथियों के साथ सोशल मीडिया पर वायरल की गई तो जिम्मेदारों पर कार्यवाही होने के बजाय उल्टा पत्रकार पर ही मुक़दमा लिख दिया गया, आपको बता दें कि मुकदमा किसी के नाम से नहीं है बल्कि मोबाइल नम्बर के जरिये लिखा गया है, इस मामले को लेकर पत्रकारों ने कोतवाली का घेराव किया कोतवाली प्रभारी और पलिया कला एसडीएम कार्तिकेय सिंह के साथ बैठकर वार्ता की गई जिसमें सरकार के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होगी और इसकी जांच कराई जाएगी जो भी दोस्ती होगा उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। यह विरोध प्रदर्शन पूरे जिले प्रदेश में देखने को मिला जहां पर शिक्षा विभाग की ताजा साही के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाए गए।

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