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Uttar Pradesh News दावों पर खरी नहीं उतरती कानून व्यवस्था की हकीकत, माफियाओं के शिकार बन रहे ऐसे युवक वाराणसी।

रिपोर्टर सुरेंद्र मोहन तिवारी लखनऊ उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश  देश की कानून व्यवस्था चाक-चौबंद बनने के दावे सीएम योगी से लेकर पुलिस के आला अधिकारी तक करते रहे हैं। बावजूद इसके पिछले दो माह में हुए सनसनी खेज वारदातें इस पर सवालिया निशान लगाती है। तीन दशक से अधिक समय तक आतंक का पर्याय रहे पर बाहुबली पूर्व संसद अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या के बाद सुपारी किलर संजीव महेश्वरी उर्फ जीवा की हत्या की घटनाओं में समानता इशारा कर रही है कि दोनों ही बार सफेदपोश अपने मंसूबों में कामयाब रहे। रातों रात डान बनाने का सपना दिखा कर बेरोजगारों को इस्तेमाल किया जा रहा है। शातिराना अंदाज और आपराधिक इतिहास साफ अतीक अहमद और जीवा को मौत के घाट उतारने वाले शूटरों ने जिस तरीके से गोलियां बरसाईं उससे साफ प्रतीत होता है कि उन्हें न सिर्फ विदेशी असलहे दिये गये बल्कि दर्जनों गोलियां चलवा इसका पूर्वाभ्यास कराया गया। वारदात को अंजाम देने के लिए कभी पत्रकार का रूप धारण किया तो कभी वकील बना दिया। यह सभी बेहद सामान्य या गरीब परिवार से आते हैं और इन्हें माफिया डान बनाने का झांसा देकर मोहरा बनाया।

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