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Madhya Pradesh News वैशाखी बड़ी पूनम मे देवताओं की गई पूजन

रिपोर्टर दौलत पाटीदार रतलाम मध्यप्रदेश

वैशाखी पूनम के दो-तीन दिन पहले से ही भेरुजी की स्थापना एवं यज्ञ आदि के धार्मिक आयोजन क्षेत्र में सभी दूर देखने को मिले हैं जिलों में यह उत्सव और भैरव पूजन पूनम का कार्यक्रम मनाया गया भेरू जी के मंदिर का कई स्थानों पर जीर्णोद्धार पर मूर्ति स्थापना का आयोजन भी किया गया कई स्थानों पर पंच कुंडी यज्ञ अभिषेक के साथ किया गया है इस कार्यक्रम में गुरुवार शाम को मंदिर पर रातीजोगा रख कर हवन पूजन रात भर किया गया। के बाद शुक्रवार सुबह मूर्ति की स्थापना हेतु मूर्ति का हवन यज्ञ करके साथ में किए जा रहे हैं इसमें रतलाम धार उज्जैन झाबुआ के जिलों में अपने-अपने कुल देव भेरुजी धुजार जी सती माता का पूजन पाठ किया गया जिसके साथ कई लोग में हर्षोल्लास एवं सनातन धर्म के प्रति लोगों की धारणा जागृत हुई है। भगवान भैरव को भगवान शिव का ही एक रूप माना गया है उनकी पूजा-अर्चना का विशेष महत्व माना जाता है हिंदू धर्म में ऐसी मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ के रौद्र रूप भैरव बाबा की पूजा आराधना करने से व्यक्ति भय से मुक्त मुक्ति पा लेता है वह सारे संकटों को दूर हो जाते हैं भैरव बाबा को प्रसन्न करना काफी आसान है भैरव का अर्थ होता है वह का हरण कर जगत के भरण करने वाला ऐसा ही कहा जाता है कि भैरव शब्द के तीन अक्षरों को मैं ब्रह्मा विष्णु और महेश तीनों की शक्ति समाहित हैं भैरव शिव के गुण और पार्वती की अनुचर माने जाते हैं हिंदू देवताओं में भैरव का बहुत ही महत्व है इन्हें काशी का कोतवाल भी कहा जाता है काल भैरव यह भगवान का साहसिक युवा रूप है उक्त रूप की आराधना से शत्रु मुक्ति संकट कोर्ट कचहरी के मुकदमे में विजय प्राप्ति होती हैं व्यक्ति में साहस का संचार होता है सभी तरह के भय से मुक्ति मिलती हैं काल भैरव को शंकर का रूद्र अवतार माना गया है एकमात्र भैरव की आराधना से ही शनि का प्रकोप शांत होता है आराधना का दिन तिथि पूनम तथा गुरुवार रविवार और मंगलवार नियुक्त किए हैं पुराण के अनुसार महाभाद्र महा को भैरव पूजा के लिए अति उत्तम माना गया है उक्त महा में रविवार का बड़ा महत्त्व मानते हुए व्रत रखते हैं आराधना से पूर्व जान ले कि कुत्ते को भी भूखा नहीं बल्कि उसे भरपेट भोजन कराएं जुआ सट्टा शराब व्यास कोरी अनैतिक कृत्य आदि आदतों से दूर रहें नियत साफ रखें पवित्र होकर सात्विक अ पवित्रता वर्जित हैं लोग भैरव बाबा को मामा भैरव नाना भैरव आदि नामों से जाना जाता है कई समाज के यह कुलदेवता हैं और इन्हें पूजने का प्रचलन भी भिन्न-भिन्न है जो कि विधिवत होकर स्थानीय परंपरा का हिस्सा है यह उल्लेखनीय है कि भगवान भैरव, धुजार, कालका माता किसी किसी के शरीर में अंश आता है हाथ में तलवार खप्पर लोहे की जंजीर लेकर अपना रौद्र प्रकट करते हैं। इसके पश्चात कई लोगों ने भैरव मन्दिर स्थान पर भोजन का कार्यक्रम भी रखा गया है रतलाम जिला एवं आसपास के जिलों में कई स्थानों पर भेरू पूजनीय पूनम का आयोजन रखा गया जिसके अंतर्गत कई स्थान पर गरबा रास एवं जुलूस गंगा जल यात्रा भी निकाली गई प्रतेक सभी अन्य गांव में हर एक समाज मे यह उत्साह देखने को मिला है आगामी पूनम के लिए लाखों रुपए की हवन यज्ञ में बैठने की बोलियां लगाई गई। पूर्णिमा पर बृहस्पतिवार को भैरव धाम पर हजारों लोगों ने पवित्र सरोवर में स्नान किया। बाबा भैरवनाथ अपने दरबार में आने वाले हर भक्त की मुराद पूरी करते हैं। बृहस्पतिवार को पूर्णिमा पर हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा भैरव दरबार में मत्था टेका। बाबा के चरणों में काली मिर्च की बोरियां, फूल-पताशा, माला और नारियल अर्पित कर संकटों से मुक्ति व परिवार की खुशहाली के लिए मन्नते मांगते हैं।

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