कांकेर छत्तीसगढ़ जलेगा बस्तर तो राजनीतिक दलों पर होगा असर
आदिवासियों का धर्म परिवर्तन करने का प्रयास किया जा रहा है,

रिपोर्टर डॉ रमाशंकर श्रीवास्तव कांकेर छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर संभाग का अंतिम जिला सुकमा यहां के लोकप्रिय और जनहित के बारे में चिंतन करने वाले पुलिस अधीक्षक ने 12 जुलाई 2021 को जिले के समस्त अनुविभागीय अधिकारी, पुलिस थाना प्रभारी और अन्य को लिखित पत्र भेज कर, उन्हें सतर्क रहने के लिए कहा था कि आदिवासियों का धर्म परिवर्तन करने का प्रयास किया जा रहा है, इस पर सख्त निगरानी रखें, किसी के साथ अहित ना हो, नहीं तो भविष्य में बस्तर संभाग और सुकमा जिले में आदिवासियों के बीच धर्म परिवर्तन कर चुके आदिवासियों के बीच, वर्ग संघर्ष बढ़ सकता है, जो चिंता का विषय है।

गोपनीय पत्र सार्वजनिक हुआ
हालांकि यह पत्र गोपनीय था, लेकिन अति विश्वसनीय सूत्र यह बता रहे हैं कि कार्यालय के ही एक विशेष समुदाय के कर्मचारी ने इसे वायरल कर दिया, इसकी हम पुष्टि नहीं कर रहे हैं, यह वाकया् सुकमा जिला मुख्यालय में चर्चा में है, उसी आधार पर हम कह रहे हैं। आज बस्तर संभाग का कोंडागांव और नारायणपुर जिला लगभग जल रहा है, पिछले 3-4 महीनों से दोनों जिले में मूल आदिवासियों और धर्म परिवर्तन कर चुके आदिवासियों के बीच वर्ग संघर्ष चल रहा था, गांव-गांव में तनाव था, इसकी सूचना दोनों जिलों के खुफिया तंत्र ने भी प्रशासन को दी थी।

शिकायतों पर कार्यवाही नहीं
ऐसा बताया जाता है कुछ मामलों में पुलिस थानों में शिकायत भी हुई थी, लेकिन कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई उसी का नतीजा है कि 01 जनवरी 2023 को कोंडागांव जिला में एएसआई के साथ मारपीट की घटना हो गई और 2 जनवरी 2023 को नारायणपुर जिला मुख्यालय में बड़ी घटना हो गई और चर्च में तोड़फोड़ कर दिया गया। बल्कि पुलिस अधीक्षक के सर पर चोट भी आई, जो निंदनीय है। कानून अपने हाथ में कभी नहीं लेना चाहिए, हम इसकी निंदा करते हैं, इस मामले को लेकर नारायणपुर पुलिस प्रशासन ने नारायणपुर जिला भाजपा के अध्यक्ष रूपसाय सलाम सहित चार लोगों को विभिन्न धाराओं में गिरफ्तार भी कर लिया है, इसी से मामला इतिश्री हो जाएगा और शांति व्यवस्था हो जाएगी, यह ऊपरी तौर पर तो जरूर नजर आएगी, लेकिन लगभग बस्तर संभाग और उपरोक्त दोनों जिलों में चिंगारी लग चुकी है, यह कब आग का रूप लेगी इसके लिए राजनीति से ऊपर उठकर शासन और प्रशासन के साथ ही ईमानदारी से कांग्रेस और भाजपा के नेताओं को चिंतन मनन और मंथन करना होगा। इसी के साथ विभिन्न धार्मिक संगठन के लोगों को भी संयम बरतना होगा…

