Chhattisgarh News : कोरबा जिला अस्पताल में बड़े हादसे का इंतजार! जर्जर और टपकती छत के ऊपर धड़ल्ले से तानी जा रही है नई मंजिल!

ब्यूरो चीफ उदित कुमार कोरबा छत्तीसगढ़
कोरबा। औद्योगिक नगरी कोरबा के मुख्य जिला अस्पताल से लापरवाही की एक ऐसी डरावनी तस्वीर सामने आई है, जो कभी भी ‘बड़ा चिमनी कांड’ या ‘भीषण कंक्रीट हादसा’ बन सकती है। अस्पताल के आपातकालीन वार्ड (Emergency Ward) की छत अपनी क्षमता से अधिक लोड होने के कारण बीच से बुरी तरह झुक चुकी है , लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी और ठेकेदार आंखें मूंदकर इसके ऊपर एक और नई मंजिल ढालने की तैयारी में जुटे हैं। तस्वीरों में कैद हुई जानलेवा हकीकत (तारीख: 23-24 अगस्त 2026): अंदर का खौफनाक मंजर: इमरजेंसी वार्ड के अंदर की छत (GPS लोकेशन: 9p7v+vfj) कंक्रीट सड़ने के कारण काली पड़ चुकी है। भारी सीलन और पानी के लगातार रिसाव (Leakage) से अंदर का लोहा जंग खाकर खोखला हो चुका है। ऊपर मौत की तैयारी: ठीक इसी जर्जर और झुकी हुई छत के ऊपर (Lat: 22.364526°) भारी मात्रा में पानी जमा है। पानी के इस अतिरिक्त वजन और नई मंजिल के भारी-भरकम पिलर्स व लोहे की शटरिंग का पूरा लोड नीचे की कमजोर छत पर आ रहा है।

40 फीट की दूरी… इंजीनियरिंग का ब्लंडर! विशेषज्ञों के अनुसार, आपातकालीन वार्ड के दो पिलर्स के बीच की दूरी लगभग 40 फीट रखी गई है। बिना किसी विशेष हैवी सपोर्ट (जैसे स्टील गर्डर या पोस्ट-टेंशनिंग) के इतनी बड़ी छत डालना सिविल इंजीनियरिंग और नेशनल बिल्डिंग कोड (NBC) के नियमों का घोर उल्लंघन है। चौबीसों घंटे दांव पर सैकड़ों जिंदगियां, जिम्मेदार मौन क्यों?
नीचे वार्ड में हर वक्त गंभीर मरीज भर्ती रहते हैं, डॉक्टर और नर्स अपनी ड्यूटी करते हैं। ऊपर चल रही भारी मशीनों के कंपन (Vibration) और कंक्रीट के वजन से यह छत किसी भी समय ताश के पत्तों की तरह ढह सकती है। यह जानते हुए भी काम जारी रखना सीधे तौर पर आपराधिक कृत्य है। कोरबा के सबसे सक्रिय एवं युवा RTI कार्यकर्ता उदित कुमार ने इस मामले की शिकायत कोरबा के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के समक्ष किया है। उदित कुमार ने बताया कि 10 दिवस के भीतर मामले पर उचित कार्यवाही नहीं हुई तो अपने युवा साथियों के साथ धरना प्रदर्शन करेंगे।

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