Uttar Pradesh News हम हिंदुओं ने भी तुझे कहा देवता हुसैन

रिपोर्टर प्रदीप कुमार वर्मा जनपद गोण्डा उत्तर प्रदेश
गोण्डा इनके रोम-रोम में गंगा-जमुनी तहजीब रची-बसी है। हिंदू परिवार में जन्मे पर इमाम-ए-हुसैन को खिराज-ए-अकीदत सोज और सलाम पढ़कर अदा करते हैं। हम बात कर रहे हैं मनीष की। दस वर्ष की उम्र में संगीत साधना कर रहे मनीष हजरत इमाम-ए-हुसैन की शिक्षाओं से खास प्रभावित हैं। मुसलमान न होते हुए भी मनीष मुहर्रम के महीने में मजलिस और मातम के दौरान हजरत इमाम-ए-हुसैन की याद में सोज और सलाम पढ़ते हैं। हनुमान भक्त मनीष को बचपन से ही संगीत का शौक था। इनके पिता पंडित राहुल ने पहचाना और उस्ताद अफजल अब्बास से संगीत की शिक्षा दिलाना शुरू किया। पंडित हरिशंकर मिश्र दिल्ली घराने के उस्ताद नसीर अहमद से संगीत की शिक्षा पाने वाले मनीष उर्दू और फारसी की सूफियाना गजलों को महारथ के साथ गुन-गुनाते हैं। वह बताते हैं कि इमाम-ए-हुसैन के नाम पर सोज और सलाम पढ़ने की प्रेरणा उनकी अजीम शहादत को सुनकर व पढ़कर मिली। मनीष कहते हैं हजरत इमाम-ए-हुसैन ने यजीद से कहा कि मुझे भारत जाने दो। यह जुमला मुझे बेहद प्रभावित कर गया कि इतने महान इमाम भारत आना चाहते थे। यही हमारी गंगा-जमुनी तहजीब का बेजोड़ नमूना है। जिसे हमको आज के ‘यजीदियों’ से बचना है। मनीष आज के नौजवानों द्वारा पढ़े जा रहे सोज और सलाम व नौहे से खासे आहत हैं। वह कहते हैं कि यह बगैर रागदारी के पढ़े जा रहे हैं जिससे मर्सियों और सोज का दर्द खत्म हो रहा है। ख्याल, ठुमरी, दादरा और भजन को अपनी सुरीली आवाज में सजाकर पेश करने वाले मनीष का सोज सुन कभी शिया धर्म गुरु मरहूम मौलाना कल्बे सादिक भी रो दिए थे। कर्बला के शहीदों की दीवानगी के खातिर वह कहते हैं ‘दीवाने होते हैं बनाये नहीं जाते’। उन्होंने बेगम अख्तर से भी बाकायदा गजल, सोज और सलाम सीखा है। मनीष के साथ ही लखनऊ के डा० मुकेश कुमार, अरविंद गुप्ता व डा० सारंग मोहली मजलिसों व मातम में बढ़चढकर हिस्सा लेते हैं। मनीष काफी अर्से तक यह कारी हैदर के भी शिष्य रहे जोकि लखनऊ में मर्सिया और नोहे के अच्छे उस्तादों में से एक हैं। अपनी भावनाएं मनीष कुछ यूं व्यक्त करते हैं ‘ हुसैन तेरे नाम पर फिदा हैं सारे भारतीय, कहीं है तेरे ताजिए कहीं हैं तेरी आरती, हम ब्राहमणों ने तुझे कहा देवता हुसैन, शहादतों की आबरु शहीदे कर्बला हुसैन’।


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