Chhattisgarh News अब पानी से बिजली बनाने की तकनीक में एक कदम आगे निकलने की तैयारी कर रहा है। अभी प्रदेश के 4 बांधों में हाइडेल प्रोजेक्ट लगे हैं, जिनसे सालभर बिजली पैदा हो रही है।
लेकिन बांधों में पानी कम होने के बाद दिक्कत यह आ रही है कि गर्मी में एकाध यूनिट ही चलती है, बाकी बंद करनी पड़ती है।

रिपोर्टर राकेश कुमार साहू जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़
इस वजह से सरकार ने इन बांधों के अलावा अन्य बांधों में कुल मिलाकर 5 नए तथा पंप तकनीक वाले हाइडेल पाॅवर प्लांट लगाने की तैयारी कर ली है। अभी देश में कुछ बांधों में इस तकनीक से सालभर हाइडेल बिजली का उत्पादन हो रहा है। खास बात यह है कि थर्मल पाॅवर यानी कोयले वाले ताप विद्युत प्लांट में एक यूनिट बिजली बनाने में लगभग 4 रुपए खर्च होते हैं। जबकि पानी से एक यूनिट बिजली 50 से 60 पैसे के खर्च पर ही बन जाएगी। भास्कर ने प्रदेश के गंगरेल और सिकासेर में पानी से बिजली बनाने की तकनीक का मुआयना किया। गंगरेल में पानी से बिजली बनाने की चार यूनिट लगाई गई हैं। एक यूनिट से कुल 60 हजार यूनिट बिजली रोज बनाई जाती है। वर्तमान में गंगरेल से 11 सौ क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इससे दो यूनिट से एक लाख 20 हजार यूनिट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। बताया गया है कि नवा रायपुर को पानी दिया जाए तो चारों यूनिट साल भर चल सकते हैं और इसकी बिजली से पूरे धमतरी को रौशन किया जा सकता है। इसी तरह सिकासेर में 3.5 मेगावाट क्षमता की दो यूनिट लगाई गई हैं। दोनों यूनिट एक अगस्त से शुरू की गई हैं। इससे प्रतिदिन सात मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है।
एक यूनिट ही सालभर ऑन गंगरेल की सभी चारों यूनिट मुख्यत
बारिश के महीने में जुलाई से सितंबर तक चलती है। इसके अलावा रवि फसल के लिए पानी छोड़े जाने पर मई-जून में और यदि गर्मी के दिनों में तालाबों को भरने के लिए पानी छोड़े जाने पर एक यूनिट चलता है। यानी यहां का एक यूनिट लगभग साल भर के लिए आसानी से चलाय !

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