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Madhya Pradesh News बेबुनियाद, फर्जी मामले से निर्दोष साबित होकर बरी हुए संवाददाता

सच्चाई की हुई जीत,झूठ की हो गई हार

रिपोर्टर हीरालाल डेहरिया सिवनी मध्यप्रदेश

लखनादौन :  बेबुनियाद, फर्जी मामले से निर्दोष साबित होकर बरी हुए संवाददाता नीकेलाल और उनके पुत्र,हम आपको बता दें कि यह मामला  1/02/2021 का है जब नीकेलाल ने अखबार में खबर प्रकाशित की थी जिसमें पुलिस द्वारा धाराओं को कम ज्यादा करने के लिए रिश्वत देनी पड़ती हैइसी खबर के बाद लखनादौन थाना प्रभारी के एस मरावी और शासकीय सिविल अस्पताल में पदस्थ डॉ अशोक सहलाम ने नीकेलाल और उनके पुत्रों के खिलाफ षड्यंत्र रचा और बेबुनियाद झूठा आरोप लगाया इस केस को लेकर पिता और पुत्र भागते रहे मानसिक रूप से भी परेशानियों का सामना करते हुए हाईकोर्ट जबलपुर से जमानत मिली,लखनादौन सिविल कोर्ट के जाने-माने एडवोकेट फजील अहमद फिरदौसी ने इस केस को न्याय संगत लड़ते हुए पक्षकार नीकेलाल और उनके पुत्रों को निर्दोष साबित करा दिया,षड्यंत्र करने वाले थाना प्रभारी के एस मरावी और शासकीय सिविल अस्पताल में पदस्थ अशोक सहलाम के विरुद्ध नीकेलाल परिवाद दाखिल करेंगे,नीकेलाल ने एडवोकेट फजील अहमद फिरदौसी और उसके स्टाफ का आभार प्रकट करते हुए दिल से धन्यवाद दिया। थाना लखनादौन में यूं तो पुलिस द्वारा धाराओं को कम ज्यादा करने की चर्चा रहती है किंतु इस बात का सबूत के साथ खुलासा हमारे द्वारा किया गया बस इसी बात को लेकर लखनादौन के थाना प्रभारी के एस मरावी के मन में षड्यंत्र रचने की साजिश रची जा रही थी,इसी बीच हमारा झगड़ा अतुल धुर्वे से हुआ था जिसमें स्थानीय पुलिस द्वारा हमारे विरुद्ध मामला बनाया गया धारा 354 के तहत लेकिन न्यायालय ने जब देखा कि पिता और पुत्र 354 में शामिल नहीं हो सकते इसलिए न्यायालय द्वारा हमें इंसाफ दिया गया और हमें जमानत दे दी गई बस इस बात से खफा होकर थाना प्रभारी और सिविल अस्पताल में पदस्थ डॉ अशोक सहलाम ने षड्यंत्र रचा और फर्जी शिकायत कर धारा 353-186-294-506-34 के तहत मामला बनाया था,आखिर मामला क्या था क्या कारण है धारा 354 लगाने की और इसमें कामयाबी नहीं मिली तो षड्यंत्र रच कर 353 एवं अन्य धाराओं के साथ मामला बनाया गया दिनांक 10 फरवरी 2021 की रात 9:00 बजे लगभग अतुल धुर्वे वार्ड क्रमांक 3 के द्वारा शराब पीकर घर के सामने गाली गलौज एवं मां बहन की गालियां दे रहा था जिस कारण से मैंने उसको एक झापड़ मारा किंतु वह पत्थर पर गिर गया जिसके कारण सर पर चोट लग गई थी इसी कारण आवेश में आकर उसकी मां बहन हमें चिल्ला रही थी पर हम सभी लोग घर के अंदर से बाहर नहीं निकले इतने में पुलिस और स्वयं थाना प्रभारी वहां पहुंचे उन्होंने भी पूरी कहानी देखे थे मामला अतुल के ऊपर भी बनता लेकिन यहां राजनीति उल्टी पड़ गई क्योंकि अतुल धुर्वे की मां कई वर्षों से डॉ अशोक सहलाम के घर कार्य करती है यह बात सभी जानते हैं अतुल धुर्वे की मां ने डॉक्टर अशोक सहलाम को बताया तो डॉक्टर अशोक सहलाम का गुस्सा इतना बढ़ गया कि उन्होंने थाना प्रभारी के एस मरावी को कहा देख लेना ऐसा लपेटो कि तीनों ना बच पाए और थाना प्रभारी ने डॉक्टर अशोक सहलाम के कहने पर नीके लाल और दोनों पुत्रों के विरुद्ध 354 का मामला बना दिया यह सोच कर कि यह तीनों जेल चले जाएंगे लेकिन न्यायमूर्ति ने सोचा समझा और हमें जमानत दे दी बस फिर क्या था

कि जो साक्ष्य मेरे पास थे उनके अनुसार मैंने समाचार का प्रकाशन कर दिया जिसे पढ़कर थाना प्रभारी के एस मरावी आग बबूला हो गए और फिर दोनों तीनों ने मिलकर मेरे और मेरे पुत्रों के विरुद्ध 353 एवं अन्य धाराओं के तहत मामला बना दिया जो केस 354 में था वही केस को सीधा उठाकर 353 एवं अन्य धाराओं में बदल दिया गया लेकिन कहते हैं कि दूसरों के प्रति गड्ढा खोदने वाले खाई में गिर जाते हैं ठीक वैसा ही हुआ पढ़े-लिखे अधिकारियों ने सोचा भी नहीं था कि जिस बुनियाद पर यह झूठा केस बना रहे हैं इस जाल में खुद ही उलझ कर रह जाएंगे मैं और मेरे दोनों पुत्रों के साथ महीनों तक भागते रहा लाखों रुपए खाने-पीने और अदालतों में खर्च कर डाले मानसिक तनाव झेलते रहे कुल मिलाकर पूरी तरह बर्बाद हो गए डूबते हुए जहाज को तिनके का सहारा होता है,हमें भी हमारे जाने-माने एडवोकेट फजील अहमद फिरदौसी पर विश्वास था उन्होंने भी पूरी शिद्दत के साथ केस की पैरवी की और अशोक सहलाम को हर बातों में घेरते हुए झूठ को पूरी तरह बेनकाब कर दिया अशोक सहलाम ने जो रिपोर्ट लिखाई थी उसकी एक भी बातों में सच्चाई नहीं पाई गई और सभी को निर्दोष बेगुनाह मानते हुए बरी किया गया,एडवोकेट फजील अहमद फिरदौसी ने बताया कि नीकेलाल चाहें तो थाना प्रभारी के एस मरावी और अशोक सहलाम के विरुद्ध मानहानि या परिवाद पेश कर सकते हैं,नीकेलाल ने बताया कि मुझे मानहानि का केस लगाकर पैसा नहीं कमाना है बल्कि परिवाद दाखिल कर उनके विरुद्ध कार्रवाई चाहता हूं क्योंकि मैं महिनों तक भागते रहा हूं मेरी बदनामी हुई,थाना प्रभारी के एस मरावी औरअशोक सहलाम ने द्वेष भावना से फसाया था इसलिए मैं उनके विरुद्ध परिवाद लगाउंगा ताकि मुझे इंसाफ मिल सके मुझे पूर्ण विश्वास है न्यायमूर्ति पर षड्यंत्रकारियों को अवश्य ही सजा मिलेगी ताकि फिर कोई थाना प्रभारी या अधिकारी ऐसा करने से पहले क‌ई बार सोचेंगे !

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