जागरूकता सप्ताह में गाजर घास उन्मूलन पर दिया बल
जागरूकता सप्ताह में गाजर घास उन्मूलन पर दिया बल

मनकापुर, गोण्डा। भारतीय खरपतवार विज्ञान संस्थान, जबलपुर द्वारा चलाए जा रहे देशव्यापी गाजर घास जागरूकता सप्ताह के तहत बुधवार, 19 अगस्त 2026 को ग्राम छिटईजोत, विकासखंड मनकापुर में गाजर घास जागरूकता दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्र, मनकापुर द्वारा किया गया।
कृषि विज्ञान केंद्र मनकापुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक (शस्य विज्ञान) डॉ. राम लखन सिंह ने किसानों को गाजर घास की पहचान, उससे होने वाले नुकसान तथा इसके उन्मूलन एवं प्रबंधन के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गाजर घास का अंग्रेजी नाम पार्थेनियम तथा वैज्ञानिक नाम पार्थेनियम हिस्ट्रोफोरस है। इसका बीज मेक्सिको से गेहूं के बीज के साथ भारत आया था और वर्ष 1956 में इसे पहली बार पुणे में देखा गया।
उन्होंने बताया कि गाजर घास मानव एवं पशु स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी बेहद हानिकारक है। एक पौधा अपने जीवनकाल में लगभग 1,000 से 50,000 तक बीज पैदा कर सकता है। इसका जीवनकाल करीब तीन से चार महीने का होता है। इसके संपर्क में आने से त्वचा संबंधी समस्याओं के साथ दमा एवं अस्थमा जैसी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
डॉ. ज्ञानदीप गुप्ता ने किसानों को सलाह दी कि फूल आने से पहले गाजर घास के पौधों को उखाड़कर उसका उन्मूलन या उचित प्रबंधन किया जाए। फूल आने से पहले निकाली गई गाजर घास से कंपोस्ट खाद भी तैयार की जा सकती है। उन्होंने बताया कि मैक्सिकन बीटिल कीट का उपयोग भी गाजर घास के जैविक नियंत्रण में किया जा सकता है।
कार्यक्रम में राजेश कुमार वर्मा, रामसागर वर्मा, रामशंकर, ओमप्रकाश, दीपक, विशेष एवं रुचि वर्मा सहित अन्य प्रतिभागियों ने गाजर घास के दुष्प्रभाव एवं नियंत्रण की जानकारी प्राप्त की। सभी ने गाजर घास के सामूहिक उन्मूलन का संकल्प लिया।

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