Madhya Pradesh News दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा6 अप्रैल से 12 अप्रैल तक दोपहर 1 बजे से सायं 4 चार बजे तक

रिपोटर सोनू यादव भिंड ग्वालियर मध्य प्रदेश
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा6 अप्रैल से 12 अप्रैल तक दोपहर 1 बजे से सायं 4 चार बजे तक छविराम पैलेस, गणेशपुरा चौराहा, बडागांव हाईवे, मुरार, ग्वालियर में ‘श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ’ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी (संस्थापक एवं संचालक, डीजेजेएस) की शिष्या भागवताचार्या महामनस्विनी साध्वी मेरुदेवा भारती ने जी षष्टम दिवस में ”कंस वध ”के प्रसंग को भक्त श्रद्धालु गणों के समक्ष रखते हुए उसके वास्तविक रहस्य को उजागर करते हुए कहा कि कंस का वध तभी संभव हो पाया जब मथुरा नगरी के भीतर भगवान् श्री कृष्ण का पदार्पण हुआ l क्योंकि कंस पाप,अधर्म और बुराई का प्रतीक था इसलिए श्री कृष्ण जी को मथुरा नगरी जाना आवश्यक था l ठीक इसी तरह आज समाज के भीतर भी पाप बढ़ता जा रहा है , भ्रष्टाचार बढ़ता ही जा रहा है और पाप का मूल मन है, कंस भी मन का ही प्रतीक है l प्रत्येक मनुष्य मन के अधीन होकर ही पाप कि ओर बढ़ता है और अपने जीवन का पतन कर बैठता है और आज इस पाप , भ्रष्टाचार को रोकने के लिए बाहर से बहुत प्रयत्न किया जा रहा है परन्तु कानून की मोटी जंजीरें भी इस पाप को नियंत्रित नहीं कर पा रहीं l इसलिए आवश्यकता है मानव के मन को बदलने की इसलिए संतों ने कहा – कबीर मन मैला भया, जाने बहुत विकार यह मन कैसे धोईये, साधो करो विचार
अर्थात इस मन को पवित्र करना होगा तभी पाप अधर्म भी समाप्त हो सकता है इस मन को सही दिशा दिखानी होगी तभी इसकी दशा सुधर सकती है आगे साध्वी जी ने समझते हुए कहा कि प्रभु का प्रगटीकरण भी इसी मन में धर्म की स्थापना करने के लिए हर युग में होता है तभी बाहर से भी धर्म की स्थापना हो पाती है जैसे भगवन श्री कृष्ण जी ने पहले अर्जुन को ब्रह्मज्ञान प्रदान किया जिससे अर्जुन अपने भीतर के निम्न विचारों और विकारों से जीत पाया जो उसे धर्म की स्थापना के लिए आगे नहीं बढ़ने दे रहे थे l और तत्पश्चात अर्जुन बाहर से भी युद्ध जीत पाया था l ठीक इसी तरह आज भी समाज के प्रत्येक मनुष्य को एक पूर्ण गुरु की आवश्यकता है जो ईश्वर का साक्षात्कार करा सके उन्हें दिखा सके, उनके दर्शन करा सके और इस मन को सही दिशा प्रदान कर सके l जैसे महात्मा बुद्ध जी ने अंगुली माल डाकू को की, आगे चल कर वही डाकू एक संत बन गया और आज गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी की कृपा से तिहाड़ जेल के भीतर अनेकों ही कैदी सत्संग को श्रवण कर उस महान ब्रह्मज्ञान को प्राप्त कर आपने जीवन को संवार रहे है वह सुधर कर आज एक समाज सुधारक बन गए हैं क्योंकि वासनाओं और विकारों की अग्नि में झुलसे इस मन को यदि कोई शांत कर सकता तो वह मात्र ब्रह्मज्ञान की शीतल फुहारें ही इस मलीन मन को पवित्र व निर्मल कर सकती हैं इसलिए आवश्यकता है एक पूर्ण ब्रह्मनिष्ठ गुरु की शरण में जाने की तभी मन रूपी कंस का वध वास्तव में हो सकता है l

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