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Madhya Pradesh News विकास की बाट जोह रही है ग्राम उपड़ी की नई आबादी

रिपोर्टर आशिक अली उज्जैन मध्य प्रदेश

उज्जैन जिला मुख्यालय से लगभग 50 किमी दूर दक्षिण पूर्व में स्थित है तराना विधानसभा का अंतिम गांव उपड़ी। लगभग 2000 की आबादी वाला गांव 2 भागों में बंटा है। एक मुख्य गांव है और दूसरा नई आबादी। 100 प्रतिशत हिंदू आबादी वाला गांव उपड़ी व्यक्तिगत तौर पर तो काफी सक्षम नजर आता है लेकिन शासन की योजनाएं गांव तक मुश्किल से ही पहुंच पाती है। गांव की नई आबादी जहां 25 से 30 परिवार लगभग 30 वर्षों से निवासरत है विकास की बाट जोह रहे है। चुनाव के समय सभी राजनीतिक दलों के नेता आते है। बड़े बड़े वादे करते है और चुनाव के बाद भूल जाते है। नई आबादी में शासन की ओर से न पानी की कोई व्यवस्था है न सड़क की। रोड़ न होने से बारिश में तो स्थिति इतनी भयावह होती है कि बच्चों को भी घुटने तक कीचड़ से होकर स्कूल जाना पड़ता है। ग्राम पंचायत से लेकर जिला प्रशासन तक को स्थिति से अवगत करवाया गया किंतु सिवाय आश्वासन के कुछ नहीं मिला।  मुख्य गांव में भी न तो चिकित्सा की कोई व्यवस्था है न ही 8 वी से आगे स्कूल की। न ही स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था है न ही पेय जल और सीसीटीवी की। शासकीय उचित मूल्य की दुकान तो है लेकिन उसके लिए शासकीय भवन नहीं है। जो कई वर्षों से निजी भवन में संचालित है। पहले शासन द्वारा किसानों के लिए खाद भेजा जाता था जो भी वर्षों से बंद है। गांव में बड़ा सा तालाब है जो रखरखाव और उचित प्रबंधन के अभाव में किसी काम का नहीं है। बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए न तो खेल मैदान है न ही खेल के साधन। गांव का विस्तार होने से खातीखेड़ी रोड़ पर बने घरों तक बिजली नहीं पहुंच पाई है। ट्रांसफार्मर ओवरलोड होकर चल रहे है। खेतों में लगे बिजली के पोल पर लगे बिजली के तार जमीन को छू रहे है। शमशान न होने के कारण अंतिम संस्कार भी खुले में करने पड़ते है। एक बार तो अंतिम संस्कार में विवाद भी हुआ जो तहसीलदार महोदय तक भी पहुंचा परंतु समाधान अभी तक नहीं हो पाया। प्रधानमंत्री आवास योजना हो या रोजगार की कोई योजना सबका क्रियान्वयन गांव में शून्य है। विकास के लिए बात करो तो सब जिम्मेदार पल्ला झाड़ लेते है। उपड़ी उज्जैन जिले का ऐसा गांव है जहां आजादी के बाद से कोई बड़ा अधिकारी सुध लेने नहीं पहुंचा है। पुलिस से लेकर प्रशासन सब उपड़ी में मामले में अनभिज्ञ है। उज्जैन सांसद महोदय 2013 में विधानसभा और 2019 में लोकसभा चुनाव जीते। प्रचार के समय गांव में आए तो नई आबादी में रोड़ बनाने का वादा करके गए परंतु अब शायद भूल चुके है। तराना विधायक महोदय सक्रिय तो है और नई आबादी के रोड़ को प्रधानमंत्री सड़क योजना में शामिल करने की अनुशंसा भी कर चुके है लेकिन सरकार नहीं होने की विवशता के कारण काम नहीं करवा पा रहे है। ग्रामीण असमंजस्य में है कि आखिर करें तो करें क्या? प्रशासन से तो अब ग्रामीणों को कोई उम्मीद भी नहीं है। उम्मीद है तो बस उज्जैन के राजा बाबा महाकाल से। वो ही जनप्रतिधियों और अधिकारियों को सद्बुद्धि दे ताकि उनका ह्रदय पसीजे और वो गांव की सुध ले।

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