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Bhopalअपराध

नकली न्यूजपेपर कटिंग बनाना व फैलाना सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम एवं भारतीय न्याय संहिता अंतर्गत गंभीर अपराध

रिपोर्टर देवेन्द्र कुमार जैन भोपाल मध्यप्रदेश

आजकल सोशल मीडिया पर देखने में आ रहा है की कंप्यूटर संसाधन व मोबाइल एप का उपयोग करके नकली न्यूजपेपर कटिंग बनाना और उसे फैलाना आम बात हो गई है। लेकिन लोग इससे अंजान हैं की सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम IT Act और भारतीय न्याय संहिता BNS के तहत एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। सोशल मीडिया या डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भ्रम फैलाने या किसी को धोखा देने के लिए ऐसी फर्जी इमेज बनाना गैर-कानूनी है।इसके तहत कई गंभीर धाराएँ लग सकती हैं। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम IT Act, 2000धारा 66D कंप्यूटर संसाधन का उपयोग करके प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी यदि आप किसी प्रतिष्ठित समाचार पत्र के नाम या लोगो का गलत इस्तेमाल करके या स्वयं गलत जानकारी के आधार पर नकली कटिंग बनाते हैं, तो यह प्रतिरूपण किसी और का रूप धरकर धोखाधड़ी करने के अंतर्गत आता है। इसके लिए 3 साल तक की जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।धारा 66C पहचान की चोरी यदि किसी समाचार पत्र के आधिकारिक लोगो या नाम का अनधिकृत उपयोग करने पर यह धारा लग सकती है।भारतीय न्याय संहिता, 2023 BNS पहले IPC था 1 जुलाई 2024 से IPC की जगह BNS लागू हो चुका है।धारा 336 और 340 जालसाजी नकली दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड बनाने के आरोप में यह धारा लगती है। इसके तहत 2 साल से लेकर 7 साल तक की जेल का प्रावधान है।धारा 318 धोखाधड़ी अगर उस नकली कटिंग का उद्देश्य किसी को आर्थिक नुकसान पहुँचाना या धोखा देना है।धारा 353 अफवाह या झूठी खबर फैलाना यदि उस नकली न्यूजपेपर कटिंग से समाज में शांति भंग होने, दंगा भड़कने या सार्वजनिक व्यवधान पैदा होने का खतरा हो, तो इस धारा के तहत 3 साल तक की जेल हो सकती है।धारा 356 मानहानि यदि उस नकली खबर से किसी व्यक्ति, कंपनी या संस्था की छवि खराब होती है, तो मानहानि का मुकदमा भी चलाया जा सकता है। एक बात और यदि किसी काल्पनिक नाम का उपयोग करके नकली अखबार की कटिंग बनाना और उसे प्रसारित करना भी भारतीय कानून के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। भले ही आपने किसी जीवित व्यक्ति का नाम न लेकर किसी काल्पनिक नाम का उपयोग किया हो, लेकिन यदि उस कटिंग का उद्देश्य समाज में भ्रम फैलाना, किसी को डराना धोखाधड़ी और जालसाजी माना जाएगा। भारतीय न्याय संहिता BNS, 2023 की धारा 336 अथवा पुरानी IPC की धारा 464/465 किसी भी दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को फर्जी तरीके से तैयार करना अपराध है। इसके लिए 2 वर्ष तक की जेल या जुर्माना हो सकता है। भ्रामक जानकारी और अफवाह फैलाना अगर उस अखबार की कटिंग में ऐसी कोई खबर लिखी है जिससे समाज में डर, अंधविश्वास, या अशांति फैल सकती है, तो इसे गंभीर अपराध माना जाता है।BNS की धारा 353 अथवा पुरानी IPC की धारा 505 सार्वजनिक शांति को भंग करने वाली या समाज में डर पैदा करने वाली झूठी अफवाहें या भ्रामक खबरें फैलाना अपराध है। इसके तहत 3 से 5 साल तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है। साइबर अपराध यदि इस नकली अखबार की कटिंग को कंप्यूटर,मोबाइल या फोटोशॉप जैसे या अन्य डिजिटल टूल्स से बनाया गया है और इसे सोशल मीडिया व्हाट्सएप,फेसबुक, आदि पर शेयर किया गया है तो यह सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम IT Act 2000 की धाराओं के तहत डिजिटल माध्यम से धोखाधड़ी या भ्रामक सामग्री फैलाने पर कार्रवाई की जा सकती है। मानहानि यदि उस कटिंग में काल्पनिक के नाम के बहाने अप्रत्यक्ष रूप से किसी असली व्यक्ति, परिवार, या संस्था पर निशाना साधा गया है या उनकी छवि खराब करने की कोशिश की गई है:BNS की धारा 356 (पुरानी IPC की धारा 499/500 मानहानि के मामले में 2 वर्ष तक की जेल की सजा हो सकती है। निष्कर्ष अगर आप इसे सिर्फ अपने मनोरंजन के लिए एक मजाक के रूप में भी कर रहे हैं, तब भी बिना अनुमति किसी अखबार के नाम का इस्तेमाल करना और भ्रामक जानकारी सार्वजनिक करना आपको बड़ी मुसीबत में डाल सकता है। संक्षेप में डिजिटल माध्यम से फर्जी खबरें बनाना और उन्हें फॉरवर्ड करना आपको बड़ी कानूनी मुसीबत में डाल सकता है। इसमें जेल और जुर्माना दोनों का प्रावधान है। इसलिए ऐसा करने से पूरी तरह बचना चाहिए।

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