Uttar Pradesh News: तेजस की मौत छोड़ गई कई सवाल, क्या बदल पाएगी शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर?
रिपोर्टर मनीष फतेहपुर, उत्तर प्रदेश
फतेहपुर। कक्षा 12 के छात्र तेजस की मौत ने पूरे जनपद को झकझोर कर रख दिया है। एक परिवार का इकलौता चिराग बुझ गया, लेकिन अपने पीछे वह ऐसे कई सवाल छोड़ गया है, जिनका जवाब आज भी तलाशा जा रहा है। तेजस अब इस दुनिया में नहीं है, मगर उसकी मौत से उठे सवाल आने वाले दिनों तक व्यवस्था को कठघरे में खड़ा करते रहेंगे। एक ओर यह घटना शिक्षा व्यवस्था की उस तस्वीर को सामने लाती है, जहां शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र के व्यवसायीकरण और विद्यार्थियों के साथ होने वाले कथित व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। दूसरी ओर, न्याय की तलाश में पीड़ित परिवार को जिस तरह अपनी आवाज उठानी पड़ी, उसने भी व्यवस्था की संवेदनशीलता पर सवालिया निशान लगा दिया है। तेजस की मौत के बाद अब राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के लोगों का पीड़ित परिवार के घर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है।
भाजपा, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि परिवार से मिलकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कर रहे हैं और हर संभव मदद का भरोसा दिला रहे हैं। नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के पहुंचने से परिवार को कुछ सहारा जरूर मिला है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी वहीं खड़ा है—क्या तेजस को न्याय मिल पाएगा? इस घटना ने केवल एक परिवार का दर्द सामने नहीं रखा, बल्कि यह सोचने पर भी मजबूर किया है कि आखिर हमारे शिक्षण संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा, सम्मान और मानसिक स्थिति को लेकर व्यवस्था कितनी गंभीर है? यदि किसी छात्र के साथ कोई विवाद उत्पन्न होता है तो उसे सुलझाने का मानवीय और संवेदनशील तरीका क्या होना चाहिए, इस पर भी गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। लेकिन इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल केवल तेजस तक सीमित नहीं है। सवाल यह है कि क्या इस घटना के बाद शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक बदलाव आएगा? क्या शिक्षण संस्थानों में बच्चों के साथ होने वाले व्यवहार की निगरानी और जवाबदेही तय होगी? क्या अभिभावकों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा? और सबसे अहम सवाल—क्या न्याय पाने के लिए किसी और परिवार को भी उसी तरह न्याय की चौखट पर माथा टेकना पड़ेगा?



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