Madhya Pradesh News पूरे भारत में प्रचलित होता जा रहा है मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में ग्राम गढ़ा गांव में बालाजी मंदिर बागेश्वर धाम

रिपोर्टर पवन रैकवार छतरपुर मध्य प्रदेश
बालाजी मंदिर में ही दादा गुरु भगवान दास गर्ग की समा धि है। बताया जाता है पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के दादा गुरु भी हर मंगलवार और शनिवार को दिव्य दरबार लगाते थे। धीरेंद्र शास्त्री नौ वर्ष की उम्र से दादा गुरु के साथ मंदिर में जाते थे। वे उन्हें ही अपना गुरु संन्यासी बाबा कहते हैं। बागेश्वर धाम में जो लोग बालाजी महाराज के समक्ष अर्जी लगाते हैं, वे ओम बागेश्वराय नमः मंत्र का जाप कर नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर बांधते हैं और दिव्य दरबार के लिए टोकन लेते हैं। गढ़ा गांव में स्थित भगवान शंकर के प्राचीन मंदिर में भगवान शिव का ज्योर्तिलिंग है, जिसे बागेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता है। वर्ष 2016 में गांव के लोगों के सहयोग से यहां यज्ञ का आयोजन किया गया। इसी यज्ञ में यहां बालाजी महाराज की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के साथ स्थापना की गई। इसके बाद से ही यह स्थान बागेश्वर धाम कहलाया। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का जन्म ग्राम गढ़ा में ही 1996 में जन्म हुआ। परिवार में मां सरोज देवी, पिता रामकृपाल गर्ग के अलावा भाई सालिगराम गर्ग उर्फ सौरभ और बहन रीता गर्ग हैं। आठवीं तक की पढ़ाई गांव में की है। 12वीं की पढ़ाई गंज से पूरी की। धीरेंद्र शास्त्री के दादा और गुरु भगवान दास गर्ग चित्रकूट के निर्मोही अखाड़े से भी जुड़े रहे। पिता रामकृपाल गर्ग पंडिताई करते थे। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री परिवार को सहारा देने गांव में कथा सुनाने लगे। पहली भागवत कथा वर्ष 2009 में गढ़ा गांव के पास पहरा के खुडन में सुनाई थी। अज्ञातवास में जाने का आदेश उनके अनुसार उन्हें तीन बार स्वप्न आया। उसमें अज्ञातवास में जाने का आदेश हुआ। आदेश का पालन कर अज्ञातवास गए। लौटे तो लोगों के मन की बात बताने लगे। हालांकि चाचा-ताऊ का परिवार बड़ा होने के कारण विरासत में हुई शक्ति पर आधिपत्य को लेकर परिवार में भीतर से भी आरोप-प्रत्यारोप ल लगते रहे हैं। बागेश्वर धाम की प्रसिद्धि के साथ जब यहां हजारों लोग का नियमित डेरा लगने लगा तो आसपास आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ गईं।

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