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Madhya Pradesh News खड़ौरा में संचालित क्रेशर ने उड़ाई एनजीटी के नियमों की धज्जियां

भारी प्रदूषण से संक्रामक बीमारियों का खतरा,कृषि भूमि की उर्वरा शक्ति भी हो रही प्रभावित

रिपोर्टर विजय कुमार गुप्ता सीधी मध्य प्रदेश

सीधी जिले में क्रेशरों के संचालन में नेशनल ग्रीन ट्राईब्यूनल के दिशानिर्देशों का पालन करने की जरूरत नहीं समझी जा रही है। लिहाजा कई स्थानों पर क्रेशर संचालन से पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। ऐसा ही मामला सीधी जिले के मझौली तहसील अंतर्गत खड़ौरा का सामने आया है। यहां खनिज विभाग द्वारा ग्रेनाइट खदान के लिए जेड ब्लैक रॉक कंपनी को 9.46 हे. भूमि लीज पर वर्ष 2015 में स्वीकृत की गई थी। यह लीज जिस क्षेत्र के लिए दी गई है उसमें निजी भूमि भी शामिल है। हैरत की बात तो ये है कि निजी भूमि स्वामियों के बिना सहमति के ही लीज स्वीकृत कर दी गई। यहीं से फर्जीवाड़ा शुरू हुआ जिसमें खनिज विभाग के अधिकारियों की भी सांठ-गांठ बनी हुई है। कंपनी के कर्ता-धर्ताओं द्वारा सालों बाद भी ग्रेनाइट का कारोबार नहीं शुरू किया गया है। इसकी मुख्य वजह बताई जा रही है कि खदान से जो भी ग्रेनाइट के तत्व निकल रहे हैं उनके क्रेक होने के कारण इसका व्यवसायिक उपयोग संभव नहीं है। लिहाजा ग्रेनाइट खदान के साथ ही अनुपयोगी ग्रेनाइट पत्थर की गिट्टी तैयार करने के लिए क्रेशर संचालन की अनुमति भी खनिज विभाग से ली गई है। इसी क्रेशर की आड में यहां जमकर राजस्व चोरी का खेल शुरू कर दिया गया है। क्रेशर संचालन के लिए औद्योगिक अनुमति दो वर्ष से बिना लिए ही करोड़ों का कारोबार किया जा रहा है। बोल्डर पत्थर के उपयोग में जहां रायल्टी की चोरी की जा रही है वहीं तैयार गिट्टी के बेंचने मेें भी रायल्टी एवं जीएसटी की बड़े पैमाने पर चोरी की जा रही है। शासन को करोड़ों का चूना लगाने के साथ ही कर्ता-धर्ताओं द्वारा एनजीटी के नियमों के अनुसार न तो क्रेशर के संचालन में कबर्ड बेड का उपयोग किया जा रहा है न ही यहां से उडऩे वाले धूल के गुबार को रोंकने के लिए पानी का छिडक़ाव करने की जरूरत समझी जा रही है। यहां से उडऩे वाले धूल के गुबार के चलते आवादी क्षेत्र में संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। वहीं धूल के गुबार उडऩे के चलते भूमि की उर्वरा शक्ति प्रभावित हो रही है और फसलों की पैदावार भी काफी घट रही है। जिसके चलते ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

पत्थर तोडने के लिए की जा रही अवैध ब्लास्टिंग

खडौरा में जेड ब्लैक रॉक के कर्ता-धर्ताओं द्वारा संचालित किए जा रहे क्रेशर संचालन के लिए खदान से पत्थर निकालने के लिए अवैध रूप से ब्लॉस्टिंग की जा रही है। बिना किसी अनुमति के चोरी-छिपे बाहर से भारी मात्रा में विस्फोटक बंद गाड़ी में मंगाई जाती है और उसका उपयोग विस्फोट के लिए किया जाता है। बताया गया है कि ग्रामीणों के घरों में अवैध ब्लॉस्टिंग के चलते दरार आने का जब हाल ही में विरोध किया गया तो फिलहाल ब्लॉस्टिंग बंद की गई है। मौका देखकर रात के समय खदान में ब्लॉस्टिंग कर दी जाती है।

खनिज विभाग की मूक सहमति सवालों के घेरे में

विडंबना यह है कि सभी नियमों को ताक पर रखकर यहां क्रेशर का संचालन होने के बाद भी न तो खनिज विभाग के अधिकारी कोई कार्रवाई कर रहे हैं और न ही खंड स्तरीय राजस्व अमला भी कोई कार्रवाई करने की जरूरत समझ रहा है।

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