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Jharkhand New छाताबाद काजू बगान में फिर फटी जमीन, तालाब देखते-देखते हुआ खाली; दहशत में हजारों लोग

एक ही इलाके में बार-बार गोफ बनने से बढ़ी चिंता, बीसीसीएल की भराई के बाद फिर जमीन धंसी

ब्यूरो चीफ मिथिलेश पांडे धनबाद झारखण्ड

कतरास। कतरास थाना क्षेत्र के छाताबाद काजू बगान में शनिवार को एक बार फिर जमीन में गोफ बनने से लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते तालाब का पानी गोफ के रास्ते जमीन के भीतर समाने लगा। घटना की सूचना फैलते ही आसपास के लोगों की भीड़ जुट गई। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से इलाके में रहने वाले हजारों लोगों के बीच भय का माहौल है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, इसी इलाके में कुछ दिन पहले भी जमीन धंसने से गोफ बन गया था। उस समय तालाब का पानी पूरी तरह जमीन के अंदर चला गया था। घटना के बाद बीसीसीएल की ओर से गोफ की भराई कराई गई थी। लोगों को उम्मीद थी कि स्थिति सामान्य हो जाएगी, लेकिन शनिवार को उसी क्षेत्र में दोबारा गोफ बनने से चिंता और बढ़ गई है।

नए गोफ में तालाब का पानी लगातार तेजी से समा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि घटनास्थल के आसपास बड़ी आबादी रहती है। ऐसे में यदि भू-धंसान का दायरा बढ़ा तो जान-माल के नुकसान की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। लोगों ने बीसीसीएल और संबंधित विभाग के अधिकारियों से तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति की जांच कराने की मांग की है।

👉पहले भी हो चुकी हैं कई घटनाएं

स्थानीय लोगों ने बताया कि छाताबाद क्षेत्र में भू-धंसान की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। 7 जुलाई और 7 अगस्त को भी इलाके के दूसरे छोर पर भू-धंसान की घटनाएं हुई थीं। इन घटनाओं में करीब दो दर्जन घरों के क्षतिग्रस्त होने की बात कही गई थी। इसके बाद बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

👉तकनीकी सर्वे और स्थायी समाधान की मांग

बार-बार जमीन में गोफ बनने और भू-धंसान की घटनाओं ने छाताबाद की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल गोफ की भराई कर देने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। पूरे क्षेत्र का तकनीकी सर्वेक्षण कराकर जमीन के नीचे की वास्तविक स्थिति और संभावित खतरे का आकलन किया जाना चाहिए।

ग्रामीणों ने मांग की है कि संवेदनशील स्थानों को चिह्नित कर वहां तत्काल सुरक्षा व्यवस्था की जाए तथा प्रभावित परिवारों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए। लोगों का कहना है कि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में यह छोटी घटना किसी बड़े हादसे का रूप ले सकती है।

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