Uttar Pradesh News : वाराणसी काशी से पोषण का संकल्प, आंगनबाड़ी से बढ़ेगा स्वस्थ भारत राष्ट्रीय पोषण माह का माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी ने शुभारंभ किया ‘आंगनबाड़ी हमारी जिम्मेदारी’ बना इस साल का मंत्र

ब्यूरो चीफ निखिलेश कुमार मिश्रा वाराणसी उत्तर प्रदेश
वाराणसी काशी गर्भ से दो वर्ष तक की उम्र को बताया जीवन की सबसे निर्णायक अवधि, पोषण के साथ स्वस्थ खानपान, स्वच्छता, खेल और मानसिक विकास पर जोर वाराणसी। देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी से बुधवार को देश ने स्वस्थ और सुपोषित भारत का नया संकल्प लिया। राष्ट्रीय पोषण माह-2026 के शुभारंभ अवसर पर केंद्र और प्रदेश सरकार के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि पोषण सिर्फ थाली में प्रोटीन पहुंचाने तक सीमित नहीं, बल्कि बच्चे के शारीरिक, मानसिक और समग्र विकास की बुनियाद है। इस वर्ष की थीम ‘आंगनबाड़ी हमारी जिम्मेदारी’ को जनभागीदारी से अभियान बनाने पर जोर दिया गया। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा कि केवल आंकड़े लक्ष्य की कहानी नहीं कहते, बल्कि योजनाओं की गुणवत्ता और उनका बच्चों के जीवन पर पड़ने वाला प्रभाव अधिक महत्वपूर्ण है।
सरकार अब प्रोटीन के साथ स्वस्थ वसा, विटामिन, विविध पोषक तत्व और संतुलित आहार पर भी विशेष ध्यान दे रही है। पोषण अभियान को तकनीक से जोड़कर सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। आंगनबाड़ी सिर्फ केंद्र नहीं, परिवार और सरकार के बीच भरोसे की कड़ी
कार्यक्रम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को अभियान की ‘फ्रंटलाइन सोल्जर’ बताते हुए उनके योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता केवल सरकारी योजनाओं को घर तक पहुंचाने वाली कर्मी नहीं हैं, बल्कि गर्भवती महिला, बच्चे और परिवार के बीच पोषण एवं स्वास्थ्य की पहली भरोसेमंद कड़ी हैं। होम विजिट के दौरान गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों को संतुलित आहार, स्वच्छता और आने वाले बच्चे के पोषण से जुड़े जरूरी संदेश देने पर जोर दिया गया। केंद्रों पर बच्चों को खेल-खेल में सीखने, पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने और उनके शारीरिक-मानसिक विकास को गति देने के प्रयासों को भी सामने रखा गया।

‘घर जैसा भोजन, मगर पोषण से भरपूर’
कार्यक्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों के आंगनबाड़ी केंद्रों के नवाचारों की झलक भी दिखाई गई। तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश के केंद्रों में स्थानीय और आसानी से उपलब्ध सामग्री से तैयार पौष्टिक व्यंजनों की जानकारी साझा की गई। दाल, सब्जियों, घी और अन्य पोषक तत्वों से तैयार भोजन को बच्चों के स्वाद के अनुरूप बनाने पर जोर दिया गया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बताया कि बच्चों को पौष्टिक भोजन स्वादिष्ट और आकर्षक तरीके से परोसा जाए तो वे उसे आसानी से स्वीकार करते हैं। इसी तरह चीनी और नमक की मात्रा नियंत्रित रखने तथा साफ-सफाई का ध्यान रखने को भी पोषण का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया।
‘बच्चे स्वस्थ होंगे तो देश समर्थ होगा’
कार्यक्रम में कहा गया कि विकसित भारत की नींव बचपन से ही रखी जानी है। बच्चे के जीवन के शुरुआती वर्षों, विशेषकर गर्भावस्था से दो वर्ष तक की अवधि को उसके भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया गया। इसी दौर में मिलने वाला पोषण और देखभाल उसके शारीरिक एवं मानसिक विकास की दिशा तय करती है। वक्ताओं ने कहा कि एक स्वस्थ बच्चा केवल परिवार की खुशहाली नहीं, बल्कि देश की भविष्य की ताकत है। इसलिए बच्चों के पोषण की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार या आंगनबाड़ी केंद्रों तक सीमित नहीं रह सकती। इसमें माता-पिता, परिवार और समुदाय की समान भागीदारी जरूरी है।
तकनीक से पारदर्शिता, माताओं तक योजनाओं की आसान पहुंच
कार्यक्रम में सरकारी योजनाओं को तकनीक और डिजिटल सेवाओं से जोड़ने की उपलब्धियां भी गिनाई गईं। एफआरएस के माध्यम से 64 लाख से अधिक माताओं के पारदर्शी नामांकन का उल्लेख किया गया। बैंकिंग सेवाओं को बहुभाषी बनाने, मोबाइल के जरिए आवेदन और भुगतान की स्थिति जानने तथा निर्धारित अवधि में सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी गई। वक्ताओं ने कहा कि पोषण अभियान अब केवल ‘कितने बच्चों को भोजन मिला’ का हिसाब नहीं, बल्कि भोजन की गुणवत्ता, स्वास्थ्य, स्वच्छता, व्यवहार परिवर्तन और परिवार की भागीदारी को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है।
काशी से निकली अपील—हर घर बने पोषण की पाठशाला
कार्यक्रम का संदेश साफ था—आंगनबाड़ी केंद्र में होने वाला अच्छा प्रयोग तभी अभियान बनेगा, जब वह घर तक पहुंचे।



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