Chhattisgarh News : छत्तीसगढ़ विधानसभा सचिवालय में भर्ति भ्रष्टाचार। अपने करीबियों, रिश्तेदारों और पसंदीद लोगों को रेवड़ियों की तरह नौकरियां बांटने तथा भ्रष्टाचार करने का मामला।
ब्यूरोचीफ राकेश कुमार साहू जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़
रायपुर अपर सत्र न्यायधीश के समक्ष धारा 156(3) CrPC के तहत याचिका दायर कर विधानसभा सचिव दिनेश शर्मा के विरुद्ध (IPC 420, 467, 471) की धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग ।
भ्रष्टाचार व अनियमितता के मुख्य आरोप:
1️⃣ आरक्षण व भर्ती नियमों की उड़ाईं धज्जियां:
आरोप है कि दिनेश शर्मा ने नियमित चयन प्रक्रिया को ताक पर रखकर चहेतों को सीधी बैक-डोर एंट्री दी:
* सहायक ग्रेड-03 व अनुवादक: तोरण लाल कुम्भकार, कुमुदनी साहू, अनिल गोटेफोड़े, अशोक अग्रवाल, युक्ति साहू और सतीश दीवान।
* वाहन चालक: संजय कुमार घरडे, संजय साहू, गोलू, जायता यादव और हेमंत राजपूत।
* बुक-लिफ्टर: सुनील देशमुख।
2️⃣ अफसरों व कर्मचारियों के परिजनों को बांटी नौकरियां:
मेधावी युवाओं का हक मारकर विधानसभा के अंदर पदस्थ कर्मचारियों और अधिकारियों के रिश्तेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया:
* शुभम प्रजापति (कर्मचारी दिलीप प्रजापति के पुत्र)
* निलेश देवांगन (कर्मचारी के भाई)
* लखवीर कौर (SDO की बहन)
* भूपेंद्र साहू (कारपेंटर के भाई)
* हेम कुमार यादव (प्लम्बर के बेटे)
* ऋतू साहू (भृत्य की बेटी)
* भूपेंद्र श्रीवास्तव (अधिकारी के पुत्र)
(सूची में राकेश साहू, पूजा चौहान और मुकेश देवांगन के नाम भी दर्ज हैं।)
3️⃣ TCS को 2-3 करोड़ रुपये का भुगतान, फिर भी परिणाम गायब:
सहायक ग्रेड-03 परीक्षा कराने वाली एजेंसी TCS को करोड़ों रुपये दिए गए और परीक्षार्थियों से शुल्क वसूला गया। रिजल्ट जारी होने के बावजूद मेरिट अभ्यर्थियों को दरकिनार कर पिछले दरवाजे से नियुक्तियां।
4️⃣ अदालत के आदेशों का उल्लंघन:
हाईकोर्ट (याचिका क्र. 2337/2012) एवं सुप्रीम कोर्ट द्वारा निष्पक्ष भर्ती के लिए दिए गए स्पष्ट निर्देशों और समयावधि की खुलेआम अवहेलना।
5️⃣ थाना व SSP से कार्रवाई न होने पर कोर्ट का रुख:
विधानसभा थाना एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) रायपुर को शिकायत सौंपने पर भी जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तब निष्पक्ष जांच और FIR के लिए कोर्ट की शरण।
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