Chhattisgarh News : बिलासपुर: परसदा निवासी प्रधान आरक्षक संजय जोशी ने लगाए गंभीर आरोप – कुटुंब न्यायालय में काउंसलिंग के दौरान पत्नी ने जड़ा थप्पड़, 2022 से पुलिस आरक्षक के साथ रहने का दावा

ब्यूरोचीफ राकेश कुमार साहू जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़
तलाक प्रकरण की काउंसलिंग के बीच ADR भवन में हंगामा और मारपीट, सिविल लाइन थाना में FIR दर्ज। पीड़ित का आरोप – आरक्षक क्र. 840 अरुण कमलवंशी के साथ पत्नी का अवैध संबंध, बिना तलाक दूसरी पत्नी के रूप में रखा, 28 से अधिक आवेदन देने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई बिलासपुर जिला न्यायालय के कुटुंब न्यायालय में चल रहे तलाक के एक मामले में काउंसलिंग के दौरान हंगामे का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मामले में विशेष शाखा बिलासपुर में पदस्थ प्रधान आरक्षक संजय जोशी, निवासी ग्राम परसदा भरनी, थाना सकरी ने अपनी पत्नी पर काउंसलिंग के दौरान मारपीट और गाली-गलौज करने का आरोप लगाया है। इस घटना की शिकायत सिविल लाइन थाना में FIR No. 1124/2026 के तहत दर्ज कराई गई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। कोर्ट के ADR भवन में क्या हुआ हंगामा? पीड़ित संजय जोशी के अनुसार आज कुटुंब न्यायालय के ADR भवन में उसके तलाक प्रकरण में काउंसलिंग की तारीख नियत थी। शासकीय अधिवक्ता के समक्ष वह अपने दस्तावेज प्रस्तुत कर रहा था, इसी दौरान उसकी पत्नी सरोज जोशी आक्रोशित हो गई। संजय जोशी ने शिकायत में बताया है कि – “मेरी पत्नी ने ‘हत्यारे परिवार से हो’ कहकर अश्लील गालियां दी, मेरा कॉलर पकड़कर दो थप्पड़ मारे और पीठ पर मुक्का मारा।” इस दौरान बीच-बचाव करने उसकी बहन अंकिता जोशी आई तो उसे भी धक्का दिया गया। वहां मौजूद अधिवक्ताओं ने बीच-बचाव कर दोनों को अलग किया। पीड़ित की बहन रजनी जोशी ने बताया कि यह पहला मौका नहीं है, 8-10 दिन पहले ही सरोज जोशी ने उनकी बुजुर्ग मां सावित्री देवी पर भी हमला किया था, जिससे वह घायल हैं।
विवाद की जड़ – 05 जुलाई 2022 की वह रात संजय जोशी के अनुसार इस पूरे पारिवारिक विवाद की शुरुआत 05 जुलाई 2022 की रात करीब 3:30 बजे हुई थी। संजय उस रात VIP ड्यूटी पेंड्रा से अपने घर परसदा भरनी लौटा था। आरोप है कि घर में जिला बल में पदस्थ आरक्षक क्रमांक 840 अरुण कुमार कमलवंशी, पिता रामप्यारे कमलवंशी, निवासी पुलिस लाइन बिलासपुर, उसकी पत्नी के साथ आपत्तिजनक स्थिति में मौजूद था। संजय को देखते ही आरोपी अपनी मोपेड क्रमांक CG 10-AJ-0626, चाबी और हेडफोन वहीं छोड़कर भाग गया। संजय ने तत्काल डायल 112 को सूचना दी और मोपेड को थाना सकरी में सुपुर्द किया।आरोप है कि उसी दिन सुबह 10 बजे आरोपी 8-10 लड़कों के साथ वापस आया और मोपेड छीनने की कोशिश करते हुए जान से मारने की धमकी दी। इतना ही नहीं, 08 जुलाई 2022 की शाम 7 बजे सफेद कार से आकर उसके 6 वर्षीय बेटे के अपहरण की भी कोशिश की गई।

