Maharashtra News 200 की दारू और जुर्माना दस हजार!
चंद्रपुर जिले से शराबबंदी हटने के बाद धड़ल्ले से नये बियर बार के लाइसेंस जारी किए गए

रिपोर्टर वहाबअली सैय्यद चंद्रपूर महाराष्ट्र
चंद्रपुर जिले से शराबबंदी हटने के बाद धड़ल्ले से नये बियर बार के लाइसेंस जारी किए गए, जिससे शराब प्रेमियों को अब आसानी से शराब मिलने लगी है। 100-200 रुपयों की दारू पीकर वाहन चलाने वालों से पुलिस द्वारा 10 हजार रुपयों का ऑनलाइन जुर्माना ठोका जा रहा है, जिससे शराब सेवन करने वालों का नशा तुरंत उतर रहा है। शराब पीकर वाहन चलाने वालों को 10 हजार रुपये का जुर्माना तथा साथ ही छह माह से लेकर एक साल तक के कारावास का प्रावधान और वाहन भी जब्त कर लिए जाने की बात नये नियम के तहत है। वैसे अब तक शराब पीकर वाहन चलाने पर 2 हजार रुपये जुर्माना और छह माह सजा का नियम लागू था। दुर्घटनाओं को रोकने सरकार अब नये नियम लागू करने जा रही है। नये विधेयक के अनुसार जुमनि की राशि पांच गुना और सजा को करीब दोगुना कर दिया गया है। पुलिस वालों द्वारा नये नियम के तहत जुर्माना भी ठोका जाने लगा है। महामार्ग पर बढ़ती दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सरकार ने नई नीति लाई है। इसके अनुसार, शराब के नशे में वाहन चलाने पर ऑनलाइन पद्धति से 10 हजार रुपयों का जुर्माना वसूला जाएगा। पहले भी शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई सुरू थी. नये नियम के अनुसार जुर्माना की राशि व सजा की अवधि भी बढ़ा दी गई है। इस नये कानून का खौफ जहां शराब शौकीनों में देखा जा रहा है,वहीं पुलिस विभाग का भी तनाव बढ़ गया है। अधिकृत लाइसेंस धारक शराब विक्रेता व बियरबार संचालकों के सामने यह सवाल पैदा हो गया है कि ऐसी कार्रवाई के चलते उनका धंधा कैसे चलेगा? वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा कार्रवाई किए जाने का सिलसिला शुरू है।शहर के मुख्य मार्ग के समीप स्थित बियरआर के परिसर में ही इस तरह की कारवाई की जा रही है. मुंह में मशीन लगाकर अल्कोहल की जांच की जा रही है। पुलिस की इस कार्रवाई से बचने के लिए अब लोग शराब पीने के लिए बियरबार में आने से कतराने लगे हैं। पुलिस कर्मचारियों पर तनाव ड्रंकन ड्राइव की कार्रवाई के आदेश वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा दिए जाने के बाद प्राय: हर दिन पुलिस कर्मचारियों को कार्रवाई करना पड़ रहा है। आठ घंटे की ड्यूटी करने के बाद आरोपी को लेकर न्यायालय में उन्हें हाजिर होना पड़ता है। वहां 3-4 घंटे का समय जाता है। उसके बाद शाम को पुनः अपनी ड्यूटी पर तैनात होना होता है। ऐसी परिस्थिति में पुलिस कर्मियों में मानसिक तनाव बढ़ रहा है। वहीं, दूसरी ओर शराब बिक्री से हर माह सरकार को करोड़ों रुपयों का राजस्व प्राप्त होता है। आबकारी विभाग द्वारा राजस्व वृद्धि के निर्देश समय-समय पर कर्मचारियों को दिए जाते हैं,लेकिन देखा गया है कि कार्रवाई प्रायः ग्रामस्तर पर ही होती है, जिससे मिलने वाले राजस्व में कमी होती है।आबकारी विभाग और पुलिस विभाग में आपसी तालमेल का न होना भी एक प्रमुख कारण है, जिससे सरकार को मिलने वाले राजस्व में कमी आती है।


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