भानुप्रतापदेव महाविद्यालय में स्वयं सेवकों ने नाटक ‘‘चीख’’ की जबरदस्त प्रस्तुति दी
नाटक चीख द्वारा महिलाओं पर होने वाले अत्याचार एवं शोषण को दर्शाया गया है।

✍️डॉ.रमाशंकर श्रीवास्तव रिपोर्टर छत्तीसगढ़ कांकेर
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सरला आत्राम के मार्गदर्शन एवं निर्देश्न में मनोविज्ञान विभाग एवं महिला उत्पीड़न निवारण समिति के संयुक्त तत्वाधान में राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयं सेवकों द्वारा इंदरू केवट कन्या महाविद्यालय के प्रागंण में नाटक ‘चीख’ का नाट्य मंचन किया गया। मनोविज्ञान विभाग के अतिथि सहायक प्राध्यापक देवेन्द्र कुमार इस नाटक के निर्देशक एवं लेखक हैं तथा विभागाध्यक्ष अलका केरकेट्टा ने इस नाटक में भूमिका निर्धारण एवं संवाद संपादन में अपना सहयोग दिया है। रसायनशास्त्र के अतिथि सहा. प्राध्यापक दीपक निषाद ने स्क्रीन डारेक्टर के रूप में अपना सहयोग दिया है। नाटक चीख द्वारा महिलाओं पर होने वाले अत्याचार एवं शोषण को दर्शाया गया है।
चीख नाट्क के जरिये महिलाओं पर पंूजीवाद का प्रहार दिखाया गया। इसमें ऐसे गांव की कहानी रहती है जहां बाहुबलियों द्वारा महिलाओं का शोषण आम बात होता है डर के कारण कोई विरोध नहीं करता। इस नाटक ने सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी। आम आदमी की जिंदगी पर फोकस करते हुए वर्तमान परिस्थितियों को रेखांकित किया गया। किस तरह महिलाएं आज बलात्कारी दरिदों के साये में जीने विवश हैं। कानून व्यवस्था की धज्जियॉ उडाते असमाजिक तत्वों के बीच महिलाओं की पीड़ा को इस नाटक के माध्यम से दिखाया गया। इसमें एक विधवा महिला के दर्द को दिखलाया गया जहा महिला कि मजबूरी का फायदा हर कोई उठाता है और आखिर में वह मौत को गले लगा लेती है अभिनय को देख कर मौजूद लोगों के रोंगटे खडे़ हो गये और आंखे नम हो गई। नाटक चीख में उत्तम कुमार, संदीप साहू, आशा वट्टी, हर्षलता साहू, टिकेश्वरी साहू, गुलशन जैन, मिनाक्षी साहू, करिश्मा सिन्हा ने दिये गये भूमिका की जोरदार प्रस्तुति दी। संगतकार में त्रिलोचन निषाद ने बांसूरी वादन एवं कौशल यादव ने डफली वादन से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बैकग्राउण्ड मज्यूजिक भी लोगों को अपनी ओर आकषित करने में पीछे नहीं रहा। तालियों के गड़गडहाट की बीच नाटक चीख की प्रस्तुति बहुत ही जबरदस्त लगी। सभी कलाकारों की प्रस्तुति भाव भगिमा, डायलौक डिलिवरी बहुत ही जीवन्त लगा। नाटय मंचन के बाद वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. अर्चना सिंह के कहा कि महिला को स्वयं ही हर दृष्टिकोण से मजबूत बनना है। किसी से मदद की उम्मीद नही करना है। साथ ही अपने को शिक्षित करना है शिक्षा एक बहुत ही शक्तिशाली हथियार है जिससे हम पूरे मानव जाति को बदल सकते हैं। और तीसरी चीज समय के साथ आगे बढ़ना बताया ये तीन चीज होने पर किसी की हिम्मत नहीं है, कि आपकों गलत बोल सकें या आपका शोषण कर सकें। नारी उत्पीड़न निवारण समिति के संयोजक डॉ. बसंत नाग, ने कहा कि नारी आपने आप को कमजोर न समझे, बल्कि अपनी नारी शक्ति को पहचाने। शिक्षित होकर आत्मनिर्भर बने, कानून की जानकारी रखें, आत्महत्या जैसे कदम न उठाये। दोनों महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ.व्ही.के.रामटेके और बी. समूंद ने भी नाटक ‘‘चीख’’ की टीम को उनके प्रस्तुति हेतु बधाई प्रेषित करते हुए सभी पात्रों की प्रशंसा की। इस नाट्य मंचन में दोनो महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापकगण एवं भारी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहें। समस्त जानकारी भानुप्रतापदेव कालेज की प्रो. अलका केरकेटटा कार्यक्रम अधिकारी रासेयो द्वारा दिया गया।
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