स्थानीय आदिवासी भय के वातावरण में
3 जनवरी को उपरोक्त दोनों जिलों में बहुत गोपनीय तरीके से जाकर लोगों से चर्चा करने के बाद जो निचोड़ निकल कर बाहर आ रहा है, उससे तो प्रतीत होता है कि जिले के निवासियों में भय का वातावरण है, आखिर धर्म परिवर्तन के लिए लोग प्रेरित क्यों करते हैं, अगर उन्हें अपने धर्म का प्रचार करना है तो भारतीय संविधान में उन्हें अधिकार दिया गया है, लेकिन किसी को लालच देकर किसी के गरीबी का फायदा उठाकर, किसी को इलाज के नाम पर, किसी को शिक्षा के नाम पर और किसी को आर्थिक मदद पहुंचाने के नाम पर उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित नहीं करना चाहिए, नहीं तो बस्तर जल उठेगा।
आखिर बस्तर में नक्सलवाद बढ़ी कैसे और इसमें आग में घी का काम कर रहा है, धर्म परिवर्तन के मामले।
खुल्लम खुल्ला भ्रष्टाचार
यह कटु सत्य है कि बस्तर संभाग के 7 जिलों के लिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार से देश आजाद होने के बाद अरबों रुपए विभिन्न योजनाओं के नाम पर स्वीकृत किए कि बस्तर संभाग का सर्वांगीण विकास हो सके, बस्तर के आदिवासियों का विकास हो सके, बस्तर वासियों का विकास हो सके, लेकिन लगभग बस्तर संभाग के 7 जिलों में भ्रष्टाचार सर चढ़कर बोल रहा है, चाहे भाजपा की सरकार रही हो या फिर वर्तमान में कांग्रेस की सरकार, दोनों पार्टी के नेता और जनप्रतिनिधि इसे नियंत्रित करने में असफल रहे, बस्तर में बहुत सारे ईमानदार अधिकारी भी पदस्थ रहे और आज हैं और वे ईमानदारी से काम भी कर रहे हैं, लेकिन इनकी संख्या बहुत कम है, भ्रष्टाचार को संरक्षण देने वाले लोगों की संख्या ज्यादा है। करोड़ों अरबों रुपए का बंदरबांट हो चुका है, यह हम नहीं कह रहे हैं बस्तर संभाग के 7 जिलों के प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भ्रष्टाचार के प्रमाणित मामले सुर्खियां बटोर रहे हैं, यह भी कटु सत्य है कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया बस्तर संभाग की घटनाओं को रायपुर में स्थान नहीं देती, इसलिए ज्यादातर मामले सरकार के कानों और नवा रायपुर के मंत्रालय में बैठे अधिकारियों के मैले कानों तक पहुँच नहीं पा रहा है, आज बस्तर हेतु जारी राशि नवा रायपुर स्थित मंत्रालय से निकलते हुए बस्तर संभाग के 7 जिलों में पहुंचती है, क्या भ्रष्टाचार की गंगा यहीं से बहना प्रारंभ हो जाती है, ऐसा आपसी चर्चा में बस्तर के अधिकारियों ने ही स्वीकार किया कि कहीं ना कहीं गड़बड़ी है! तो इस पर नियंत्रण कौन करेगा?
बस्तर का भविष्य अंधकारमय
लोगों ने तो आपसी चर्चा में बताया कि वह समय दूर नहीं , जिसे हम नहीं देख पाएंगे क्योंकि शायद हम जीवित नहीं रहेंगे, लेकिन बस्तर संभाग में आने वाले 30 से 40 वर्ष के बाद आदिवासी जो मूल निवासी है, वह मूलनिवासी तो कहलाएंगे, लेकिन लगभग 90% लोगों का धर्म परिवर्तन हो जाएगा और बस्तर संभाग की स्थिति पूर्वोत्तर राज्यों की तरह हो जाएगी, यह काफी गंभीर बात है बस्तर के वो बुद्धिजीवी जो यह सब दर्पण के बराबर सामने देख रहे हैं और चिंतित भी हैं, अब छत्तीसगढ़ सरकार और केंद्र सरकार एवं नवा रायपुर में मंत्रालय में एसी कमरे में बैठने वाले आईएएस अधिकारियों और पुलिस मुख्यालय में बैठने वाले आईपीएस अधिकारियों एवं अरण्य भवन में बैठने वाले आईएफएस अधिकारियों को ईमानदारी से इस पर चिंतन मनन और मंथन करना होगा कि आखिर छत्तीसगढ़ शांत कैसे रहे और उसमें बस्तर का भरपूर योगदान हो, अगर बस्तर संभाग जलेगा तो आज रायपुर पर भी आंच आएगी और मंत्रालय पुलिस मुख्यालय और अरण्य भवन को भी अपनी चपेट में लेगी।
राजनीतिज्ञ संभल जायें
समय रहते राजनीतिक दांवपेच से ऊपर उठकर छत्तीसगढ़ के हित में, बस्तर संभाग के हित में कांग्रेस और भाजपा को एक छत के नीचे बैठकर इसका समाधान निकालना होगा। नहीं तो आंच उनके कार्यालय में भी आएगी, चाहे वह जिला कार्यालय हो चाहे वह प्रदेश कार्यालय हो, समय रहते सभी को इस पर मंथन करना ही होगा

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