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Uttar Pradesh News महाराजगंज कीमत चढ़ी तो भारत नेपाल सीमा से मसालों की तस्करी बढ़ी

 ब्यूरो चीफ मोहम्मद अमन महाराजगंज उत्तर प्रदेश 

महराजगंज  भारत नेपाल सीमा पर तैनात तमाम सुरक्षा एजेंसियों की नाक के नीचे बड़े पैमाने पर तस्करी का बाजार फल-फूल रहा है। नेपाल के रास्ते भारत की सीमा में गरम मसालों की तस्करी भी धड़ल्ले से होने लगी है। गोरखपुर शहर तस्करी के इन मसालों को जमा करने का केंद्र बिंदु बन गया है। यहां आने के बाद शहर के साहबगंज मंडी से लेकर शाहमारूफ और पांडेयहाता में विदेशी मसालों की बिक्री होती है। कुछ मसाले भारत से नेपाल ले जाकर खपाए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियों की मिलीभगत से तस्करी का धंधा फल-फूल रहा है। नेपाल से सोनौली के रास्ते रोजाना करोड़ों रुपये के मसाले गोरखपुर शहर के कई इलाकों में खपाए जा रहे हैं। तो गोरखपुर से जीरा, धनिया और कबाब चीनी जैसे मसाले नेपाल के भैरहवा भेजे जा रहे हैं। साहबगंज मंडी से लेकर शाहमारूफ, पांडेय हाता से लेकर विभिन्न इलाकों में होलसेलर तस्करी के इन सामानों को खरीदकर गांव-देहात के ग्राहकों में खपा रहे हैं। रोजाना इस तस्करी के कारोबार से यहां के व्यापारी जहां मालामाल हो रहे हैं, वहीं सरकार को रोजाना लाखों के राजस्व का नुकसान पहुंच रहा है। अपर पुलिस अधीक्षक आतिश कुमार सिंह ने सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है। जांच के दौरान कार्रवाई की जाती है।मसाला बिक्री करने में होता है दोगुने का मुनाफा नेपाल से मरीच, दालचीनी, बड़ी इलायची, छोटी इलायची, लौंग, पोस्तादाना, जावित्री और भारत से जीरा, धनिया और कबाब चीनी जैसे मसाले भेजे जा रहे हैं, जिनमें कुछ मसालों पर दोगुना तक का मुनाफा हो रहा है। इससे तस्करी का यह कारोबार लगातार बढ़ता ही जा रहा है। नेपाल में मरीच की कीमत 600 तो भारत में 850 रुपये, दालचीनी नेपाल में 300 रुपये तो भारत में 800 रुपये, बड़ी इलायची नेपाल में 700 रुपये तो भारत में 1000 रुपये, लौंग नेपाल में 1000 रुपये तो भारत में 1200 रुपये, छोटी इलायची नेपाल में 1200 रुपये तो भारत में 2000 रुपये, जावित्री नेपाल में 2000 तो भारत में 2400 रुपये, पोस्तादाना नेपाल में 300 तो भारत में 1400 रुपये, जीरा भारत में 700 तो नेपाल में 1400 रुपये, धनिया भारत में 120 तो नेपाल में 300 रुपये, कबाब चीनी भारत में 1400 तो नेपाल में 1800 प्रति किलो भारतीय मुद्रा में बेचा जा रहा है। व्यापारी को करीब दुगुने का मुनाफा हो रहा है।बेहद मुश्किल है पहचान पाना
विदेशी मसालों को भारतीय मार्केट में आसानी से खपाने की एक सबसे बड़ी वजह यह भी है कि इनकी पहचान करना बेहद मुश्किल है। ये देखने में बिलकुल उसी तरह हैं, जैसा कि भारत में है। सिर्फ पैकिंग में फर्क होने की वजह से आसानी से पकड़ में आ सकते हैं। नेपाल के सुदूर पहाड़ी इलाकों से मसाला लाकर सीमावर्ती जिलों में डंप किया जाता है। कुछ मसाले ऐसे हैं जो नेपाल में नही होते हैं। उन्हें नेपाल के व्यापारी भारत में तस्करी करने के लिए ही नेपाल में आयात करते हैं। नेपाल में उक्त मसालों की कस्टम ड्यूटी भारत के मुकाबले बहुत कम है। इसका फायदा उठाते हुए तस्कर रोजाना करोड़ों का माल बार्डर से आसानी से पार करा रहे हैं, जोकि गोरखपुर सहित देश के तमाम महानगरों में जा रहा है। ऐसे पार करते हैं बार्डर तस्करी के इस कारोबार से कई सफेदपोश भी जुड़े हैं। इन्होंने इस काम के लिए सैकड़ों कैरियर को भी लगा रखा है। ये कैरियर भारत-नेपाल की खुली सीमा के 84 किलोमीटर की सीमा का फायदा उठाते हुए पकडंडियों के रास्ते पहले इन सामानों को बार्डर एरिया पार कराकर सोनौली, कोल्हुई बाजार, ठूठीबारी, झुलनीपुर आदि एरिया में स्टॉक करते हैं। इसके बाद यहां से इन सामानों को गोरखपुर भेजा जाता है। जहां से इसकी देश भर में सप्लाई हो रही है।इन सामानों को बार्डर एरिया से गोरखपुर लाते वक्त भी आसानी से पकड़ा जा सकता है। बार्डर पर एसएसबी और पुलिस की आंखों में धूल झोंककर आने वाले इन सामानों की भारत सीमा में पड़ने वाले थाना क्षेत्रों में कोई चेकिंग नहीं होती है। सूत्रों के अनुसार, सभी पुलिस पिकेट और पोस्ट पर ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मियों को 500 के नोट देकर गाड़ियां बड़े ही आराम से पास हो जाती हैं। यही वजह है कि रोजाना हो रहे इस कारोबार का पुलिस या एसएसबी भले ही कभी-कभार बरामदगी करती हैं।

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