परसापानी–मोहम्मला के जंगल में दिनभर चला हाईवोल्टेज ड्रामा, पुलिस-प्रशासन की समझाइश के बाद शांत हुआ मामला
नगरी। नगरी वन परिक्षेत्र के ग्राम मोहम्मला और परसापानी के मध्य स्थित आरक्षित वन क्षेत्र में मंगलवार को अतिक्रमण हटाने पहुंची वन विभाग की टीम को ग्रामीणों ने घेरकर रोक लिया। करीब 20 सदस्यीय वन विभाग की टीम को तब तक जाने नहीं दिया गया, जब तक अवैध अतिक्रमण में प्रयुक्त ट्रैक्टरों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन नहीं मिला। सूचना पर एसडीओपी, तीन थानों की पुलिस और तहसीलदार मौके पर पहुंचे। अधिकारियों की समझाइश के बाद मामला शांत हुआ।
जानकारी के अनुसार वन विभाग को सूचना मिली थी कि वन परिक्षेत्र नगरी के बाँधा बीट अंतर्गत कक्ष क्रमांक 289 में कुछ लोगों द्वारा जंगल काटकर अवैध रूप से खेत तैयार किया गया है और मंगलवार को 4 से 5 ट्रैक्टरों से वनभूमि की जुताई की जा रही है। वहीं कक्ष क्रमांक 277 में वर्ष 2016 से वनभूमि पर अवैध कब्जा कर झोपड़ी बनाए जाने की भी शिकायत थी।
सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और वैधानिक कार्रवाई व जप्ती की प्रक्रिया शुरू की। इसी दौरान मोहम्मला माल के 50 से 60 ग्रामीणों ने कार्रवाई का विरोध किया। स्थिति बिगड़ते देख अवैध जुताई में लगे ट्रैक्टर चालक ट्रैक्टर लेकर मौके से फरार हो गए।
इसके बाद परसापानी और मोहम्मला रैयत के लगभग 100 से 120 महिला-पुरुष ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए और वन विभाग के अधिकारियों को रोक लिया। ग्रामीणों का कहना था कि वे वर्षों से कक्ष क्रमांक 289 की सुरक्षा करते आ रहे हैं, लेकिन पिछले दो वर्षों से कुछ लोगों द्वारा लगातार वनभूमि पर अतिक्रमण किया जा रहा है। उनका कहना था कि जब तक अतिक्रमण में इस्तेमाल किए गए ट्रैक्टरों और वाहनों पर जप्ती की कार्रवाई नहीं होगी, तब तक वन विभाग की टीम को जाने नहीं दिया जाएगा।
घटना की सूचना मिलते ही उप वनमंडलाधिकारी संजय रौतिया ने वनमंडलाधिकारी धमतरी और एसडीओपी नगरी को अवगत कराया। इसके बाद एसडीओपी नगरी, थाना नगरी, दुगली और सिहावा की पुलिस टीम तथा तहसीलदार नगरी तत्काल मौके पर पहुंचे।
अधिकारियों ने ग्रामीणों से चर्चा कर उन्हें नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई का भरोसा दिलाया। आश्वासन के बाद ग्रामीण शांत हुए और वन विभाग की टीम को सुरक्षित रवाना होने दिया गया।
पुलिस और वन विभाग की संयुक्त मौजूदगी में पूरे घटनाक्रम के दौरान स्थिति नियंत्रण में रही। प्रशासन ने बताया कि मामले में संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।