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Madhya Pradesh News 28,5 किलो गाजा के मामले में हाईकोर्ट ने दूसरे आरोपी को भी दी जमानत पुलिसिया के कारवाही पर उठे सवाल निशान अजय पवार के पास कहां से आया गांजा यह बड़ा सवाल

रिपोर्टर सूर्यकान्त मिश्रा अनूपपुर मध्य प्रदेश

अनूपपुर : एनडीपीएस एक्ट के मामले में एक युक्ति बहुत मशहूर है ऐसे मामले में विवेचक का एक पैर जेल में दूसरा पैर जेल के बाहर रहता हैं क्योंकि ऐसे में मादक पदार्थ की मौजूदगी आरोपियों के कब्जे से बरामद हुई है यह साबित करने का दबाव विवेचक पर होता है यह बात हम इसलिए लिख रहे हैं 27 अक्टूबर 2022 को तत्कालीन थाना प्रभारी भालूमाड़ा और अजय पवार और उनके करिदो द्वारा कथित तौर पर 28,5 किलो गांजा बरामद कर दो आरोपियों पर मुकदमा कायम कर किया गया और दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि दोनों आरोपियों को जमानत देते हुए हाईकोर्ट ने भालूमाड़ा थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी अजय पवार और उनके कर्मचारियों पर मनमानी और दोषपूर्ण के साथ साथ जानबूझकर आरोपियों को फसाने की कारवाही को बताते हुए अनूपपुर पुलिस अधीक्षक को जांच के निर्देश दिए थे अब यह सवाल उठता है कि अगर आरोपियों को जानबूझकर फसाया गया है प्रतिबंधित मादक पदार्थ गाजा अजय पवार के पास कहां से आया और कब इसकी जांच पूर्ण होगी और कब विवेचक जेल जाएंगे यह देखने वाली बात है अनूपपुर भालूमाड़ा थाना द्वारा 27 अक्टूबर 2022 को कथित तो पर 28,5 किलो गांजा ले जाते समय एक मोटरसाइकिल सहित जब्त किया था जिसमें विश्वनाथ शर्मा और नीरज मिश्रा रिश्तेदार है गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया था यह पूरा मामला तब चर्चा में आया जब 29 मार्च 2023 को हाई कोर्ट जबलपुर माननीय न्यायधीश नंदिता दुबे मुख्य आरोपी विश्वनाथ शर्मा को जमानत देते हुए भालूमाड़ा पुलिसके पूरी कार्यवाही में संदेह व्यक्त करते हुए यह टिप्पणी लिख की पूरा मामला आरोपियों को फसाने के नियत से बनाया गया लगता है अनूपपुर पुलिस अधीक्षक को जाच के निर्देश दिए थे और पुना शह आरोपी नीरज मिश्रा माननीय न्यायाधीश नंदिता दुबे पूर्व आदेश को आधार मानकर जमानत पर रिहा किया गया जॉच ढाई दिन ढाई कोस के तर्ज पर अनूपपुर पुलिस अधीक्षक जितेंद्र पवार की माने तो उक्त मामलों में माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के बाद से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक राजन को जांच सौंप दी गई थी 29 मार्च 2023 को जारी आदेश के बाद लगभग 3 से 4 महीने होने को है पर पुलिस अधीक्षक अभी भी नहीं बता पा रहे की जांच कब पूरी होगी जबकि बरबसपुर हत्याकांड बाद से ही चर्चित थाना निरीक्षक अजय पवार पुलिस लाइन में सेवा दे रहे हैं इस घटना को हुए 1 माह पूरे होने क़ो है पर जाच है कि पूरा होने का नाम नहीं ले रहा है कुछ तो हंस्ती है अजय पवार की लगातार विवादों में रहने वाले और अपने कार्यवाही से पुलिस विभाग के लिए परेशानी खड़ा करने वाले अजय पवार क़ो हाई कोर्ट का निर्देश है या आवेदकों के सुनवाई ना होने के घटित हत्याकांड हो मासूम और निर्दोष लोगों को गजब प्रकरण में फसाने का कथित मामला हो क्षेत्र के लूट डकैती चोरी कबाड़ जुआ सट्टा अवैध दारू की पैकारी का मामला हो इतना होने के बावजूद अब तक अजय पवार के ऊपर कोई कार्यवाही ना होना यह बताती है कि पवार साहब की कुछ तो हंस्ती है जो मिटती नहीं है नहीं तो इतनी विवादित काम कर हाई कोर्ट जज के निर्देश के बावजूद 4 महीने जांच की फाइल साहब की अलमारी की शोभा बन रही है और अजय पवार के खिलाफ किसी निर्णय अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पहुंच नहीं पा रहे हैं पुलिस अधीक्षक जितेंद्र पवार समय का निर्धारण भी करवा नहीं पा रहे हैं पवार पर पवार कितना मजबूत है यह किसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है क्या है मामला दर्शल 27 अक्टूबर 2022 को तत्कालीन थाना प्रभारी के निर्देश पर पुलिस के अनुसार दोपहर लगभग 2:00 बजे के 35 मिनट 28,5 किलो किलोग्राम गांजा ले जाते हुए मोटरसाइकिल से जाते हुए पकड़ा था और पुलिस ने बताया था कि उस वक्त गाड़ी विश्वनाथ शर्मा चला रहा था और उसके पीछे नीरज मिश्रा सह यात्री के बैठा हुआ था उक्त मामले में भालूमा ड़ा पुलिस ने अपराध / एफ आई क्रमांक564/2022 एनडीपीसी अधिनियम की धारा 8/20 के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया था इस पूरे मामले में दोनों पीड़ित हाईकोर्ट की शरण लिया जहा पहले न्यायमूर्ति नंदिता दुबे ने 29 मार्च को अपराधिक प्रकरण क्रमांक 1299 /2023क़ो विश्वनाथ शर्मा निवासी झरिया पुलिस चौकी शहडोल को जमानत देते हुए रिहा किया था साथ ही इस पूरी घटना में षड्यंत्र आशंका जाहिर करते हुए पुलिस अधीक्षक अनूपपुर को दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की निर्देश दिए है सभी मामलों की हो जांच उच्च न्यायालय जबलपुर के निर्देश और कई विवाद मामलों में खुलेआम अजय पवार गलतियां सामने आने के बाद अनूपपुर पुलिस अधीक्षक जितेंद्र पवार क़ो तत्कालीक थाना प्रभारी अजय पवार के समय दर्ज किए गंभीर सभी मामलों पुनः समीक्षा करा कर अजय पवार की भूमिका की जांच कराया जाने की आवश्यकता है देखा यह गया है कि जितेंद्र पवार पुलिस कप्तान द्वारा लगातार अजय पवार तत्कालीन थाना प्रभारी भालूमाड़ा की गलतियों को दरकिनार करते रहे और इसका नतीजा यह था की हाई कोर्ट को भी तलख अंदाज में अनूपपुर पुलिस के खिलाफ टिप्पणी करनी पड़ी जिससे अनूपपुर जिले का पुलिस महकमे को शर्मिंदगी झेलनी पड़ रही है पता नहीं और इतने निर्दोष को इन साहब के कितने शातिराना दिमाग और कार्य प्राणी शिकार हुए होंगे जैसे विश्वनाथ शर्मा नीरज मिश्रा हुए है हाई कोर्ट के निर्देश के बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक राजन को जांच सौंपी गई है जॉब कब तक पूर्ण होगी या नहीं कहा जा सकता है जांच जारी है

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