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Uttar Pradesh News जिले की बेटी परवीन ने अमेरिका में बसाया असहाय बुजुर्गों का परिवार, 9 साल से चला रही अभियान

रिपोर्टर अजीत अग्निहोत्री हरदोई उत्तर प्रदेश

हरदोई   वसुधैव कुटुंबकम यानी पूरी धरती ही परिवार है. भारत के इस संदेश को पूरे दुनिया में चरितार्थ करने वाले भारतवंशी अक्सर सामने आते रहते हैं | ऐसा ही एक नया नाम है जनपद हरदोई की परवीन का | उनके सेवा भाव से इन दिनों अमेरिका वसुदेव कुटुंबकम की सीख समझ रहा है | जनपद के बेहंदर ब्लाक के रसूलपुर आँट की रहने वाली परवीन अंजुम ने वाशिंगटन डीसी में ऐसे बुजुर्गों का एक परिवार बसा दिया है | ऐसे असहाय बुजुर्गों की सेहत,खान-पान, रहन-सहन का इंतजाम और देखभाल करती हैं | परवीन अंजुम ने शुरुआती शिक्षा गांव में पूरी की | उसके बाद लखनऊ से उन्होंने युनानी मेडिसिन एंड सर्जरी में स्नातक किया | लखनऊ दूरदर्शन में वह उर्दू खबरों की न्यूज़ रीडर भी रह चुकी हैं | शाम को वह स्टूडियो में खबरें पढ़ती थी, और दिन में चिकित्सा के क्षेत्र में भी सेवा करती थी | 1993 तक उन्होंने दोनों काम साथ साथ किए | 1993 में हरदोई के ही रसूलपुर आँट गांव के ही मोहम्मद एखलाक सिद्दीकी से उनका निकाह हो गया | एखलाक पहले से ही अमेरिका में रहते थे | निकाह के बाद उनके साथ वह भी उनके साथ अमेरिका चली गई | वहां की संस्कृति, रहन-सहन समझने में उन्हें कुछ समय लगा | सास और ससुर समेत पूरा परिवार वहीं पर रहता था | बुजुर्ग सास ससुर की सेवा और फिर अपने बच्चों की देखरेख में जीवन उलझ गया | बच्चों के बड़े हो जाने और सास के गुजर जाने के बाद वर्ष 2014 में उन्होंने असहाय बुजुर्गों की सेवा को अपना धर्म बनाया | जब उनकी सास बीमार थी तब उनको लगा कि बुजुर्गों को किसी न किसी के साथ की जरूरत होती है, लेकिन जिनके पास अपने नहीं, उन बुजुर्गों का क्या होता होगा | परवीन के मन में यह विचार तब आया जब उनकी सास फातिमा बीमारी की वजह से बिस्तर पर थी | परवीन उनकी सेवा कर रही थी | लगभग 13 वर्ष तक वह उनकी सेवा में व्यस्त रहीं | बस 2014 में बीमारी के चलते उनकी सास की मृत्यु हो गई | सास की सेवा के दौरान ही उनको बुजुर्गों की तकलीफे समझने का अवसर मिला | कुछ दिन बाद ही उन्होंने ओल्ड एज होम की नींव रखी | परवीन के मुताबिक वर्तमान में 11 बुजुर्ग उनके पास रहते हैं | जल्द ही उनका यह परिवार बढ़ने वाला है | काउंसलिंग हो चुकी है | कुछ बुजुर्ग उनके कुटुंब में शामिल होने वाले हैं | उनकी देखरेख, दवा व खानपान की पूरी व्यवस्था की गई है |

परवीन का पूरा परिवार करता है सहयोग

बुजुर्गों के परिवार को पालने के लिए परवीन का पूरा परिवार भी उनका सहयोग करता है | परवीन बताती हैं कि उनकी बेटी इस काम में उनका सबसे ज्यादा हाथ बताती है | वह अभी ग्रेजुएट में है, पीजी की तैयारी कर रही है | उनके दो पुत्र अकाउंटेंट के क्षेत्र में काम करते हैं | वे दोनों काम के सिलसिले में घर से दूर रहते हैं | लेकिन वह ओल्ड एज होम को आर्थिक मदद करते हैं | उनके पति एखलाक अमेरिका में वाणिज्य विभाग की एजेंसी यूनाइटेड स्टेट्स पेटेन्ट एंड ट्रेडमार्क कार्यालय में प्राइमरी पेटेंट एग्जामिनर है | इस कार्य में वह भी पूरा सहयोग करते हैं |

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