थाना सकरी में ही पत्नी ने दिया था सहमति पत्र इस मामले में सबसे चौंकाने वाला दस्तावेज थाना सकरी में ही दिया गया एक लिखित सहमति पत्र है।05 जुलाई 2022 की शाम 5 बजे सरोज जोशी ने थाना सकरी में सभी परिवारजनों के समक्ष लिखित आवेदन देकर कथित तौर पर कहा था कि – “मैं अरुण कुमार कमलवंशी के साथ पत्नी के रूप में रहूंगी और आगे का जीवन उसी के साथ बिताऊंगी।” पीड़ित के अनुसार उस समय थाने में आरोपी अरुण और उसका भाई हेमंत कमलवंशी भी मौजूद थे। इस सहमति पत्र पर 10 गवाहों के हस्ताक्षर होने का दावा किया गया है। ग्राम पंचायत, समाज और 3 नोटरी शपथ पत्रों में भी पुष्टि का दावा पीड़ित ने बताया कि इस मामले में ग्राम पंचायत परसदा के सरपंच संतराम लहरे द्वारा 18/07/2022 को पंचनामा और 19/07/2022 को सतनामी समाज द्वारा प्रमाणीकरण जारी किया गया है, जिसमें उल्लेख है कि समझाइश देने पर सरोज ने कहा – “मुझे अपनी जिंदगी जीने का अधिकार है।” इसके अलावा 21 जनवरी 2023 को गरियाबंद नोटरी केशव कश्यप के समक्ष 3 अलग-अलग शपथ पत्र प्रस्तुत किए गए हैं – रामाधार बंधे, निवासी ग्राम आसरा, थाना पाण्डुका, जिला गरियाबंद – ने शपथ पत्र में कहा कि सरोज उनकी भतीजी है। हेमलाल देशलहरे, ग्राम खट्टी, जिला गरियाबंद – ने कहा कि सरोज उनकी भांजी है। रमेश कुमार बंदे, ग्राम शुक्लाभाठा – तीनों ने शपथपूर्वक बताया कि 05 जुलाई 2022 को उन्हें विवाद सुलझाने बिलासपुर बुलाया गया था, दोपहर 3 बजे समझाइश दी गई पर सरोज ने कोई जवाब नहीं दिया और शाम 5 बजे थाना में सहमति पत्र देकर चली गई। इसी बात की पुष्टि भाई चुम्मन लाल नवरंगे और शत्रुधन नवरंगे ने भी अपने अलग शपथ पत्रों में की है।
28 से अधिक आवेदन, फिर भी कार्रवाई नहीं का आरोप पीड़ित प्रधान आरक्षक संजय जोशी का आरोप है कि उसने न्याय के लिए थाना प्रभारी सकरी, उप पुलिस महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिलासपुर, पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर संभाग और पुलिस महानिदेशक रायपुर तक 09/09/2022 और 10/01/2023 को 12 दस्तावेज संलग्न कर 28 से 48 बार आवेदन दिए हैं, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आवेदन में सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया है कि आरक्षक क्र. 840 अरुण कुमार कमलवंशी शादीशुदा होते हुए, अपनी पूर्व पत्नी पूर्णिमा कमलवंशी को बिना तलाक दिए, थाना सकरी और तहसील कार्यालय में स्टांप पेपर पर लिखापढ़ी कर दूसरी पत्नी के रूप में सरोज को अपने साथ रखे हुए है, जो छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के तहत दंडनीय अपराध है। पीड़ित प्रधान आरक्षक की मांग पीड़ित संजय जोशी ने मांग की है कि आरोपी आरक्षक के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध कर विभागीय जांच की जाए और उसे सेवा से बर्खास्त किया जाए। साथ ही कोर्ट में हुई मारपीट की घटना पर भी सख्त कार्रवाई की जाए। फिलहाल सिविल लाइन पुलिस ने कोर्ट परिसर में हुई मारपीट की शिकायत पर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों के बयान और कोर्ट परिसर के साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
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