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Chhattisgarh News : अस्पताल की गंभीर लापरवाही: सरगुजा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मृत आरक्षक का आयुष्मान कार्ड पर इलाज 42 दिनों तक कागजों में चलता रहा।

रिपोर्टर मनोज मानिकपुरी कोरबा छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से स्वास्थ्य विभाग की एक बेहद चौंकाने वाली और शर्मनाक लापरवाही सामने आई है। अंबिकापुर स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ने वाले एक आरक्षक का नाम आयुष्मान योजना के पोर्टल पर 42 दिनों तक जिंदा रखा गया और कागजों में उसका ‘इलाज’ चलता रहा। हद तो तब हो गई जब मौत के डेढ़ महीने बाद मृत आरक्षक की पत्नी के मोबाइल पर यह संदेश आया कि उनके पति स्वस्थ होकर अस्पताल से घर लौट रहे हैं।

​क्या है पूरा मामला? ​जशपुर जिले के कटंगखार निवासी आरक्षक देवनारायण राम को गंभीर स्थिति में 26 जून को अंबिकापुर के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान महज 4 दिन बाद यानी 30 जून को उनकी मौत हो गई थी। अस्पताल प्रबंधन ने नियमानुसार उनका डेथ सर्टिफिकेट (मृत्यु प्रमाण पत्र) भी जारी कर दिया था।
​लेकिन हैरानी की बात यह है कि अस्पताल के रिकॉर्ड और आयुष्मान योजना के पोर्टल पर आरक्षक को लगातार भर्ती दिखाया जाता रहा। ​42 दिन बाद आया चौकाने वाला मैसेज ​मृतक आरक्षक की पत्नी सीमा कुजूर, जो खुद जशपुर जिला अस्पताल में स्टाफ नर्स के पद पर कार्यरत हैं, उनके मोबाइल पर घटना के 42 दिन बाद ‘आयुष्मान सारथी’ योजना की ओर से एक मैसेज आया। मैसेज में लिखा था— ​“प्रिय देवनारायण, आप स्वस्थ होकर घर जा रहे हैं।” ​अपने पति की मौत के हफ्तों बाद इस तरह का संवेदनशील और गैर-जिम्मेदाराना संदेश देखकर पत्नी का मानसिक रूप से टूट जाना स्वाभाविक था।


​सिस्टम पर उठ रहे बड़े सवाल ​सीमा कुजूर ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यह महज कोई साधारण तकनीकी गलती नहीं है, बल्कि आयुष्मान योजना के रिकॉर्ड में चल रहे किसी बड़े खेल की ओर इशारा करता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब स्वास्थ्य विभाग के भीतर ही मृत व्यक्ति को महीनों तक जीवित और भर्ती दिखाया जा रहा है, तो आम जनता के साथ क्या होता होगा? ​उन्होंने शासन-प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और इस घोर लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। ​अधिकारियों की प्रतिक्रिया: इस मामले में जब सरगुजा के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पीएस मार्को से संपर्क किया गया, तो उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आयुष्मान योजना का काम सिविल सर्जन देखते हैं, वही इस पर सटीक जानकारी दे सकेंगे। हालांकि, सिविल सर्जन डॉ. जेके रेलवानी से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

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